131वें संविधान संशोधन बिल पर लोकसभा में हारने के बाद पीएम मोदी आज 18 अप्रैल को रात 8.30 बजे देश को संबोधित करने वाले हैं। लेकिन भाजपा के नेता कार्यकर्ता उससे पहले प्रदर्शन करने सड़कों पर निकल पड़े। कुछ राहुल गांधी के घर पहुंचे, जबकि वो तमिलनाडु में हैं।
पीएम मोदी शनिवार को देश को संबोधित करते हुए
पीएम मोदी का देश को संबोधन
मुझे खेद है: आरक्षण विधेयक में मिली हार के बाद प्रधानमंत्री ने महिलाओं को संदेश देते हुए विपक्ष पर उनके सपनों को कुचलने का आरोप लगाया।
शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक की हार के बाद देश की "माताओं और बेटियों" से माफी मांगी और विपक्ष पर "छोटी राजनीति" के कारण महिलाओं के सपनों को कुचलने का आरोप लगाया। राष्ट्र को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने आक्रामक लहजे में कहा कि लोकसभा में विधेयक के असफल होने के बाद विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके, ने खुशी से मेजें पीटीं।
मोदी ने कहा- “विधेयक पारित न करा पाने के लिए मैं देश की सभी महिलाओं से क्षमा मांगता हूं। कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसी पार्टियों की स्वार्थी राजनीति के कारण देश की महिलाओं को कष्ट सहना पड़ा है,” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा। गौरतलब है कि टीएमसी और डीएमके की सत्ता वाले राज्य बंगाल और तमिलनाडु में अगले सप्ताह चुनाव होने हैं।
प्रधानमंत्री ने भावनात्मक लहजे में विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि एक महिला सब कुछ भूल सकती है, लेकिन अपना अपमान नहीं भूल सकती। उन्होंने आगे कहा, “संसद में जो हुआ वह सिर्फ मेज पटकना नहीं था, बल्कि महिलाओं की गरिमा और आत्मसम्मान पर हमला था। संसद में कांग्रेस और उसके सहयोगियों का आचरण देश भर की महिलाओं के मन में रहेगा।”
विपक्ष का मुख्य आरोप यह था कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे का इस्तेमाल परिसीमन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कर रही है, ताकि देश के चुनावी नक्शे को बदलकर भाजपा को फायदा पहुंचाया जा सके। विपक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि इससे लोकसभा में दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज सहित कई भाजपा सांसदों और नेताओं को राहुल गांधी के आवास की ओर मार्च निकालने के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। संवैधानिक संशोधन विधेयक और दो अन्य बिलों को पास न कर पाने के विरोध में भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के आवास की ओर बढ़ने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की, राहुल गांधी का पुतला फूंका और यातायात बाधित कर दिया।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें का इस्तेमाल किया। बांसुरी स्वराज, केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा खड़से, भाजपा सांसद कमलजीत सेजवाल सहित कई नेता हिरासत में लिए गए। इस प्रदर्शन में भाजपा की अन्य प्रमुख नेता जैसे हेमा मालिनी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे लहराए और माथे पर काली पट्टी बांधी हुई थी।
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर महिलाओं के खिलाफ रुख अपनाने और उन्हें धोखा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन 'इंडी' ने महिलाओं को केवल वोट देने तक सीमित रखना चाहा, लेकिन सत्ता साझा करने के समय पीछे हट गया।
कांग्रेस का इस बिल पर स्टैंड
बीजेपी जिस बिल का जोरशोर से प्रचार कर रही है। उसकी असलियत कुछ और है। कांग्रेस ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि वह महिलाओं के आरक्षण का विरोध नहीं कर रही, बल्कि इससे जुड़ी परिसीमन प्रक्रिया का विरोध कर रही है, जिससे दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व कमजोर हो सकता है। कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने कहा, हम शुरू से ही जानते थे कि वे इवेंट मास्टर हैं, इवेंट करते हैं और कुछ नहीं करते।
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा, "हमारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन पानी की बौछारों से भिगो दिया गया, लेकिन देश की महिलाओं के लिए खड़े होने से कोई पानी की बौछार हमें नहीं रोक सकती।" दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "पिछले तीस वर्षों से इस देश की आधी आबादी यानी महिलाओं का अपमान लगातार होता रहा है।" उन्होंने विपक्ष से पूछा कि अगर वे मुस्लिम महिलाओं के हितैषी हैं तो मोदी सरकार द्वारा लाए गए ट्रिपल तलाक कानून का विरोध क्यों किया।
अभिनेत्री और भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने कहा, "उन्होंने बिल पास नहीं होने दिया, इसलिए हम यहां विरोध कर रहे हैं। पूरे देश की महिलाएं इस अभियान में साथ हैं। कल हमारे सभी प्रयासों के बावजूद उन्होंने बिल पास नहीं होने दिया। हम वाकई बहुत निराश हैं।"
गौरतलब है कि 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ लोकसभा की सदस्य संख्या को 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रावधान था। इस विधेयक को लोकसभा में विशेष बहुमत की जरूरत थी, लेकिन यह 298 के पक्ष में और 230 के विपक्ष में वोट पड़ने के बाद पास नहीं हो सका।