संसद परिसर में शुक्रवार को विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के यौन अपराधी एपस्टीन से कथित संबंधों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
संसद परिसर में मंत्री हरदीप पुरी के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन
संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने शुक्रवार को केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी जेफरी एपस्टीन फाइलों में पुरी के कथित संबंधों के आरोपों के बाद हुआ है। सरकार पर हरदीप पुरी के इस्तीफे का दबाव बढ़ता जा रहा है।
प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसद संसद भवन के मकर द्वार के बाहर प्लेकार्ड लिए हुए थे, जिन पर "किसकी पकड़, किसका घेरा" जैसे नारे लिखे थे। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 11 फरवरी को दावा किया था कि उन्होंने एपस्टीन फाइलों की जानकारी सत्यापित की है, जिसमें हरदीप सिंह पुरी और अनिल अंबानी के नाम शामिल हैं। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि हरदीप पुरी और अनिल अंबानी का नाम फाइलों में आने के बावजूद उन्हें जेल क्यों नहीं भेजा गया। उन्होंने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव का भी जिक्र किया।
प्रियंका गांधी के आरोप
कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग की है। प्रियंका ने कहा, “मेरी राय में, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि एपस्टीन के खिलाफ यौन शोषण के आरोप सार्वजनिक होने के बाद भी पुरी ने उनसे ईमेल के जरिए संवाद किया था। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा 30 जनवरी को जारी दस्तावेजों की नई खेप में 2014-15 के दौरान पुरी और एपस्टीन के बीच ईमेल आदान-प्रदान का खुलासा हुआ है।
हालांकि हरदीप सिंह पुरी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि "बकवास" बताया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे 2009 से 2017 तक न्यूयॉर्क में थे, पहले संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत के रूप में और फिर इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट से जुड़े हुए। इस दौरान एपस्टीन से संभवतः तीन-चार मुलाकातें हुईं, जो पूरी तरह आधिकारिक और पेशेवर थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन मुलाकातों का एपस्टीन के यौन शोषण के गंभीर आरोपों से कोई लेना-देना नहीं है। पुरी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे नेता हैं जो देश को बदलने के लिए समर्पित रहते हैं, और कुछ ऐसे भी हैं जिनके आरोपों में केवल "मनोरंजन" होता है। हालांकि हरदीप पुरी की ये मुलाकातें जेफरी एपस्टीन को अदालत से सजा मिलने के बाद हुई थीं। यानी हरदीप पुरी एक सजायाफ्ता मुलजिम से मिले थे।
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी फाइलों में तीन मिलियन ईमेल सार्वजनिक किए गए हैं, जिनमें पुरी और एपस्टीन के बीच कुछ संवादों का जिक्र है। विपक्ष का आरोप है कि ये संबंध गंभीर हैं और मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं और सरकार से स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं।
इन्हीं हंगामों के बीच लोकसभा की कार्यवाही 9 मार्च तक स्थगित कर दी गई थी। यह मामला राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है, जहां सत्ताधारी दल आरोपों को निराधार बताकर खारिज कर रहा है, जबकि विपक्ष इसे गंभीर नैतिक मुद्दा बता रहा है।
एपस्टीन फाइल्स में आए नामों का क्यों हो रहा है बचाव
नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को लोकसभा में एपस्टीन फाइल्स का जिक्र करते हुए कहा था इसमें केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का नाम आ रहा है, इसमें सरकार के नज़दीकी रहे अनिल अंबानी का नाम आ रहा है, लेकिन सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इन लोगों को अब तक जेल में होना चाहिए था। राहुल के इस बयान पर बीजेपी सांसद और मोदी सरकार के मंत्री भड़क गए। उन्होंने नियमों का हवाला देकर कहा कि राहु बिना स्पीकर की अनुमति मिले यह मामला नहीं उठा सकते। उन्हें अपने आरोपों के जवाब में सबूत पेश करने होंगे। इस पर राहुल ने एक लिफाफा निकालकर सबूत पेश करने की बात कही। लेकिन बीजेपी सांसद शोर मचाते रहे। इसी दौरान केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि बीजेपी राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएगी। लेकिन गुरुवार को बीजेपी राहुल गांधी के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाने से पीछे हट गई। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने एक नोटिस देकर सिर्फ यह कहा कि हम राहुल गांधी की सदस्यता खत्म कराने का नोटिस दे रहे हैं। विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव नहीं आएगा।
हरदीप पुरी ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि वो 3-4 बार एपस्टीन से मिले हैं। लेकिन उससे पहले तो एपस्टीन को सजा सुनाई जा चुकी थी। फिर भी वो एक अपराधी से क्यों मिल रहे थे। हरदीप पुरी ने अपने स्वीकारनामे में कहा कि वो एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मिले हैं। लेकिन प्रतिनिधिमंडल तो एक बार ही गया था। लेकिन एपस्टीन फाइल्स और कांग्रेस के आरोपों के अनुसार हरदीप पुरी तो एपस्टीन पर उसके घर जाकर मिले थे। वो घर जाकर क्यों मिले थे। जबकि उसे सजा सुनाई जा चुकी थी। इसका जवाब हरदीप पुरी ने नहीं दिया है। कहा जा रहा है कि हरदीप पुरी का मंत्रीपद खतरे में है, पीएम मोदी जल्द ही पीछा छुड़ा सकते हैं।
राफेल का ऑफसेट ठेका पाने वाले उद्योगपति अनिल अंबानी का भी नाम
एपस्टीन फाइल्स में अनिल अंबानी से जुड़े खुलासे भी सामने आए हैं। इन दस्तावेजों में एप्सटीन और अनिल अंबानी के बीच की 2017 से 2019 तक की बातचीत सामने आई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें कारोबार, वैश्विक मामलों और महिलाओं को लेकर चर्चा हुई। 9 मार्च 2017 की बातचीत में अनिल ने एपस्टीन से पूछा कि क्या सुझाव है? इस पर एपस्टीन ने लिखा- मुलाकात ‘मजेदार’ बनाने के लिए ‘लंबी स्वीडिश गोरी सुनहरे बालों वाली महिला’ बेहतर होगी। इसके बाद अंबानी ने जवाब दिया, ‘इसे तुरंत अरेंज करो।’ एप्सटीन ने फिर जवाब में लिखा कि किसी और से भी अगर आप चुपचाप मिलना चाहते हैं तो मुझे कभी भी बता सकते हैं ।
2017 में एपस्टीन ने अनिल अंबानी से महिलाओं के बारे में उनकी पसंद पूछी। अंबानी ने बॉलीवुड/हॉलीवुड से जुड़े अपने लिंक का भी जिक्र किया। एपस्टीन ने पूछा “क्या कोई अभिनेत्री या मॉडल आपकी पसंद वाली है? उम्मीद है मेरिल स्ट्रीप नहीं। मैं मदद नहीं कर पाऊँगा।” अंबानी ने जवाब दिया कि “बेहतर स्वाद मेरे दोस्त। हमारी अगली फिल्म स्कारलेट जोहानसन के साथ है। इस पर एपस्टीन ने कहा “मुझे खुशी है कि आप जवान गोरी महिलाओं को पसंद करते हैं।” चैट से ये भी सामने आया है कि एपस्टीन लगातार अपने नेटवर्क के लोगों के नाम का इस्तेमाल करता रहा।
अनिल अंबानी और मोदी सरकार के रिश्ते
अनिल अंबानी और मोदी सरकार के बीच संबंध काफी शानदार रहे हैं। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अनिल अंबानी की रिलायंस ग्रुप (Reliance Anil Dhirubhai Ambani Group) को कई क्षेत्रों में फायदा पहुंचाने के आरोप विपक्षी दलों ने लगाए। सबसे प्रमुख विवाद राफेल डील से जुड़ा था, जहां फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद में अनिल अंबानी की कंपनी को ऑफसेट पार्टनर बनाया गया। विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी HAL को दरकिनार कर अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाया, जबकि उनकी कंपनी का डिफेंस सेक्टर में कोई पूर्व अनुभव नहीं था। पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने भी कहा था कि भारतीय सरकार ने अनिल अंबानी को चुनने का फैसला किया था, न कि दसॉल्ट ने।
2017-2019 के दौरान अनिल अंबानी ने अमेरिकी राजनीतिक हलकों में पहुंच बनाने के लिए जेफरी एपस्टीन जैसे विवादास्पद व्यक्ति से संपर्क बनाए रखा। जारी दस्तावेजों से पता चलता है कि अंबानी ने "दिल्ली की लीडरशिप" (जिसे मोदी सरकार के रूप में देखा जाता है) की ओर से ट्रंप प्रशासन के जेरेड कुश्नर और स्टीव बैनन से मुलाकात की मांग की थी, ताकि मोदी की अमेरिका यात्रा की तैयारी हो सके। यह दर्शाता है कि अंबानी खुद को मोदी सरकार के लिए एक अनौपचारिक बैकचैनल के रूप में पेश कर रहे थे, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें इसका अधिकार था या नहीं। 2019 में मोदी की दोबारा जीत के दिन अंबानी ने एपस्टीन से मुलाकात की, जिसके बाद एपस्टीन ने बैनन को मोदी के "प्रतिनिधि" से बातचीत की जानकारी दी। ये खुलासे अंबानी की मोदी सरकार से निकटता को और मजबूत करते हैं, लेकिन साथ ही सवाल भी उठाते हैं।
हाल के वर्षों में अनिल अंबानी की कंपनियां भारी कर्ज में डूबी हैं, और ED, CBI जैसी एजेंसियों की जांच का सामना कर रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि पहले की निकटता के बावजूद अब संबंधों में तनाव दिख रहा है, जैसे कि ईडी रेड्स और कानूनी कार्रवाई। कुल मिलाकर, अनिल अंबानी का मोदी सरकार से रिश्ता शुरुआत में लाभकारी और राजनीतिक रूप से करीबी रहा, लेकिन राफेल विवाद, एपस्टीन फाइल्स और वित्तीय संकट ने इसे विवादास्पद बना दिया है। खबरें तो यहां तक हैं कि एपस्टीन की सलाह पर ही अनिल अंबानी ने खुद को दिवालिया घोषित किया था, ताकि आसानी से लोन मिल सके।