पश्चिम बंगाल सरकार के पशु वध पर लागू किए गए सख्त नियमों के मुकाबले मुस्लिमों और उनके मौलानाओं की रणनीति काम कर रही है।उन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर दी है। बीजेपी सरकार ने इस मांग पर चुप्पी साध ली है। व्यापारी परेशान है।
ईद-उल-अज़हा (बकरीद) से ठीक पहले पश्चिम बंगाल में गौ-हत्या और मवेशी खरीद-बिक्री पर सख्ती के बीच मुस्लिमों की रणनीति काम कर रही है। बंगाल में पशु बाजार सूने हैं। त्यौहार पर पहली बार ऐसा हुआ। बकरीद में मुसलमान इन बाज़ारों के सबसे बड़े ग्राहक थे। लेकिन इस बार वो इस बाज़ार में पशु खरीदने पहुंचे ही नहीं। लेकिन इसके पीछे तमाम मस्जिदों के इमाम और मौलाना लोगों का दिमाग है। वो पिछले हफ्ते से लगातार अपील कर रहे हैं कि मुस्लिम गाय की कुर्बानी नहीं दें। उन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर दी है। कोलकाता की प्रसिद्ध नाखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना शफीक कासमी से लेकर मौलाना अरशद मदनी तक ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है। बंगाल की बीजेपी सरकार की सख्ती को लेकर गुरुवार को पशु व्यापारियों ने प्रदर्शन भी किए, जिन्हें पुलिस ने डंडा बरसाकर भगाया।
कोलकाता की नाखोदा मस्जिद के मौलाना शफीक कासमी ने कहा, “मैं अपने मुस्लिम भाइयों से अपील करता हूं कि गायों की कुर्बानी न दें। बल्कि उन्हें गोमांस खाना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। केंद्र सरकार को गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए।” उन्होंने सुझाव दिया कि गाय की जगह बकरे या भेड़ की कुर्बानी दी जाए। ऐसी ही अपील मौलाना अरशद मदनी पिछले हफ्ते से कर रहे हैं।
पश्चिम बंगाल सरकार की नई पाबंदियां
मस्जिद के इमामों और मौलानाओं की अपील राज्य सरकार के 13 मई के आदेश के बाद आई, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर गौ-हत्या पर प्रतिबंध लगाया गया है और मवेशी वध के लिए सख्त शर्तें तय की गई हैं। बैल, सांड, गाय, बछड़े, भैंस और भैंस के बछड़ों की हत्या के लिए स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी और सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारी से फिटनेस प्रमाण-पत्र लेना अनिवार्य है। प्रमाण-पत्र में यह उल्लेख होना चाहिए कि पशु 14 वर्ष से अधिक उम्र का है या स्थायी रूप से अक्षम है। वध केवल स्वीकृत वधशालाओं (स्लाटर हाउस) में ही किया जा सकता है। उल्लंघन पर जेल और जुर्माना का प्रावधान है। ईद 28 मई को मनाई जाएगी।
इमामों की मांगें और मुद्दे
बंगाल के मौलानाओं ने बंगाल सरकार से मांग की कि पहले हर क्षेत्र में स्लाटर हाउस बनाए जाएं और हर बाजार में पशु डॉक्टर उपलब्ध कराए जाएं। अगर सरकार बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं करा सकती तो गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर उसके वध और गोमांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दे। उन्होंने कहा कि सभी प्रकार के पशु बलिदान पर प्रतिबंध लगाया जाए, चाहे वह इस्लामिक हो या हिंदू मंदिरों में किया जाने वाला। उन्होंने विरोधाभासों पर सवाल उठाते हुए कहा, “एक तरफ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोमांस निर्यातक है, बड़े slaughterhouses में इस्लामिक तरीके से वध होता है और अरबों रुपये कमाए जाते हैं। दूसरी तरफ भारतीयों को गोमांस खाने से रोका जाता है, उन पर मारपीट और हत्या होती है। ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए।”
फुरफुरा शरीफ से भी अपील
हुगली जिले के प्रसिद्ध फुरफुरा शरीफ के पीरजादा जियाउद्दीन सिद्दीकी ने इमामों की मांग की वजह मीडिया को बताई। उन्होंने कहा, “हिंदू गाय की पूजा करते हैं, तो हम गोमांस क्यों खाएं? हम बकरे और भेड़ खा सकते हैं।” भारतीय सेकुलर फ्रंट के नेता और भांगड़ से विधायक नवसाद सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को पत्र लिखकर धार्मिक उद्देश्य के लिए छूट देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह मल्टी-करोड़ का कारोबार है, जिसका नियंत्रण हिंदुओं के पास है और बंगाल समेत देश की चमड़े की इंडस्ट्री मवेशियों की खाल पर निर्भर है। मुसलमानों को गौहत्या के लिए जबरन बदनाम किया जाता है। लेकिन वक्त के साथ असलियत सामने आ गई है।
व्यापारी पस्त, कारोबार ठप
हिंदू समुदाय के व्यापारियों ने बताया कि हाल के आदेश के कारण मुसलमानों ने गाय खरीदने से मना कर दिया है। बाजारों में बहुत कम लोग आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “अगर मुसलमान गोमांस खाना बंद कर देंगे तो हिंदू कारोबारियों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, मुसलमानों को नहीं। डेयरी कारोबार करने वाले हिंदू परिवार बकरीद पर गाय बेचते हैं। वे अपनी सारी कमाई एक गाय में लगा देते हैं। अगर नहीं बिकी तो भारी नुकसान होगा।”
बीजेपी की चुप्पी, शंकराचार्य ने किया स्वागत
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग पर बीजेपी और आरएसएस ने चुप्पी साध ली है। उन्होंने मौलाना अरशद मदनी तक की अपील पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसका स्वागत किया। उन्होंने मौलानाओं और इमामों की मांग का समर्थन किया कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि गाय को सिर्फ राष्ट्रीय पशु ही नहीं राष्ट्रीय माता घोषित किया जाए। शंकराचार्य ने गायों को कटने से बचाने और उनकी रक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'गो-एलएक्स (Go-LX/G-OLX)' नामक एक विशेष ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू करने की घोषणा की है。 इसके तहत जो हिंदू अपनी गाय नहीं रख सकते, वे उन्हें सीधे शंकराचार्य को बेच सकेंगे।