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बूँद-बूँद बचाइए जल, वरना मुश्किल होगा आने वाला कल 

भारत को आने वाले कुछ सालों में भयंकर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। हालात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि केंद्र सरकार की ओर से बनाई गई लिस्ट में देश के लगभग 17% शहर और कस्बे ऐसे हैं, जो गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। जल संकट से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाला राज्य तमिलनाडु है और उसके बाद राजस्थान और उत्तर प्रदेश के इलाक़े शामिल हैं। सरकार ने कहा है कि देश भर के 4,378 इलाकों में से 756 इलाक़े ऐसे हैं, जहाँ पानी की उपलब्धता को लेकर स्थिति ठीक नहीं है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के आसपास के इलाक़े जैसे ग़ाज़ियाबाद, नोएडा और फ़रीदाबाद में भी इसी तरह के हालात हैं। 
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इस लिस्ट के मुताबिक़, पंजाब और हरियाणा में कई शहरी इलाक़े ऐसे हैं, जहाँ लोगों के लिए पानी की उपलब्धता बेहद कम है। राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि ऐसा ज़मीन से अंधाधुंध मात्रा में पानी निकालने के कारण हुआ है। पंजाब में 82 ऐसे नगर निकाय हैं, जबकि हरियाणा में ऐसे नगर निकायों की संख्या 52 है, जहाँ पर पानी की किल्लत है। केंद्रीय आवास और शहरी विकास मंत्रालय ने जल शक्ति मंत्रालय को देश के 255 जिलों के ऐसे 1,597 ब्लॉकों की सूची सौंपी है, जहाँ पानी को लेकर लोगों को दिक़्क़तों का सामना करना पड़ रहा है।
नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कि 2020 तक देश के 21 प्रमुख शहरों में ज़मीन के नीचे का पानी ख़त्म हो जाएगा। पानी की कमी के चलते करोड़ों लोग प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि पूरे देश के कई हिस्सों में ऐसी स्थिति है।
आयोग की रिपोर्ट में बताया गया है कि देश भर में क़रीब 60 करोड़ लोग पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। क़रीब दो लाख लोग साफ़ पानी न मिलने के कारण हर साल जान गँवा देते हैं। इससे समझा जा सकता है कि हालात कितने ख़राब हैं। 

भारत की आबादी तेज़ी से बढ़ रही है, ऐसे में सवाल यह है कि इतनी बड़ी आबादी के लिए पानी कहाँ से आएगा। ज़मीन से लगातार पानी निकाला जा रहा है और कई शहरों में पानी का स्तर काफ़ी नीचे चला गया है। 

महानगरों में लगातार बढ़ रही आबादी के कारण कई शहरों में स्थिति बेहद ख़राब होने वाली है क्योंकि भारत एक दशक से भी कम समय में दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा।
नीति आयोग ने जिन शहरों में पानी का जल स्तर ख़त्म होने की ओर इशारा किया है, उनमें - नई दिल्ली, गुरुग्राम, अमृतसर, जालंधर, पटियाला, मोहाली, लुधियाना, यमुना नगर, गाज़ियाबाद, आगरा, जयपुर, रतलाम, इंदौर, गाँधीनगर, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर, हैदराबाद, वेल्लोर, बेंगलुरु और चेन्नई शामिल हैं। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह संकट आगे और गंभीर होने जा रहा है।
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केंद्र सरकार भी पानी को बचाने के लिए लोगों से लगातार अपील कर रही है। लोकसभा चुनाव के बाद पहली बार लोगों से अपनी ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संकट से निपटने के लिए लोगों से कहा था कि देशवासी स्वच्छता की तरह ही जल संरक्षण को भी जनआंदोलन बनाएँ। 
मोदी ने कहा था कि पानी की कमी से देश के कई हिस्से सालभर प्रभावित रहते हैं और बारिश से जो पानी हमें मिलता है, अभी उसका सिर्फ़ 8 प्रतिशत ही हम बचा पाते हैं। लेकिन हम पानी की एक-एक बूँद बचाने के लिए आगे आएँ।
आयोग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश की जल आपूर्ति का 40 फ़ीसदी पानी हमें ज़मीन के नीचे से मिलता है लेकिन दुखद यह है कि ज़मीन के नीचे का पानी लगातार घटता जा रहा है। ऐसे में 132 करोड़ की जनसंख्या वाले देश भारत में सभी को कैसे पानी उपलब्ध होगा, इस बात पर हमें गंभीरता से सोचना होगा।
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हमें बारिश के पानी को तो बचाना ही होगा, साथ ही रोजमर्रा के जीवन में भी इस बात का ख्याल रखना होगा कि पानी का सही इस्तेमाल कैसे किया जाए। पानी के बँटवारे को लेकर कई राज्यों के बीच विवाद की स्थिति है और बात दुनिया की करें तो यह कहा जाता है कि 2025 में पानी के लिए विश्व युद्ध के हालात बन जाएँगे। अगर हम चाहते हैं कि हमारी आने वाली पीढ़ी को भी हमारी ही तरह स्वच्छ और ज़रूरत लायक पानी मिले तो हमें जल संरक्षण को लेकर गंभीर होना होगा।
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