लॉकडाउन को महीना होने जा रहा है मगर सरकार ज़रूरतमंदों तक मदद नहीं पहुँचा पाई है। ये तब है जब अनाज भंडार भरे हुए ही नहीं हैं बल्कि अनाज सड़ रहा है, बरबाद हो रहा है, चूहे खा रहे हैं। ख़तरा यह है कि उसकी नाकामी कहीं कानून व्यवस्था का संकट न खड़ा कर दे।
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























