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बीजेपी के प्रोग्राम में अंसार। फोटो आम आदमी पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से

जहांगीरपुरीः अंसार किसका, बीजेपी कहे तेरा, 'आप' कहे तेरा

जहांगीरपुरी साम्प्रदायिक हिंसा में दिल्ली पुलिस ने अंसार नामक युवक को मास्टरमाइंड बताया है। पुलिस ने जैसे ही उसके बारे में मीडिया को जानकारी दी तो फौरन यह सवाल उठा कि अंसार कौन है। पुलिस ने फिर खुद ही बताया कि अंसार हिस्ट्रीशीटर है और उसके खिलाफ जुए के दो केस दर्ज हैं। हालांकि पुलिस ने अंसार के बारे में जानकारी देते हुए उसे इलाके का मुस्लिम नेता कहा था। 

अंसार का नाम सामने आने के बाद बीजेपी ने आरोप लगाया कि अंसार दरअसल आम आदमी पार्टी का नेता है। लेकिन अब आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि अंसार तो दरअसल बीजेपी का नेता है। उन्होंने उसके बीजेपी से जुड़े होने के सबूत भी पेश किए हैं। मंगलवार को दिल्ली के तमाम अखबार बीजेपी के इस आरोप से भरे हुए हैं कि अंसार आप का नेता है।  जहांगीरपुरी बी और सी ब्लॉक जहां 16 अप्रैल को घटना हुई, इलाके के एक समुदाय के लोगों का कहना है कि वे अंसार को एक सोशल वर्कर के रूप में जानते हैं जो उनके दुख-दर्द में शामिल रहता था। 

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सच क्या है? बीजेपी सही है कि आप सही है कि स्थानीय लोग सही हैं। स्थानीय लोगों के बयानों से यह तो साफ है कि अंसार जिस भी पार्टी का हो, वो इलाके में लोकल नेता या सोशल वर्कर के रूप में सक्रिय है। हालांकि अंसार का 16 अप्रैल का एक ऐसा भी वीडियो सामने आया था, जिसमें उसने बजरंग दल के एक कार्यकर्ता को चाकू के साथ पकड़ा और उसे समझा रहा है कि ये सब करना बुरी बात है। हम सब हिन्दू मुसलमानों को मिलकर रहना चाहिए। वीडियो में बजरंग दल के उस युवक को भीड़ ने घेरा हुआ है। अंसार उस युवक के हाथ से चाकू ले लेता है और फिर उसे जाने के लिए कहता है। पुलिस ने इस वीडियो पर चुप्पी साधी हुई है। मीडिया ने अंसार के इस वीडियो को कोई महत्व नहीं दिया। 

लेकिन आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से शाम 5ः16 बजे चार फोटो शेयर किए हैं। जिसमें अंसार ने बीजेपी की टोपी लगाई हुई है। एक फोटो में उसे बीजेपी के किसी कार्यक्रम में शामिल होते हुए दिखाया गया है। दूसरे फोटो में वो बीजेपी के किसी नेता के साथ खड़ा हुआ है जो उसी इलाके का है। दोनों ने बीजेपी का बैच सीने पर लगा रखा है, जिसे चुनाव के दौरान पीएम से लेकर तमाम बीजेपी नेता लगाते हैं। एक अन्य फोटो में वो बीजेपी के प्रोग्राम में मंच पर उंगली से वी का निशाना बनाता दिख रहा है। मंच पर बीजेपी या उससे जुड़े संगठनों के स्थानीय नेता दिखाई दे रहे हैं, जो इन दिनों जहांगीरपुरी में पुलिस के साथ पीस मार्च में भी दिखाई दे रहे हैं।

Jahangirpuri: Whose Ansar, BJP says AAP's, AAP says BJP's - Satya Hindi
लोकल बीजेपी नेता के साथ अंसार (बाएं)

अंसार के बीजेपी नेताओं के साथ वाले फोटो आम आदमी पार्टी के ट्वीट के जरिए सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लेकिन इसके जवाब में उतनी ही तेजी से बीजेपी के लोग भी उस फोटो को वायरल कर रहे हैं, जिसमें अंसार ने आम आदमी पार्टी की टोपी लगा रखी है। बीजेपी नेता यह आरोप कल से ही लगा रहे थे कि अंसार आप का है। लेकिन आप ने आज बाजी पलट दी। सोशल मीडिया पर लोग अब फैसला नहीं कर पा रहे हैं कि आखिर वो अंसार को किस पार्टी का मानें? सोशल मीडिया पर लोग जो भी मानें लेकिन समुदाय विशेष के लोकल लोग अंसार को सिर्फ सोशल वर्कर के रूप में जानते हैं, जो उनके लिए खड़ा रहता था। उन्हें अंसार के खिलाफ पुलिस के आरोपों में दम नहीं लगता। लेकिन अंसार को पकड़ने के बाद ही पुलिस ने जहांगीरपुरी की हिंसा के पीछे आपराधिक साजिश की बात कही है। इसी आधार पर उसने केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भी भेजी है।

अंसार का केस देर सवेर अदालत में चलेगा। ऐसे में दोनों राजनीतिक दलों की तरफ से ट्वीट किए गए फोटो काफी अहम सबूत बनेंगे। अंसार के जवाब भी कोर्ट में दिलचस्प होने वाले हैं। 

बता दें कि 16 अप्रैल को जहांगीरपुरी में शाम को शोभायात्रा निकली थी। हालांकि पुलिस का कहना है कि इस शोभायात्रा की अनुमति नहीं ली गई थी। शाम को रोजा खोलने के दौरान मस्जिद के सामने शोभायात्रा में शामिल लोगों और मुस्लिम समुदाय के लोगों में विवाद हुआ और शीघ्र ही यह हिंसा में बदल गया। इस दौरान पथराव हुआ और कई वाहनों में आग लगा दी गई। शोभायात्रा के दौरान कुछ लोगों को एक खास ड्रेस में पिस्तौल, तलवारें, चाकू और डंडे लहराते देखा गया। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए। एक सब इंस्पेक्टर के हाथ में गोली लगी। पुलिस ने पहले दिन एक ही समुदाय के 14 लोगों को गिरफ्तार किया। 

फिर जब मीडिया ने हिंसा की सच्चाई बताई और सत्य हिन्दी ने सवाल पूछे तो दिल्ली पुलिस ने शोभायात्रा के आयोजक वीएचपी नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किए। हालांकि बाद में पुलिस अपने बयान से पलट भी गई। लेकिन पुलिस ने यह जरूर कहा कि उसने उस शोभायात्रा को अनुमति नहीं दी, जिसमें हिंसा हुई थी। इसके बाद वीएचपी नेताओं ने पुलिस को धमकी दी कि अगर उसके किसी कार्यकर्ता को पकड़ा तो आंदोलन होगा। 

 

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