महिला आरक्षण बिल पर नेता विपक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी को "जादूगर" कहा। लोकसभा में राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया। माफी की मांग की गई। मोदी ने कल गुरुवार को इसी सदन में काला कपड़ा पहनकर विरोध जताने वालों का मजाक उड़ाया था।
लोकसभा में शुक्रवार 17 अप्रैल को उस समय जोरदार हंगामा हो गया जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए “जादूगर” कह दिया। उनके इस बयान पर सत्तारूढ़ बीजेपी के सांसदों ने तीखी आपत्ति जताई और सदन में विरोध हुआ। महिला आरक्षण विधेयक पर बोलते हुए राहुल गांधी ने मोदी सरकार की रणनीति का पर्दाफाश किया। राहुल ने प्रधानमंत्री पर तीखा तंज़ करते हुए कहा, “सच्चाई यह है कि जादूगर पकड़ा गया है। बालाकोट का जादूगर, नोटबंदी का जादूगर, सिंदूर का जादूगर अब अचानक पकड़ा गया है।” इस टिप्पणी के बाद बीजेपी सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उठकर खड़े हो गए, उन्होंने राहुल गांधी से माफी की मांग की।
महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने बीजेपी पर देश के चुनावी नक्शे को बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि “आप (बीजेपी) देश की राजनीति में अपनी घटती ताकत से डर गए हैं और इसलिए चुनावी नक्शे को फिर से गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। आपने असम और जम्मू-कश्मीर में ऐसा किया और अब पूरे देश में ऐसा करने की कोशिश हो रही है। इसके लिए आपको संवैधानिक संशोधन की जरूरत पड़ेगी।”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे को डिलिमिटेशन से जोड़कर एक विवादित एजेंडा आगे बढ़ा रही है।उन्होंने कहा, “यह महिला सशक्तिकरण का बिल नहीं है… इसका महिलाओं से कोई लेना-देना नहीं है। 2023 में महिला आरक्षण बिल आमराय से पास हुआ था। अभी जो हो रहा है, वह भारत के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश है।” गांधी ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर पुराना महिला आरक्षण बिल वापस लाया जाए तो विपक्ष उसका समर्थन करेगा।
डिलिमिटेशन ‘राष्ट्र-विरोधी’- राहुल गांधी
परिसीमन के मुद्दे पर राहुल गांधी ने सरकार के कदम को “राष्ट्र-विरोधी” बताते हुए कहा, “हम आपको ऐसा करने नहीं देंगे… विपक्ष इसका विरोध करेगा और इसे हराएगा।” राहुल ने कहा कि “भारतीय समाज ने दलितों, ओबीसी और उनकी महिलाओं के साथ जैसा बर्ताव किया, वह एक ऐतिहासिक तथ्य है। यहाँ जो कोशिश की जा रही है, वह जाति जनगणना को दरकिनार करने की है। वे मेरे ओबीसी भाइयों और बहनों को सत्ता और प्रतिनिधित्व देने से बचने और उनसे सत्ता छीनने की कोशिश कर रहे हैं।” अपनी आलोचना को और बढ़ाते हुए, उन्होंने सरकार पर “संविधान से ऊपर मनुवाद” को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया और जाति जनगणना के पीछे के इरादे पर सवाल उठाया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का जिक्र करते हुए गांधी ने कहा, "वे कहते हैं कि जाति जनगणना शुरू हो गई है, और बार-बार दोहराते हैं कि घरों की कोई जाति नहीं होती। असली सवाल यह है कि क्या जाति जनगणना का इस्तेमाल संसद और राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व के लिए किया जाएगा। आप जो करने की कोशिश कर रहे हैं, उससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि अगले 15 वर्षों तक जाति जनगणना का प्रतिनिधित्व से कोई लेना-देना न रहे।"
परिसीमन के मुद्दे पर गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक असुरक्षा के कारण ऐसा कर रही है। उन्होंने कहा, "आप अपनी ताकत के कम होने से डरे हुए हैं और भारत के राजनीतिक मानचित्र को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। आपने असम और जम्मू-कश्मीर में ऐसा किया, और अब सोचिए कि आप पूरे भारत में ऐसा कर सकते हैं।"
'16 (सिक्सटीन) की पहेली क्या है'
राहुल गांधी ने कहा, "कल मैं प्रधानमंत्री का भाषण देख रहा था। उनकी आवाज़ में ताकत की कमी थी, आवाज़ टूटी-फूटी थी, कुछ भी स्पष्ट नहीं था। और अचानक मैंने देखा कि कल 16 अप्रैल था... वे ठीक से बोल नहीं पा रहे थे क्योंकि स्पष्ट रूप से इस विधेयक को पारित करने का प्रयास एक गलती ही है। क्योंकि जैसा कि मैंने कहा, सभी जानते थे कि इससे घबराहट भरी प्रतिक्रिया होगी। तो मैं उन्हें देख रहा था और मैंने अपने फोन पर 16 अप्रैल देखा। और मैं सोचने लगा, हे भगवान, यह कितना अजीब है। यह संख्या 16 है। यह 16 संख्या, यही वह संख्या है। पहेली का पूरा उत्तर 16 संख्या में है। सब कुछ 16 संख्या में समाया हुआ है...।" बाद में कांग्रेस ने राहुल के भाषण को ट्वीट करते हुए लिखा- हे भगवान! ये तो कमाल है! संख्या: सोलह (सिक्सटीन)। सिक्सटीन सुनकर एपस्टीन की याद आ जाती है, है ना?
मोदी सरकार के परिसीमन बिल का दक्षिण भारत में भारी विरोध
दक्षिण भारत में काले झंडे के साथ परिसीमन बिल का विरोध हो रहा है। विपक्ष पहले से ही सरकार पर सवाल उठा रहा है। 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण से दक्षिणी राज्यों को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि इन राज्यों ने जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सहित कई दक्षिणी नेताओं ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे उत्तरी राज्यों को अधिक सीटें मिलेंगी, जिससे संघीय राजनीति में असंतुलन बढ़ सकता है।
हालांकि केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में आश्वासन देते हुए कहा, “मैं गारंटी देता हूं कि किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा- चाहे वह पूर्व हो, पश्चिम, उत्तर या दक्षिण।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिलिमिटेशन का मुद्दा 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया सत्तारूढ़ दल को चुनावी फायदा पहुंचाने के लिए इस्तेमाल की जा रही है, जबकि सरकार इसे जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व को संतुलित करने की कोशिश बता रही है। संसद का विशेष सत्र अभी कल भी चलेगा, इस पर और तीखी बहस होने की संभावना है।