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फ़ोटो साभार - फ़ेसबुक

नए ट्रैफ़िक नियमों के ख़िलाफ़ कई बीजेपी राज्य, गडकरी को झटका! 

मोदी सरकार नया मोटर व्हीकल एक्ट क्या लेकर आई, उसके लिए मुश्किलें खड़ी होनी शुरू हो गई हैं। बीजेपी शासित कई राज्यों ने इसे इसी रूप में अपनाने से इनकार कर दिया है तो फिर विपक्ष कैसे स्वीकार करेगा। विपक्षी दलों की राज्य सरकारों ने भी इस एक्ट को भारी जुर्माने के साथ लागू करने से मना कर दिया है। इन राज्यों में पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश शामिल हैं। 

दूसरी ओर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि उन्हें इस बात से कोई परेशानी नहीं है कि राज्य सरकारें ट्रैफ़िक नियमों के उल्लंघन पर लगने वाले जुर्माने की राशि को कम कर रही हैं। अंग्रेजी समाचार चैनल सीएनएन-न्यूज 18 से बात करते हुए गडकरी ने कहा कि ज़्यादा जुर्माना लगाने का फ़ैसला दुर्घटनाओं को कम करने और लोगों का जीवन बचाने के लिए लिया गया है। 

बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को शायद यह अंदाजा नहीं रहा होगा कि उसी की पार्टी के शासित राज्यों की सरकारें इसका विरोध करेंगी।

सबसे पहले बात करते हैं गुजरात की। गुजरात वह राज्य है जहाँ से बीजेपी और सरकार की दो सबसे ताक़तवर शख़्सियतें आती हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने जुर्माना राशि में कटौती का ऐलान किया है और ट्रैफ़िक नियमों के उल्लंघन के कई मामलों में जुर्माने की राशि को 90 फ़ीसदी तक घटा दिया। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश की सरकार ने कहा है कि वह नए नियमों को लागू करने से पहले लोगों को जागरूक करेगी और उन्हें दस्तावेज बनाने के लिए समय भी देगी। 

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उत्तराखंड की बीजेपी सरकार ने भी जुर्माने की राशि में भारी कटौती की है और इसका सीधा मतलब है कि वह मोटर व्हीकल एक्ट को इस रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बारे में अभी कोई नोटिफ़िकेशन जारी नहीं किया है। हरियाणा की सरकार ने भी कहा है कि वह पहले इस बारे में लोगों को जागरूक करेगी। 

बीजेपी को डर इस बात का भी है कि कहीं आने वाले तीन राज्यों जिनमें अगले दो महीने में चुनाव होने हैं, मोटर व्हीकल एक्ट के तहत लगने वाले भारी जुर्माने के कारण लोगों में जो नाराज़गी है, इससे उसे सियासी नुक़सान न हो जाए। पार्टी में इस पर मंथन चल रहा है।

कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना लिया है और बुधवार को युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत भारी जुर्माना लगाने के ख़िलाफ़ नितिन गडकरी के दिल्ली स्थित आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। 

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हालाँकि गडकरी ने इस एक्ट का जोरदार समर्थन करते हुए सीएनएन-न्यूज़ 18 से कहा, ‘जो लोग ट्रैफ़िक नियमों का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं, उन्हें इससे डरने की ज़रूरत नहीं है और उन्हें कोई जुर्माना भी नहीं देना है।’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह वह समय है जब लोगों को नियम-क़ानूनों को स्वीकार करना चाहिए क्योंकि हमारे देश में सबसे ज़्यादा सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं और उनमें मरने वालों की भी संख्या भी सबसे ज़्यादा है। 

गडकरी इस मुद्दे पर लगातार टीवी चैनलों पर अपनी बात रख रहे हैं। एनडीटीवी से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘जो राज्य जुर्माने की राशि को लागू करने से मना कर रहे हैं, क्या जीवन पैसों से ज़्यादा महत्वपूर्ण है। यह क़दम जिंदगियाँ बचाने के लिए लिया गया है।’ गडकरी ने कहा कि लोगों में क़ानून का डर होना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि निर्भया मामले के बाद बलात्कार के मामलों में मौत की सजा क्यों तय की गई, सिर्फ़ इसलिए कि लोगों में क़ानून का डर हो। 

नये मोटर वाहन संशोधन अधिनियम के तहत लगने वाले जुर्माना।
बता दें कि देश भर में नये मोटर वाहन संशोधन अधिनियम के तहत एक सितंबर से नये नियम लागू कर दिये गये हैं। इसमें कुछ मामलों में चार गुना से अधिक जुर्माना लगाया गया है। साथ ही ड्राइविंग लाइसेंस को जारी करने के लिए भी नियम सख़्त कर दिये गये हैं। सीट बेल्ट नहीं लगाने के लिए जुर्माना 1000 रुपये कर दिया गया है जबकि पहले यह 300 रुपये था। इमरजेंसी वाहन (एबुलेंस) को रास्ता न देने पर पहले कोई जुर्माना नहीं था लेकिन अब ऐसा करने पर 10 हज़ार रुपये का चालान देना होगा। इसी तरह शराब पीकर गाड़ी चलाने पर पहले जुर्माना 2000 रुपये था लेकिन अब इसे बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया गया है। 
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नए ट्रैफ़िक नियम लागू होने के बाद जब सबसे पहले गुड़गांव में एक स्कूटी का 23 हज़ार रुपये का चालान हुआ तो लोग हैरत में पड़ गए जबकि स्कूटी की बाज़ार क़ीमत सिर्फ़ 15 हज़ार रुपये थी। इसके बाद गुड़गांव में ही एक ट्रक ड्राइवर का ट्रैफ़िक पुलिस ने 59 हज़ार रुपये का चालान कर दिया और दिल्ली में हाल ही में राजस्थान के एक ट्रक का ओवरलोडिंग के चलते 1,41,000 रुपये का चालान किया गया है। 

देश भर में इस बारे में सोशल मीडिया से लेकर घरों-चौराहों पर चर्चा कर रहे लोगों की जुबां पर एक बात ज़रूर है कि ट्रैफ़िक नियमों का कड़ाई से पालन करवाना बहुत अच्छा क़दम है। लेकिन वे साथ ही यह भी कहते हैं कि जुर्माने की राशि इतनी होनी चाहिए कि लोगों को दूसरों से उधार न लेना पड़े क्योंकि भारत मध्यम आय वर्ग वाला देश है। अधिकांश लोग निजी फ़ाइनेंस कम्पनियों से क़र्ज़ लेकर या पैसा जुटाकर ही वाहन ख़रीदते हैं। ऐसे लोगों को यदि पाँच, दस और बीस हज़ार रुपये जुर्माने का भुगतान करना पड़ा तो वे कैसे करेंगे। 

अब सवाल यह है कि क्या गुजरात, उत्तराखंड के द्वारा जुर्माने की राशि को कम किये जाने के बाद कहीं और बीजेपी शासित राज्य भी तो इसी नक्शे पर नहीं चल पड़ेंगे। अगर ऐसा हुआ तो यह केंद्र सरकार और उससे ज़्यादा गडकरी के लिए एक झटके की तरह होगा क्योंकि इसे उनके मंत्रालय की अहमियत को और ख़ुद गडकरी के राजनीतिक क़द को कम करके आंका जा सकता है। 
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