अमेरिका के साथ भारत का व्यापार सौदा क्या इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि पीएम मोदी ने ट्रंप को फोन नहीं किया? अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटिनक के दावे पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया के मायने क्या?
रणधीर जायसवाल और हॉवर्ड लुटनिक
भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के उस बयान को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौता इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया। एमईए ने कहा है कि यह दावा गलत है और दोनों नेताओं ने 2025 में कुल 8 बार फोन पर बात की है। हालाँकि, उन्होंने यह साफ़ नहीं किया कि लुटनिक के अनुसार जब पीएम मोदी को ट्रंप को फोन करना था तब किया था या नहीं। विपक्षी दल यही आरोप लगा रहे हैं कि जब फोन करना था तब नहीं किया गया और इसमें काफ़ी देरी की गई।
लुटनिक ने क्या कहा है?
अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने गुरुवार को 'ऑल इन' पॉडकास्ट में उद्यमी चमथ पलिहापितिया के साथ बातचीत में दावा किया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील इसलिए नहीं हुई क्योंकि पीएम मोदी ने ट्रंप को फोन नहीं किया।
लुटनिक ने कहा, 'मैंने डील का पूरा सेटअप किया था। लेकिन इसके लिए मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप को फोन करना था। भारत इससे असहज था, इसलिए मोदी ने फोन नहीं किया।' उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के साथ ट्रेड डील की, लेकिन भारत के साथ पहले होनी चाहिए थी। उनका कहना था कि अमेरिका ने इन देशों के साथ ऊंची दर पर डील की क्योंकि भारत से पहले हो जाती तो बेहतर होता। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में भारत तैयार हुआ और कहा, 'तो हम तैयार हैं', मैंने कहा, 'किस चीज के लिए तैयार?' यानी ट्रेन छूट चुकी थी।
लुटनिक के बयान पर भारत में हंगामा
लुटनिक के इस बयान पर भारत में हंगामा मच गया। मोदी सरकार पर यह कहकर हमला किया गया कि जब अपनी छवि चमकानी होती है तो बात करने के लिए गिड़गिड़ाने लगते हैं, लेकिन जब बारी देश के लिए बात करने की आती है तो हिचकिचाते हैं। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर इसके लिए जबरदस्त हमला किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अमेरिका से भारत की ट्रेड डील ना होने के जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी हैं। कांग्रेस ने कहा कि आज बीजेपी और मोदी समर्थक अमेरिकी कॉमर्स सचिव की आधी अधूरी बात सुन कर ख़ुश हो रहे हैं, लेकिन पूरा सच देश विरोधी हरकत का प्रमाण है।
पार्टी ने कहा, 'असलियत यह है कि मोदी ट्रम्प को फ़ोन करने से झिझक रहे थे, इसलिए ट्रेड डील नहीं हो पाई। हालाँकि, 3 हफ्ते बाद ही मोदी और उनकी सरकार बात करने को तैयार हो गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।'
कांग्रेस ने समझाई पूरी क्रोनोलॉजी
- अमेरिका 'पहले आओ-पहले पाओ' के नियम के तहत ट्रेड डील कर रहा है।
- ट्रेड डील में पहले भारत का नंबर 2 था, हमसे पहले यूके के प्रधानमंत्री ने समय पर बात करके अपनी डील फाइनल कर ली थी।
- जब हमारा नंबर आया तो नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने तेजी से काम नहीं किया। अगर काम किया होता तो आज ट्रेड डील हो जाती।
- लेकिन ये हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे और वक्त निकल गया। अब अमेरिका के आगे डील के लिए गुहार लगा रहे हैं, लेकिन वो राजी नहीं हो रहा है।
फिर आई एमईए की प्रतिक्रिया
भारत के विदेश मंत्रालय यानी एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, 'हमने इन टिप्पणियों को देखा है। भारत और अमेरिका 13 फरवरी 2025 से ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए प्रतिबद्ध थे। उसके बाद दोनों पक्षों ने कई दौर की बातचीत की। कई बार हम समझौते के बहुत क़रीब पहुँच गए थे। रिपोर्ट में बताए गए तरीक़े से इन चर्चाओं का अर्थ निकालना सही नहीं है।'जायसवाल ने आगे कहा, 'हम दोनों एक दूसरे के पूरक अर्थव्यवस्थाओं के बीच पारस्परिक लाभ वाला व्यापार समझौता करने में रुचि रखते हैं। हम इसे जल्द पूरा करने की उम्मीद करते हैं। वैसे, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने 2025 में 8 बार फोन पर बात की है। इन बातचीत में हमारे व्यापक संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।'
उन्होंने यह भी जोड़ा कि मोदी और ट्रंप के बीच 'दोस्ताना संबंध' है और दोनों नेता हमेशा एक-दूसरे से राजनयिक सम्मान के साथ बात करते हैं।
ट्रेड डील पर बातचीत कहाँ तक पहुँची?
भारत और अमेरिका के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट या मिनी ट्रेड डील पर लंबे समय से बात चल रही है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ रहा है, लेकिन टैरिफ, सब्सिडी और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर मतभेद हैं। 2025 में कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो सका।
अब 500% टैरिफ़ की आशंका
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड और टैरिफ पर तनाव है। ट्रंप ने हाल ही में रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने वाले बिल को मंजूरी दी है, जिससे भारत पर असर पड़ सकता है।
इस मामले से अब भारत-अमेरिका संबंधों पर नई बहस छिड़ गई है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत है, लेकिन व्यापार पर अभी भी चुनौतियाँ बाक़ी हैं। इस पूरे मामले में विपक्षी नेता मोदी सरकार की कूटनीति और विदेश नीति पर सवाल खड़े कर रहे हैं।