Disha Salian Death Case: दिशा सालियान की मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को सीबीआई जांच का आदेश दिया है। लेकिन कोर्ट ने साथ ही एक खास सावधानी भी बरती है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाए।
दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के करीब छह साल बाद मामले में बड़ा मोड़ आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार, 2 सितंबर 2026 को दिशा सालियान की मौत की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया। अदालत ने CBI को निर्देश दिया है कि वह जांच के लिए एक वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी नियुक्त करे।
यह आदेश दिशा के पिता सतीश सालियान की ओर से दाखिल याचिका पर आया। पिता ने मुंबई पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए अपनी बेटी की मौत को लेकर FIR दर्ज करने और स्वतंत्र जांच की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि दिशा के साथ गैंगरेप के बाद उसकी हत्या की गई। हालांकि, मुंबई पुलिस अब तक यह दावा करती रही है कि दिशा की मौत 14वीं मंजिल से गिरने के कारण हुई थी।
CBI को जांच सौंपने का आदेश
जस्टिस सारंग कोतवाल और जस्टिस रंजीतसिंह भोंसले की डिवीजन बेंच ने CBI जांच का निर्देश दिया। अदालत ने साथ ही एक महत्वपूर्ण सावधानी भी बरती है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाए। जांच अधिकारी को किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त सामग्री मिलने के बाद ही उसे आरोपी के रूप में देखा जाए।अदालत ने CBI के जांच अधिकारी को यह भी निर्देश दिया कि यदि जांच में कोई संज्ञेय अपराध (cognisable offence) सामने आता है तो जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल की जाए। वहीं, अगर जांच में ऐसा कोई अपराध सामने नहीं आता, तो सक्षम अदालत के सामने उचित क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जाए। दिशा के पिता को ऐसी स्थिति में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने की स्वतंत्रता भी दी गई है।
मुंबई पुलिस की जांच पर अदालत ने उठाये थे गंभीर सवाल
CBI जांच का आदेश उस सुनवाई के बाद आया है जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस की अब तक की जांच पर कई गंभीर सवाल उठाए थे। अदालत ने पुलिस की लंबी चली जांच को लेकर बेहद कड़ी टिप्पणी की थी और सवाल उठाया था कि अगर इतने वर्षों तक जांच चली तो उसका कानूनी महत्व क्या रह जाता है। अदालत ने यह भी कहा था कि केवल Accidental Death Report (ADR) की प्रक्रिया के जरिए लंबे समय तक मामले को चलाना पर्याप्त नहीं हो सकता।
पुलिस ने दिशा की मौत के बाद CrPC की धारा 174 के तहत ADR दर्ज किया था। इस प्रावधान के तहत आत्महत्या, दुर्घटना या संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की प्रारंभिक जांच की जाती है। कोर्ट ने सवाल किया था कि यदि परिवार की ओर से हत्या और गैंगरेप जैसे संज्ञेय अपराधों के आरोप लगाए गए थे तो फिर नियमित FIR दर्ज करके आपराधिक जांच क्यों नहीं शुरू की गई।
सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान पर भी सवाल
अदालत ने शुरुआती जांच में CCTV फुटेज को लेकर भी सवाल उठाए। कोर्ट के सामने यह बात आई कि उस स्थान को सीधे तौर पर कवर करने वाला CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं था, जहां से दिशा के गिरने की बात कही गई। इसके अलावा कुछ गवाहों के बयानों में दरवाजे के लॉक होने को लेकर विसंगतियां सामने आईं। अदालत ने गौर किया कि जहां गवाहों ने दरवाजा लॉक होने की बात कही, वहीं पंचनामा में दरवाजे को नुकसान पहुंचने या जबरन खोले जाने के कोई स्पष्ट निशान दर्ज नहीं थे।
मामले की सुनवाई के दौरान दिशा सालियान के पोस्टमार्टम को लेकर भी सवाल उठे। अदालत के सामने कहा गया कि राज्य की गाइडलाइन के अनुसार ऐसे मामलों में पोस्टमार्टम दो डॉक्टरों की मौजूदगी में किया जाना चाहिए, जबकि दिशा का पोस्टमार्टम कथित तौर पर एक डॉक्टर ने किया था। रिपोर्ट के मुताबिक पोस्टमार्टम मौत के तीन दिन बाद किया गया था। इसमें सिर, हाथ, पैर और छाती पर चोटों का उल्लेख था और सिर की चोट को जानलेवा बताया गया था। रिपोर्ट में नाक और मुंह से खून आने का भी उल्लेख था। हालांकि, रिपोर्ट में यौन हमले या रेप के कोई प्रमाण नहीं पाए जाने की बात दर्ज थी।
पिता ने पांच साल तक रिपोर्ट नहीं मिलने का आरोप लगाया
दिशा के पिता के वकील निलेश ओझा ने अदालत में आरोप लगाया कि मुंबई पुलिस ने परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक उपलब्ध नहीं कराई और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के करीब पांच साल बाद रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि दिशा के पिता द्वारा जिन लोगों के नाम लिए गए, उनके खिलाफ FIR क्यों नहीं दर्ज की गई। NDTV के मुताबिक, अदालत ने भी इस बात पर ध्यान दिया था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और ADR की प्रतियां दिशा के परिवार को उसकी मौत के पांच साल बाद तक उपलब्ध नहीं कराई गई थीं।महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस ने क्या कहा?
महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश मुख्य सरकारी वकील शिशिर हिराय ने अदालत में कहा कि पुलिस की जांच में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला, जिसके आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाया जा सके। उनके मुताबिक उपलब्ध परिस्थितियां दिशा के आत्महत्या करने या दुर्घटनावश इमारत से गिरने की ओर संकेत करती थीं।सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि शुरुआती ADR अक्टूबर 2020 में ही बंद कर दी गई थी। बाद में सोशल मीडिया पर जांच को लेकर उठे सवालों के कारण इसे दोबारा खोला गया। लेकिन आगे की जांच में भी हत्या के आरोप में किसी को अभियोजित करने के लिए पर्याप्त मजबूत सबूत नहीं मिले।
आदित्य ठाकरे की ओर से याचिका का विरोध
दिशा के पिता की याचिका में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे समेत कुछ लोगों के नाम भी उठाए गए थे। ठाकरे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप पसबोला ने याचिका का विरोध किया और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्यवाही बताया।हालांकि, अदालत ने सुनवाई के दौरान साफ किया था कि उसका ध्यान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर नहीं, बल्कि जांच की वैधानिक प्रक्रिया पर है। कोर्ट ने कहा था कि एक पिता ने अपनी बेटी को खोया है और उसका यह अधिकार है कि उसकी मौत की जांच कानून के मुताबिक हो तथा परिवार को मामले में उचित निष्कर्ष मिले।
छह साल पुराना मामला फिर खुला
दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद हुई थी। यह घटना सुशांत सिंह राजपूत की मौत से महज कुछ दिन पहले हुई थी। इसी वजह से दोनों मामलों को लेकर लंबे समय से तरह-तरह के सवाल और अटकलें सामने आती रही हैं। हालांकि, दिशा की मौत और सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बीच किसी आपराधिक संबंध का निष्कर्ष इस आदेश से नहीं निकाला जा सकता।अब CBI को नए सिरे से मामले की जांच करनी होगी। सबसे अहम बात यह है कि हाईकोर्ट ने CBI जांच का आदेश तो दिया है, लेकिन किसी व्यक्ति को आरोपी घोषित नहीं किया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि आरोपी तय करना जांच में सामने आने वाले ठोस सबूतों पर निर्भर करेगा।