इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के अपने आदेश को रोक दिया है। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की सिंगल बेंच ने शुक्रवार को अदालत में डिक्टेट किया गया आदेश रोका है। इस आदेश में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। लाइव लॉ के मुताबिक अदालत ने अब कहा है कि संभावित आरोपी को सुनवाई का अवसर दिए बिना कोई आदेश नहीं पारित किया जा सकता। मामले की सुनवाई 20 अप्रैल को होगी। 
लाइव लॉ के मुताबिक इस मामले में कर्नाटक बीजेपी कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं और इस संबंध में उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम और विदेशी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाए। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी यूके स्थित एक कंपनी के डायरेक्टर हैं और कंपनी के रिकॉर्ड में उन्होंने अपनी राष्ट्रीयता ब्रिटिश बताई है।
इससे पहले जनवरी 2026 में लखनऊ के एसीजेएम अदालत ने याचिकाकर्ता की इसी तरह की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया।
ताज़ा ख़बरें
17 अप्रैल को जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने खुली अदालत में आदेश का ऑपरेटिव भाग (operative part) सुनाया, जिसमें पुलिस को राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश था। अदालत ने राज्य को जांच केंद्रीय सरकार या सीबीआई को सौंपने की भी आज़ादी दी थी। हालांकि, बाद में अदालत ने इस डिक्टेट किए गए आदेश को रोक दिया और इसे टाइप व हस्ताक्षर करने से पहले स्थगित कर दिया।
अदालत ने टिप्पणी की कि "संभावित आरोपी को सुनवाई का अवसर दिए बिना याचिका पर कोई आदेश नहीं पारित किया जा सकता।" अदालत ने आगे कहा कि "राहुल गांधी को नोटिस जारी किए बिना आवेदन का फैसला नहीं किया जाना चाहिए।" कोर्ट ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 20 अप्रैल 2026 को सूचीबद्ध कर दिया है, ताकि राहुल गांधी को अपना पक्ष रखने का मौका मिल सके।
अभी तक राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी, जब अदालत अंतिम फैसला सुना सकती है। यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है, क्योंकि राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर पहले भी विभिन्न विवाद सामने आ चुके हैं।

राहुल गांधी की नागरिकता का विवाद क्या है

राहुल गांधी की नागरिकता पर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने पहले आरोप लगाया था कि राहुल गांधी के पास भारत के साथ साथ ब्रिटेन की भी दोहरी नागरिकता है। ऐसा ही आरोप बीजेपी के दूसरे कार्यकर्ता भी लगाते रहे हैं। वे आरोप लगाते रहे हैं कि 2003 में राहुल गांधी ने ब्रिटेन में एक कंपनी में डायरेक्टर के रूप में काम किया था। दावा किया जाता है कि कंपनी के रजिस्ट्रेशन या वार्षिक रिटर्न में उन्होंने खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था।
कुछ याचिकाओं में दावा किया गया कि ब्रिटेन सरकार से दस्तावेज़ मांगे गए थे और ब्रिटेन ने भारत सरकार को कुछ रिकॉर्ड साझा किए हैं। हालांकि इसकी कभी पुष्टि नहीं हुई। अब तक इस मामले में अदालतों ने बार बार याचिकाएँ खारिज की हैं। 28 जनवरी 2026 में लखनऊ एमपी-एमएलए कोर्ट ने याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने भी पहले ऐसी पीआईएल को पिछले साल यानी 2025 में खारिज किया था।
देश से और खबरें
भारतीय कानून के अनुसार कोई व्यक्ति दोहरी नागरिकता नहीं रख सकता। अगर कोई लोकसभा सदस्य विदेशी नागरिक साबित होता है तो उसकी सदस्यता रद्द हो सकती है। लेकिन अंतिम फैसला जांच और कोर्ट के बाद ही होगा। यह मामला काफी संवेदनशील है, इसलिए हाईकोर्ट ने कुछ सुनवाइयां चैंबर में की थीं।