क्या पश्चिम एशिया संकट पर कोविड जैसी तैयारी की ज़रूरत है? प्रधानमंत्री मोदी ने उसी तरह के सहयोग की अपील की है। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट पर मुख्यमंत्रीयों के साथ बैठक की और ईंधन से खाद तक की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने जोर दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर 'टीम इंडिया' की भावना से काम करें, ताकि किसी भी तरह की परेशानी का सामना किया जा सके। उन्होंने कोविड-19 महामारी के समय की याद दिलाई जब केंद्र और राज्य सरकारों ने साथ मिलकर सप्लाई चेन, व्यापार और आम लोगों की जिंदगी को प्रभावित होने से बचाया था।
प्रधानमंत्री मोदी की शुक्रवार को राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक तब हुई है जब देश में एलपीजी गैस और डीजल-पेट्रोल की सप्लाई को लेकर तरह तरह के संदेह पैदा हो रहे हैं। कई जगहों से इनके संकट की ख़बरें हैं। हालाँकि, सरकार का कहना है कि भारत के पास इनके पर्याप्त स्टॉक है। लेकिन फिर भी मध्य पूर्व में तनाव को देखते हुए इसकी पहले से तैयारी की जा रही है और इसको लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रशासित प्रदेशों के लेफ्टिनेंटों के साथ पीएम ने तैयारी बैठक की। हालाँकि, बैठक में पांच चुनाव वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों को शामिल नहीं किया गया। बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। इस बैठक में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के असर को देखते हुए भारत की तैयारियों की समीक्षा की गई।
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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए इसे निरंतर नजर में रखना ज़रूरी है। उन्होंने बताया कि 3 मार्च से एक अंतर-मंत्रालयीय समूह रोजाना हालात की समीक्षा कर रहा है।

सरकार की बड़ी प्राथमिकताएं

  • आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना
  • ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना
  • नागरिकों के हितों की रक्षा करना
  • उद्योग और सप्लाई चेन को मजबूत करना
प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों से अपील की कि वे राज्यों में सप्लाई चेन सुचारू रूप से चलाए रखें। उन्होंने सख्त चेतावनी दी कि होर्डिंग यानी जमाखोरी और मुनाफाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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राज्यों की भूमिका पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि फैसलों को लागू करने का असली काम राज्यों में होता है। इसलिए केंद्र और राज्यों के बीच लगातार संवाद और समन्वय जरूरी है। उन्होंने राज्यों से कहा वे-
  • राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम सक्रिय करें
  • प्रशासनिक स्तर पर सतर्कता बढ़ाएं ताकि कोई व्यवधान न हो
  • अफवाहों और गलत सूचनाओं से बचें, सही जानकारी समय पर लोगों तक पहुंचाएं
  • ऑनलाइन फ्रॉड और फर्जी एजेंटों से सावधान रहें

खेती और खाद पर खास ध्यान

खरीफ सीजन आने वाला है, इसलिए प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में पहले से प्लानिंग करने पर जोर दिया। खासतौर पर खाद के स्टोरेज और वितरण की निगरानी मजबूत करने को कहा, ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, प्राकृतिक गैस और खाद जैसे जरूरी सामानों की उपलब्धता बनाए रखना इस समय बेहद अहम है, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
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टीम इंडिया का संदेश

प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान कहा कि हम सब मिलकर इस स्थिति को पार करेंगे। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर संचार, जानकारी का तुरंत आदान-प्रदान और संयुक्त फैसले लेने पर जोर दिया, ताकि प्रतिक्रिया तेज और एकसाथ हो। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद भारत सरकार सतर्क हो गई है। भारत अपना बड़ा हिस्सा कच्चा तेल, गैस और खाद पश्चिम एशिया से आयात करता है। सरकार पहले से ही रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व का इस्तेमाल कर रही है और आयात स्रोतों को विविधता दे रही है।
यह बैठक केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को और मजबूत करने का एक अहम कदम मानी जा रही है। प्रधानमंत्री ने सभी से धैर्य रखने और घबराने की बजाय तैयार रहने की अपील की। 

सरकार का मानना है कि अगर केंद्र और राज्य मिलकर काम करेंगे तो ईंधन, खाद और अन्य जरूरी चीजों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। आम लोगों से भी अपील की गई है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत से ज्यादा सामान जमा न करें।

भारत पर कैसा है असर?

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा क्षेत्र और बाज़ारों पर पड़ने लगा है, जिसके चलते सरकार को इसके बुरे प्रभावों को रोकने के लिए दखल देना पड़ा है। केंद्र सरकार ने कच्चे तेल की बढ़ती क़ीमतों से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इस कदम से दो हफ़्तों में सरकार को लगभग 7000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
ये कदम ऐसे समय में उठाए गए हैं जब इस महीने की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई थीं, हालाँकि बाद में वे घटकर लगभग 100 डॉलर पर आ गईं। इससे उन तेल कंपनियों पर और दबाव बढ़ गया है जो पहले से ही खुदरा कीमतों में कोई बदलाव न होने के कारण नुकसान झेल रही हैं।
वैश्विक स्तर पर पैदा हुई इन बाधाओं के बावजूद, सरकार ने कहा है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। भारत के पास लगभग 60 दिनों के लिए कच्चे तेल और ईंधन का भंडार मौजूद है, और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जुड़ी आपूर्ति में आने वाली बाधाओं की भरपाई के लिए वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित कर ली गई है।