अमीरी-गरीबी खाई को लेकर एक नई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। भारत के पांच सबसे अमीर परिवारों की संपत्ति साल 2019 से 2025 तक सिर्फ 6 साल में 400 प्रतिशत बढ़ गई है। यह जानकारी वेल्थ ट्रैकर इंडिया 2026 नाम की रिपोर्ट में दी गई है। यह रिपोर्ट ‘सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी’ के ‘टैक्स द टॉप, क्लोज द गैप’ अभियान ने जारी की है।
रिपोर्ट के अनुसार देश के 1688 सबसे अमीर लोगों की कुल दौलत 166 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। यह भारत की कुल जीडीपी का लगभग 50 प्रतिशत है। इन अमीरों की व्यक्तिगत संपत्ति 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
देश की सबसे अमीर 1 प्रतिशत आबादी के पास कुल राष्ट्रीय संपत्ति का 40 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं, देश की नीचे की 50 प्रतिशत आबादी के पास सिर्फ 6.4 प्रतिशत संपत्ति है, जो 2024 तक लगभग स्थिर रही।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में आज औपनिवेशिक काल जैसी भयानक असमानता देखने को मिल रही है।

अमीरों पर टैक्स लगाने का सुझाव

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि अगर इन 1688 सबसे अमीर लोगों पर 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत तक वेल्थ टैक्स लगाया जाए और उन पर एक तिहाई इनहेरिटेंस टैक्स भी लगाया जाए तो हर साल 10.6 लाख करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पैसे से सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा पर जीडीपी का 1-1 प्रतिशत अतिरिक्त खर्च कर सकती है। बुजुर्गों को हर महीने 12000 रुपये पेंशन दे सकती है।

अंबानी और अडानी का उदाहरण

मुकेश अंबानी की संपत्ति 2019-2025 के बीच 153 प्रतिशत बढ़ी। रिपोर्ट कहती है कि अगर उनसे 2% वेल्थ टैक्स लिया जाता है तो 3 साल तक सभी 10वीं क्लास के छात्रों को फ्री लैपटॉप दिए जा सकते थे।

गौतम अडानी की संपत्ति इसी दौरान 625 प्रतिशत बढ़ी। 2% टैक्स से पूरे देश में 2 साल तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त दी जा सकती थीं। साथ ही 8 करोड़ प्रदूषण प्रभावित परिवारों को फ्री एयर प्यूरीफायर दिए जा सकते थे।

सरकार पर सवाल

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार कहती है कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए पैसे नहीं हैं, लेकिन यह दावा गलत है। सरकार ने पिछले 11 सालों में 19.6 लाख करोड़ रुपये के कॉर्पोरेट लोन माफ किए हैं। बड़े कारोबारियों का टैक्स घटाया जा रहा है, जबकि आम मेहनतकश लोग ज्यादा टैक्स दे रहे हैं।
स्क्रॉल की रिपोर्ट के अनुसार सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी के कैंपेन के निदेशक अनिरबन भट्टाचार्य ने कहा, 'आज भारत में दो भारत हैं- एक मुट्ठीभर अमीरों का, जिनकी दौलत लाखों करोड़ बढ़ रही है, और दूसरा आम गरीबों का, जो कर्ज में डूबा है और मुश्किल से गुजारा कर रहा है।' टैक्स द टॉप अभियान का हिस्सा राज शेखर ने कहा कि असमानता लोकतंत्र के लिए खतरा बन रही है। इसलिए इन सुपर अमीरों पर संपत्ति कर लगाना ज़रूरी है।
रिपोर्ट के लेखक जेकब जोशी ने कहा कि वेल्थ टैक्स कोई जादू की गोली नहीं है, लेकिन इससे गरीबों के बुनियादी अधिकारों को मजबूती मिल सकती है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब देश में अमीरी और गरीबी के बीच की खाई तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट ने सरकार से अपील की है कि अब समय आ गया है कि अमीरों से ज़्यादा टैक्स लेकर गरीबों और आम जनता के कल्याण पर खर्च किया जाए।