पश्चिम बंगाल में पोस्ट पोल हिंसा के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यकर्ताओं से अपील की थी कि 'चुनाव जीत गए हैं तो अब बदला नहीं, बदलाव की बात करें। हिंसा का यह चक्र खत्म करें।' लेकिन प्रधानमंत्री की इस अपील का कोई असर नहीं हुआ।
पश्चिम बंगाल में हिंसा (फाइल फोटो)
चुनाव बाद हुई हिंसा की घटनाओं में बीजेपी की बड़ी भूमिका सामने आयी है। एक रिपोर्ट के अनुसार चुनाव नतीजे आने के बाद 4 मई से 7 मई तक सिर्फ चार दिनों में 64 हिंसक घटनाएं हुईं। स्वतंत्र संगठन ACLED यानी आर्म्ड कन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डाटा के आँकड़ों के अनुसार इनमें से 42 घटनाओं में बीजेपी से जुड़े लोगों का जुड़ाव पाया गया।
ऐसा तब हुआ जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद हिंसा की ख़बरों के बीच बीजेपी ने लगातार अपील की कि हिंसा नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यकर्ताओं से अपील की थी कि अब बदला नहीं, बदलाव की बात करें। उन्होंने कहा था, 'चुनाव जीत गए हैं तो अब बदला नहीं, बदलाव की बात करें। हिंसा का यह चक्र खत्म करें।' लेकिन प्रधानमंत्री की इस अपील का कोई असर नहीं हुआ।
बीजेपी कार्यकर्ताओं ने क्या किया?
बीजेपी कार्यकर्ताओं ने तृणमूल कांग्रेस के दफ्तर तोड़े, टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं के घरों पर हमला किया, उनसे मारपीट की और गिनती एजेंटों को भी नहीं छोड़ा। एक घटना में मुस्लिम दुकानदारों की दुकानों को तोड़ा गया और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए गए।
कुल चुनावी हिंसा का आंकड़ा
द हिंदू ने ACLED के हवाले से रिपोर्ट दी है कि 15 मार्च से 7 मई तक जब चुनाव आचार संहिता लागू थी तब कुल 231 हिंसक घटनाएं हुईं। इसके अलावा 139 शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी हुए, जिनमें ज्यादातर SIR और वोटर लिस्ट से नाम कटने के ख़िलाफ़ थे।
पिछले चुनावों की तुलना में इस बार हिंसा कम थी:
- 2016: 83.9% घटनाएं हिंसक
- 2021: 78.5% घटनाएं हिंसक
- 2026: सिर्फ 62.4% घटनाएं हिंसक
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पार्टियों की भूमिका
आर्म्ड कन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डाटा के आँकड़ों के अनुसार टीएमसी कुल 106 घटनाओं में शामिल थी, जिसमें वह 45 बार हमलावर रही। बीजेपी कुल 91 घटनाओं में शामिल थी, जिसमें वह 49 बार हमलावर रही। अज्ञात लोगों द्वारा 41 घटनाएं हुई और केंद्रीय बलों द्वारा 14 घटनाएं हुईं। इस दौरान कुल 13 लोगों की मौत हुई। इनमें 3 टीएमसी कार्यकर्ता, 3 बीजेपी कार्यकर्ता, 1 कांग्रेस कार्यकर्ता और 3 आम नागरिक शामिल हैं। इस दौरान नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की भी हत्या कर दी गई।
किन इलाकों में सबसे ज़्यादा हिंसा?
कोलकाता का बेलेगाटा में सबसे ज़्यादा हिंसा हुई। यह पिछले तीन चुनावों में सबसे ज्यादा हिंसा वाला इलाका है। अन्य प्रभावित वाली जगहों में भांगड़, नोआपाड़ा, माटीगारा-नक्सलबाड़ी, आसनसोल दक्षिण शामिल हैं। केंद्रीय बलों की भूमिका
इस बार केंद्र सरकार ने हिंसा रोकने के लिए 2400 कंपनियां केंद्रीय बल तैनात किए थे। लेकिन इन बलों पर भी हिंसा करने के आरोप लगे। कथित तौर पर केंद्रीय बलों ने 13 बार हिंसा की। इनमें 8 बार आम नागरिकों पर हिंसा हुई जिसमें एक बुजुर्ग मतदाता की मौत भी हुई। 5 बार टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमले हुए। बीजेपी पर कोई हमला नहीं हुआ।
पश्चिम बंगाल में हिंसा की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इस बार चुनाव कम हिंसक रहे, लेकिन नतीजे आने के बाद फिर पुरानी कहानी दोहराई गई। प्रधानमंत्री की अपील के बावजूद बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा टीएमसी पर बड़े पैमाने पर हमले किए गए। टीएमसी पर भी पिछले 10 सालों से राज्य में हिंसा करने के आरोप लगते रहे हैं। ACLED जैसे स्वतंत्र संगठनों के आंकड़े बताते हैं कि लोकतंत्र में जीत के जश्न में हिंसा और बदले की भावना अभी भी हावी है।