बहुचर्चित एक राष्ट्र-एक चुनाव सिद्धांत को आखिरकार प्रधानमंत्री मोदी ने आकार दे दिया है। लेकिन क्या यह व्यावहारिक है? और यह किसे लाभ पहुंचाने के लिए बनाया गया है? इससे भारतीय लोकतंत्र को कैसे मदद मिलेगी?
बहुचर्चित एक राष्ट्र-एक चुनाव सिद्धांत को आखिरकार प्रधानमंत्री मोदी ने आकार दे दिया है। लेकिन क्या यह व्यावहारिक है? और यह किसे लाभ पहुंचाने के लिए बनाया गया है? इससे भारतीय लोकतंत्र को कैसे मदद मिलेगी?