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अपनी ही सरकार को निशाने पर लिया वरुण ने, पूछा, युवा कब तक सब्र करे?

लखीमपुर खीरी कांड और दूसरे कुछ मुद्दों पर बीजेपी और उसकी सरकार पर लगातार हमले करने वाले बीजेपी के ही सांसद वरुण गांधी ने एक बार फिर पार्टी को निशाने पर लिया है। इस बार बेरोज़गारी और नियुक्ति परीक्षा में घपले के मुद्दे को उठा कर उन्होंने सवाल किया है कि युवा आखिर कब तक सब्र रखे। 

वरुण गांधी ने गुरुवार को ट्वीट किया, "पहले तो सरकारी नौकरी ही नहीं है, फिर भी कुछ मौक़ा आए तो पेपर लीक हो, परीक्षा दे दी तो सालों साल रिजल्ट नहीं, फिर किसी घोटाले में रद्द हो। रेलवे ग्रुप डी के सवा करोड़ नौजवान दो साल से परिणामों के इंतज़ार में हैं। सेना में भर्ती का भी वही हाल है। आख़िर कब तक सब्र करे भारत का नौजवान?''

क्या है मामला?

याद दिला दें कि पिछले हफ़्ते उत्तर प्रदेश शिक्षक योग्यता परीक्षा यानी यूपीटीईटी का पेपर ठीक परीक्षा के ठीक पहले लीक हो गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने परीक्षा रद्द कर दिया। इससे लाखों परीक्षार्थिों पर प्रभाव पड़ा है और उन्हें दुबारा परीक्षा देना होगा। 

इस मामले में बड़े पैमाने पर घपले का आरोप लगा है। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने राज्य परीक्षा नियामक प्राधिकार के सचिव संजय उपाध्याय को गिरफ़्तार कर लिया।  इससे पहले राज्य सरकार उन्हें  निलंबित कर दिया था।

वरुण गाँधी ने इसी मामले में सरकार पर निशाना साधा है।
उत्तर प्रदेश में बीजेपी की ही सरकार है और विधानसभा चुनाव के कुछ ही महीने बचे हैं। ऐसे में अपनी ही पार्टी पर हमला करने के कई राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं।

निशाने पर केंद्र

लेकिन यह पहला मौका नहीं है जब वरुण गांधी ने अपनी ही सरकार और पार्टी की आलोचना की है।

उन्होंने इसके पहले 30 नवंबर को 'इंडियन एक्सप्रेस' में एक लेख लिख कर अर्थव्यवस्था पर सरकार की नीतियों और उसके कामकाज की आलोचना की थी। उन्होंने 'पॉलिसी मेकर्स मस्ट ब्रेक इंडियाज़ साइकिल ऑफ पॉवर्टी' में लिखा था,

'पिछले दशक में हमारे नीति निर्माताओं ने लगातार सैकड़ों अप्रभावी नीतियों की घोषणा की। इन नीतियों का लक्ष्य भारत में मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्सहान देना था। नौकरियाँ पैदा करनी थी और किसानों की आमदनी बढ़ानी थी।


वरुण गांधी, सांसद, बीजेपी

निशाने पर मोदी?

जाहिर है, वह नाम लिए बगैर 'मेड इन इंडिया' मुहिम की ओर इशारा कर रहे थे और इस बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही चोट कर रहे थे। 

याद दिला दें कि नरेंद्र मोदी ने 'मेड इन इंडिया' का बहुत बड़े पैमान पर अभियान चलाया था। सरकार का कहना था कि इससे भारत पूरी दुनिया का उत्पादन केंद्र बन जाएगा, अरबों रुपए का निवेश होगा और लाखों लोगों को रोज़गार मिलेगा। पर यह योजना बुरी तरह फ्लॉप हुई। 

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