प्रियंका गांधी ने अमित शाह की 'राजनीतिक कुटिलता' पर हमला किया। वो भी मुस्कुराते हुए। प्रियंका गांधी ने शाह से आख़िर क्यों कहा कि चाणक्य भी आपकी कुटिलता पर चौंक जाते!
प्रियंका गांधी ने अमित शाह की 'कुटिलता' पर बड़ा हमला बोला। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर बहस के दौरान प्रियंका ने तंज कसते हुए अमित शाह से कहा कि 'अगर आज चाणक्य जिंदा होते, तो आपकी राजनीतिक कुटिलता पर वे भी चौंक जाते।' प्रियंका ने लोकसभा में कहा कि कांग्रेस महिला सांसदों के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन इस बिल की असली समस्या यह है कि यह पूरी तरह से राजनीति से भरा हुआ है।
प्रियंका के बयान पर जब शाह हँसे...
जब प्रियंका गांधी बहस के दौरान भाषण दे रही थीं उसी दौरान अमित शाह अलग ही अंदाज में मुस्कुराए। इस पर अपने भाषण के दौरान ही प्रियंका गांधी ने मुस्कुराते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, 'हँस रहे हैं। गृहमंत्री जी हँस रहे हैं। पूरी योजना बना रखी है... अगर आज चाणक्य जिंदा होते, तो वे भी चौंक जाते... आपकी राजनीतिक कुटिलता पर।'यह सुनते ही अमित शाह, किरेन रिजिजू और कई अन्य भाजपा सांसद जोर-जोर से हँस पड़े। अमित शाह भी इस तंज पर हँसे और इसे हल्के फुल्के अंदाज़ में ही लिया।
प्रधानमंत्री मोदी पर हमला
प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा खुद को महिला अधिकारों का सबसे बड़ा समर्थक बता रही है। उन्होंने कहा, 'महिलाएं झूठ बोलने वालों को बहुत अच्छी तरह पहचान लेती हैं। इसलिए भाजपा को सावधानी से चलना चाहिए।' प्रियंका ने कहा कि कांग्रेस हमेशा महिला आरक्षण का समर्थन करती रही है। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में जब मोदी सरकार ने इस कानून को पास किया तो कांग्रेस ने भी पूरे समर्थन के साथ वोट दिया।अभी क्यों नहीं दे सकते 33% आरक्षण?
प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि अगर वाकई महिलाओं को आरक्षण देना है तो वर्तमान 543 सीटों वाली लोकसभा में ही 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता? उन्होंने कहा, 'अगर यह संविधान संशोधन बिल पास हो गया तो इस देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा।'
महिला आरक्षण का राजनीतिक इस्तेमाल- प्रियंका
प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर सरकार महिलाओं का सचमुच सम्मान करती तो आरक्षण के मुद्दे को राजनीति के लिए इस्तेमाल नहीं करती। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पद की गरिमा और उसकी जिम्मेदारी के साथ यह तरीका मेल नहीं खाता। प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि महिलाओं का आरक्षण कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका हक है। यह हक चाहे जितनी देर से हो, लेकिन आखिरकार मिलकर रहेगा। उन्होंने कहा कि महिलाएं इस हक का इस्तेमाल देश की एकता के लिए जिम्मेदारी से करेंगी। कांग्रेस इन तीनों बिलों का मौजूदा रूप में विरोध करती है।
'SC, ST, OBC महिला का अलग कोटा हो'
प्रियंका गांधी ने 33 प्रतिशत आरक्षण के अंदर SC, ST और OBC महिलाओं के लिए अलग से सब-कोटा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर सरकार में सच्ची इच्छाशक्ति हो तो ये प्रावधान तुरंत लागू किए जा सकते हैं, इसके लिए किसी और प्रक्रिया का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। प्रियंका गांधी ने कहा कि अनावश्यक सीमा निर्धारण से जुड़ी प्रक्रियाएं देश को नुकसान पहुंचा सकती हैं और महिलाओं को फायदा पहुंचने में देरी हो सकती है। एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग का ज़िक्र करते हुए प्रियंका ने कहा कि बिल को ज्यादा समावेशी बनाकर पास किया जा सकता है, ताकि सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व मिले और बिना ज्यादा देरी के कानूनी प्रक्रिया पूरी हो सके।
इतिहास का ज़िक्र
प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का जवाब देते हुए ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बताई। उन्होंने मोतीलाल नेहरू का जिक्र करते हुए कहा, '1928 में मोतीलाल नेहरू ने 19 मौलिक अधिकारों की रिपोर्ट तैयार की थी। 1931 में कराची कांग्रेस अधिवेशन में सरदार पटेल की अध्यक्षता में महिलाओं के बराबर अधिकारों का प्रस्ताव पास हुआ। पंचायत और नगरपालिका में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण की शुरुआत उनके पिता राजीव गांधी की सरकार ने की थी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीति में बराबरी का अधिकार देने का विचार कांग्रेस ने ही शुरू किया था।बिल में क्या प्रस्ताव है?
केंद्र सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) बिल के तहत लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है। इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। इसके बाद नए परिसीमन के बाद ही महिला आरक्षण लागू होगा। दक्षिण भारतीय राज्य इस बिल का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि नया परिसीमन भाजपा का गढ़ उत्तरी हिंदी पट्टी को ज्यादा फायदा पहुंचाएगा और दक्षिण के राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी कम हो जाएगी।
सदन में इस बिल पर बहस अभी जारी है और यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्म होने वाला है।