संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव में तीखी बहस हुई। अखिलेश ने कहा कि परिसीमन से पहले जाति जनगणना और ओबीसी/मुस्लिम महिलाओं के लिए उप-कोटा दिया जाए।
लोकसभा में अमित शाह और अखिलेश यादव
लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर आज 16 अप्रैल को गरमागरम बहस हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच मुस्लिम महिलाओं के लिए 'कोटे में कोटा' (आरक्षण के अंदर आरक्षण) को लेकर तीखी बहस छिड़ गई।संसद के विशेष सत्र के दौरान गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया। इस मौके पर अखिलेश यादव ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिला आरक्षण के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है? पहले जनगणना कराई जाए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के सिद्धांत का समर्थन करती है, लेकिन इसकी आड़ में डिलिमिटेशन विधेयक को लागू करने का विरोध करती है। अखिलेश यादव ने मांग की कि आरक्षण पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुस्लिम महिलाओं तक भी बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछड़े और मुस्लिम महिलाओं को शामिल किए बिना महिला सशक्तिकरण का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा।
सरकार की गुप्त योजना की तरफ इशारा
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि सरकार के पास लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण और विधेयक पारित होने के तुरंत बाद उसे लागू करने के संबंध में पहले से ही एक "गुप्त योजना" है। उनके अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि पहले से ही तैयारियां कर ली गई हैं और विधेयक में महिलाओं के लिए सार्थक सुधारों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है।
बीजेपी वाले नारी को नारा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। - अखिलेश यादव, सपा अध्यक्ष 16 अप्रैल 2026 संसद में
लोकसभा में महिला आरक्षण, परिसीमन बिल पर बहस
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार जनगणना में देरी कर रही है क्योंकि जनगणना होने पर जाति जनगणना की मांग उठेगी और सरकार उसे नहीं चाहती। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि पार्टी तीनों प्रस्तावित विधेयकों का संवैधानिक आधार पर कड़ा विरोध करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन उपायों से संविधान को खत्म करने की कोशिश की जा रही है, खासकर जनगणना से डिलिमिटेशन को अलग करने का प्रयास किया जा रहा है।
धर्मेंद्र यादव ने मांग की कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और मुस्लिम महिलाओं के लिए प्रावधान शामिल किए बिना पार्टी इस विधेयक का समर्थन नहीं करेगी। उन्होंने सरकार से अपील की कि प्रस्तावित विधेयकों को वापस ले लिया जाए और 2023 में पारित कानून को लागू किया जाए।
अमित शाह का सपा अध्यक्ष को जवाब
अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि जनगणना की प्रक्रिया देशभर में पहले ही शुरू हो चुकी है। हाउस लिस्टिंग चल रही है और उसके बाद जाति जनगणना भी कराई जाएगी। अमित शाह ने कहा, "जनगणना की प्रक्रिया देश भर में शुरू हो चुकी है और उसके बाद हम जाति जनगणना भी कराएंगे। अभी हाउस लिस्टिंग चल रही है। घर किसी जाति के नहीं होते। अगर समाजवादी पार्टी की मर्जी चली तो घरों को भी जाति में बांध देगी। मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि जनगणना जाति जनगणना के साथ होगी।"
मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग पर अमित शाह ने साफ कहा कि धर्म के आधार पर किसी भी तरह का आरक्षण असंवैधानिक है। उन्होंने कहा, "धर्म के आधार पर मुस्लिमों के लिए किसी भी तरह का आरक्षण असंवैधानिक है।"
- अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए पूछा कि क्या मुस्लिम आबादी 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा से बाहर है? अमित शाह ने जवाब दिया, "हम समाजवादी पार्टी को मुस्लिम महिलाओं को सभी टिकट देने से नहीं रोक रहे हैं।"
सपा सांसद डिंपल यादव का बयान
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि जाति गणना सहित एक सही जनगणना के बिना महिला आरक्षण विधेयक को महत्वपूर्ण पहला कदम नहीं कहा जा सकता है। डिंपल ने आरोप लगाया कि सरकार अपने पहले के वादे से मुकर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि विधेयक को केंद्र सरकार की सुविधा के अनुसार ढाला गया है। डिंपल ने इस बात पर जोर दिया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों की महिलाओं के लिए मौजूदा आरक्षण बी आर अंबेडकर द्वारा तय ढांचे से जुड़ा है। उसमें सरकार क्यों जबरन श्रेय लेना चाहती है।
यह सब एक साजिश हैः सपा अध्यक्ष
अखिलेश यादव ने बुधवार को भी इस मुद्दे पर बयान दिया था। अखिलेश ने 15 अप्रैल को कहा था कि हम महिला आरक्षण के साथ हैं पर उस भाजपाई चालबाज़ी के ख़िलाफ़ हैं, जो एक साज़िश के तहत की जा रही है। भाजपाई और उनके संगी-साथी देश की सबसे बड़ी आबादी के वर्ग मतलब ‘पिछड़े वर्ग’ की महिलाओं के बारे में चुप्पी साधे बैठे हैं। ये संशोधन के नाम पर जो जल्दबाज़ी दिखा रहे हैं दरअसल उसके पीछे भाजपाइयों की मंशा ये है कि जनगणना न करनी पड़े क्योंकि अगर जनगणना हुई तो जातिवार आँकड़े भी देने पड़ेंगे और जातिवार आरक्षण भी। ये भाजपा का एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है, जिसमें जनगणना आधारित परिसीमन को नकार कर पिछड़ों का अधिकार लूटा जा रहा है। आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर इसे लागू करने की छूट पार्टियों को मिलनी चाहिए। ये लोकतंत्र के ख़िलाफ़ ख़ुफ़िया लोगों की गुप्त योजना है, जो तब तक स्वीकार्य नहीं जब तक प्रक्रिया में सुधार नहीं।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में शोर-शराबे के बीच सदस्यों से अपील की कि वे एक-दूसरे से सीधे बहस न करें और सदन की गरिमा बनाए रखें। यह बहस महिला आरक्षण विधेयक, डेलिमिटेशन और जनगणना से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रही। विपक्षी दलों ने 2023 के कानून को तुरंत लागू करने की मांग की है, जबकि सरकार डेलिमिटेशन के बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया पर जोर दे रही है।