भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगने के प्रस्ताव की खास बातें

  • क्या है अतिरिक्त टैरिफ प्रस्ताव: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत समेत 54 देशों पर 12.5% अतिरिक्त ड्यूटी (या कुछ मामलों में 10%) लगाने का प्रस्ताव किया है, क्योंकि ये देश forced labour (जबरन मजदूरी) से बने सामान के आयात पर प्रभावी प्रतिबंध नहीं लगाते।
  • भारत की स्थिति: भारत उन 54 देशों में शामिल है जिन्होंने forced labour वाले उत्पादों के आयात पर स्पष्ट कानूनी प्रतिबंध नहीं लगाया है। USTR के अनुसार भारत की नीतियाँ US commerce को प्रभावित करती हैं।
  • ट्रेड डील के बीच इसका महत्व: यह प्रस्ताव भारत-US के interim trade agreement की बातचीत के दौरान आया है (1-4 जून 2026 तक दिल्ली में US delegation मौजूद)। इससे textiles, apparel और supply chains में compliance की नई चुनौती बढ़ गई है।
  • Section 301 के तहत कार्रवाई: यह कदम US Trade Act 1974 की Section 301 के अंतर्गत उठाया गया है, जो unfair trade practices के खिलाफ टैरिफ या अन्य उपायों की अनुमति देता है।
  • भारत पर प्रभाव: USTR रिपोर्ट में भारत के aluminium, cotton, electronics, rice, batteries आदि क्षेत्रों में forced labour-linked inputs के exposure का जिक्र है। इससे Indian exporters को US में अतिरिक्त टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है, खासकर Trump-era tariffs के संदर्भ में।
भारत और अमेरिका के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की बातचीत के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) दफ्तर ने भारत को उन देशों की सूची में शामिल किया है, जहां कथित तौर पर 'अनुचित व्यापार प्रथाएं' (unfair trade practices) अपनाई जा रही हैं। इन निष्कर्षों के आधार पर, USTR ने प्रभावित देशों से होने वाले आयात पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ (सीमा शुल्क) लगाने का प्रस्ताव दिया है। भारत उन 54 देशों में शामिल है।

क्या है USTR Section 301 का पूरा मामला?

USTR ने 'सेक्शन 301' के तहत की गई 60 जांचों के नतीजे जारी किए हैं। इसमें भारत सहित 54 अर्थव्यवस्थाओं (economies) की पहचान की गई है। अमेरिकी मूल्यांकन के अनुसार, इन देशों में उन सामानों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं हैं, जो कथित तौर पर 'बंधुआ मजदूरी' (forced labour) या जबरन श्रम के जरिए तैयार किए जाते हैं।

USTR Tariffs क्या है गणित?

USTR द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार जो देश बंधुआ मजदूरी से जुड़े सामानों के आयात पर पहले से प्रतिबंध लागू करते हैं, या जिन्होंने आपसी व्यापार व्यवस्था के तहत ऐसे उपायों को लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है, उन्हें कुछ रियायत मिल सकती है। जो देश इन मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं, उनके लिए 12.5% का अतिरिक्त शुल्क प्रस्तावित किया गया है। 
कपड़ा और परिधान (Textiles and Apparel): USTR ने इस क्षेत्र के लिए एक अलग तंत्र का सुझाव दिया है, जिसके तहत चुनिंदा अर्थव्यवस्थाओं से एक निश्चित मात्रा में आयात को कम धारा 301 टैरिफ दर पर अमेरिकी बाजार में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
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अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (Ambassador) जेमीसन ग्रीर ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन श्रम से बने सामानों के आयात पर अंकुश न लगाना अस्वीकार्य है। इससे ऐसी स्थिति पैदा होती है जहां अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक स्तर पर एक असमान धरातल (unlevel playing field) से मुकाबला करना पड़ता है।"

54 देशों में भारत के अलावा कौन से प्रमुख देश हैं

रूस, चीन, ऑस्ट्रेलिया; बांग्लादेश; पाकिस्तान, कनाडा, यूरोपियन यूनियन, ब्राजील; जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, स्विट्जरलैंड, यूएई, ब्रिटेन, इसराइल, कतर, सऊदी अरब, सिंगापुर और वियतनाम।

दिल्ली में India US Trade Deal बैठक का क्या है नतीजा?

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका और भारत के वरिष्ठ व्यापार अधिकारी एक प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए नई दिल्ली में तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक कर रहे हैं। हाल ही में भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी बयान दिया था कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता अब अंतिम चरण ("कॉमा और फुल स्टॉप") में है।

क्या भारत-यूएस ट्रेड डील हो पाएगी

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, भारत और अमेरिका ने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के कानूनी ढांचे के अधिकांश हिस्सों पर काम पूरा कर लिया है (लगभग 99% चीजें फाइनल हो चुकी हैं)। हालांकि, पिछले 15 महीनों से चल रही इस डील के तब तक पूरी तरह संपन्न होने की उम्मीद कम है, जब तक कि इस बात पर स्पष्टता नहीं आ जाती कि अगले महीने अस्थायी 10% शुल्क समाप्त होने के बाद ट्रंप प्रशासन किस तरह का टैरिफ ढांचा अपनाएगा। अतिरिक्त टैरिफ प्रस्ताव के बाद क्या भारत ट्रेड डील पर आगे बढ़ेगा। यह बड़ा सवाल अब आर्थिक विश्लेषक पूछ रहे हैं।
भारत के लिए मुख्य प्राथमिकता यह तय करना है कि उसके निर्यात को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अमेरिकी बाजार में बेहतर और तरजीह वाली स्थिति मिले। भारत ने अमेरिकी जांच पर चिंता भी जताई है। भारत पर वर्तमान में दो अलग-अलग जांचें चल रही हैं- एक सोलर मॉड्यूल, प्रोसेस्ड फूड, स्टील और एल्युमीनियम जैसे क्षेत्रों में संरचनात्मक ओवरकैपेसिटी (अतिरिक्त उत्पादन क्षमता) को लेकर है, और दूसरी बंधुआ मजदूरी से जुड़े सामानों को रोकने में नाकामी के आरोपों को लेकर है। फिलहाल, नई दिल्ली में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच तकनीकी पहलुओं को सुलझाने के लिए बातचीत का दौर जारी है।