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भीमा कोरेगाँव एनआईए चार्जशीट में नवलखा, तेलतुम्बडे, स्टैन स्वामी के नाम, माओवादियों से रिश्ते? 

क्या राष्ट्रीय जाँच एजेन्सी सरकार की नीतियों की आलोचना करने वालों को चुन-चुन कर निशाना बना रही है और उन्हें भीमा कोरेगाँव मामले में जानबूझ कर फँसा रही है? या क्या ये सभी अभियुक्त भारतीय व्यवस्था को उखाड़ फ़ेंकने के लिए बने प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी के लोग हैं? सचमुच पाकिस्तान ने भारत को अस्थिर करने की साजिश रची और गौमत नवलखा, आनंद तेलतुम्बडे और स्टैन स्वामी जैसे लोग इसमें शामिल हैं? 

एनआईए चार्जशीट 

ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि भीमा कोरेगाँव कांड की जाँच संभालने के लगभग 10 महीने बाद एनआईए ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें 8 लोगों के नाम हैं और इन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।एनआईए ने चार्जशीट में कहा है कि 1 जनवरी 2018 को 'योजनाबद्ध रणनीति' के तहत दलितों पर हमले हुए थे।
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इस मामले में अब तक की अंतिम गिरफ़्तारी गुरुवार को हुई। झारखंड में आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रहे जेसुइट पादरी फ़ादर स्टैन स्वामी को गिरफ़्तार किया गया। उन पर माओवादियों से संबंध रखने का आरोप लगाया गया है। यह भी कहा गया है कि स्वामी की संस्थान 'पर्सक्यूटिड प्रिज़नर्स सॉलिडरिटी कमिटी' माओवादियों की संस्था है। इसी तरह कबीर कला मंच पर भी प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी का फ्रंटल ऑर्जनाइजेशन होने का आरोप लगाया गया है।

8 अभियुक्त नामजद

दस हज़ार पेज की चार्जशीट में मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा, प्रोफ़ेसर आनंद तेलतुम्बडे, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर हैनी बाबू, कबीर कला मंच की ज्योति जगताप, सागर गोरखे और रमेश गायचोर को भी नामजद किया गया है। सीपीआई माओवादी के मिलिंद तेलतुम्बडे के भी नाम है, जो अब तक फ़रार हैं।
आनंद तेलतुम्बडे पर आरोप है कि वह भीमा कोरेगाँव शौर्य दिन प्रेरणा अभियान के संयोजक हैं और 31 दिसंबर 2017 को एलगार परिषद के कार्यक्रम में मौजूद थे।
गौतम नवलखा पर अधिक गंभीर आरोप हैं। एनआईए ने पूरक चार्जशीट में कहा है कि पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के साथ गौतम नवलखा के तार जुड़े हैं। उन्होंने सीपीआई माओवादियों के साथ गोपनीय संपर्क भी रखे हैं।

कश्मीरी अलगाववादी से जुड़े तार

एनआईए ने कहा है, 'गौतम नवलखा को बुद्धिजीवियों को सरकार के ख़िलाफ़ एकजुट करने की ज़िम्मेदारी दी गई थी। वह फैक्ट फाइन्डिंग कमिटी में थे और उन्हें सीपीआई माओवादी के गुरिल्ला कार्यकर्ताओं की नियुक्ति का जिम्मा सौंपा गया था।'

आईएसआई की साजिश?

एनआईए के मुताबिक़, अमेरिका में बसे पाकिस्तानी कश्मीरी अलगाववादी सैयद ग़ुलाम नबी फ़ई के साथ उनके संबंध थे। फ़ई को अमेरिकी फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टीगेशन ने 2011 में पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ़्तार किया था, बाद में उन्हें दो साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई थी।

एनआईए ने इस मामले में जुलाई में नवलखा से पूछताछ की थी। एजेन्सी का कहना है कि नवलखा ने कई बार अमेरिका जाकर फ़ई की संस्था कश्मीरी अमेरिकन कौंसिल की ओर से कश्मीर पर आयोजित सेमिनार में भाग लिया था।

एनआईए ने चार्जशीट में कहा है कि इन सभी अभियुक्तों ने प्रतिबंधित संगठन सीपीआई माओवादी की विचारधारा को आगे बढ़ाया, हिंसा को बढ़ावा दिया और सरकार के ख़िलाफ़ लोगों के मन में नफ़रत और असंतोष को फैलाया।

मामला भीमा कोरेगाँव का

2018 में भीम कोरेगाँव युद्ध की 200वीं वर्षगाँठ थी, इस कारण बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। इस सम्बन्ध में शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान के अध्यक्ष संभाजी भिडे और समस्त हिंदू अघाड़ी के मिलिंद एकबोटे पर आरोप लगे कि उन्होंने मराठा समाज को भड़काया, जिसकी वजह से यह हिंसा हुई। लेकिन इस बीच हिंसा भड़काने के आरोप में पहले तो बड़ी संख्या में दलितों को गिरफ़्तार किया गया और बाद में 28 अगस्त, 2018 को सामाजिक कार्यकर्ताओं को।
हर साल जब 1 जनवरी को दलित समुदाय के लोग भीमा कोरेगाँव में जमा होते हैं, वे वहाँ बनाए गए 'विजय स्तम्भ' के सामने अपना सम्मान प्रकट करते हैं। वे ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि ऐसा माना जाता है कि 1818 में भीमा कोरेगाँव युद्ध में शामिल ईस्ट इंडिया कंपनी से जुड़ी टुकड़ी में ज़्यादातर महार समुदाय के लोग थे, जिन्हें अछूत माना जाता था। यह ‘विजय स्तम्भ’ ईस्ट इंडिया कंपनी ने उस युद्ध में शामिल होने वाले लोगों की याद में बनाया था जिसमें कंपनी के सैनिक मारे गए थे।
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