अमित शाह ने हुमायूं कबीर और बीजेपी को ‘नॉर्थ-साउथ पोल’ बताया, जिस पर सोशल मीडिया में तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। लोग हुमायूं कबीर और बीजेपी के पुराने संबंधों की याद दिला रहे हैं।
अमित शाह और हुमायूं कबीर की पुरानी तस्वीर।
हुमायूं कबीर पर मुंह खोलकर अमित शाह और भी ज़्यादा फँस गये दिखते हैं! कथित '1000 करोड़ के वीडियो कांड' में फँसे हुमायूँ कबीर को लेकर जब गृहमंत्री अमित शाह से सवाल किया गया तो उन्होंने कह दिया कि 'हुमायूं कबीर और बीजेपी साउथ पोल और नॉर्थ पोल हैं। कभी हमारा मेल नहीं खा सकता है। हम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने वाले के साथ बैठने से बेहतर 20 साल और विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे।' शाह के इस बयान के बाद लोगों ने एक्स पर लिखना शुरू किया कि हुमायूं कबीर पहले बीजेपी में ही थे।
एक्स पर कुछ यूजरों ने हुमायूं कबीर के बीजेपी में शामिल होने की तस्वीरें साझा कर अमित शाह पर तंज कसे। मोहम्मद ज़ुबैर ने अमित शाह के बयान और हुमायूं कबीर के बीजेपी नेताओं के साथ की एक तस्वीर को साझा करते हुए लिखा है कि 2020 तक हुमायूं कबीर बीजेपी नेता ही थे।
हुमायूं कबीर की बीजेपी में पारी
हुमायूं कबीर 2018 में बीजेपी में शामिल हुए थे। 25 जून 2018 को उन्होंने बीजेपी का दामन थामा था। बीजेपी में रहने के दौरान उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर मुर्शिदाबाद सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले वे तृणमूल कांग्रेस में वापस लौट आए और भरतपुर सीट से विधायक चुने गए। वैसे, कहा जाता है कि उन्होंने अगस्त 2020 में ही टीएमसी में वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। वह पहले कांग्रेस में भी रहे थे। फिर टीएमसी में गये। 2015 में टीएमसी से निकाले गए थे। 2018 में बीजेपी में शामिल हुए। 2020 में टीएमसी में वापसी हुई। बाद में 2025 में टीएमसी से निष्कासित होने के बाद अपनी नई पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी बनाई। इन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल रखा है।बीजेपी से कथित डील का वीडियो वायरल
पिछले साल हुमायूं कबीर सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने पश्चिम बंगाल में अयोध्या की बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद बनाने की कोशिश की थी। अब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक वीडियो वायरल हो गया है, जिसे टीएमसी ने 'स्टिंग ऑपरेशन' बताया है। वीडियो में कबीर को कथित तौर पर कहते सुना जा सकता है, 'वे बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में हैं। ममता बनर्जी को हराने के लिए 1000 करोड़ रुपये की डील हुई है। वे शुभेंदु अधिकारी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े हैं। अल्पसंख्यक वोटों को टीएमसी से दूर करने की रणनीति बनाई जा रही है।' वीडियो में बाबरी मस्जिद मुद्दा उठाकर मुस्लिम वोट प्रभावित करने की बात कही गई है।टीएमसी ने इस वीडियो को लेकर गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मंत्री फिरहाद हाकिम, अरूप बिस्वास और प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने इसे सस्ती सांप्रदायिक इंजीनियरिंग बताया। पार्टी ने ईडी से जांच की मांग की है और कहा कि कबीर बीजेपी के भाड़े के सैनिक हैं जो मुस्लिम वोट बांटने की कोशिश कर रहे हैं।
टीएमसी ने आरोप लगाया कि भाजपा वोट बांटने की पुरानी 'फूट डालो और राज करो' नीति अपना रही है। पार्टी ने कहा कि बंगाल न बंटेगा और न टूटेगा। यह चुनाव अब सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि सांप्रदायिक ताकतों से बंगाल को बचाने का है।
पश्चिम बंगाल से और ख़बरें
हुमायूं कबीर की सफाई
हुमायूं कबीर ने वीडियो को एआई जनरेटेड बताया है। उन्होंने कहा, 'यह टीएमसी की साजिश है। वे मुस्लिम वोट खोने से डर रहे हैं। अगर उनके पास कोई सबूत है कि मैं भाजपा नेताओं से मिला हूं, तो दिखाएं।' कबीर ने धमकी दी कि अगर टीएमसी सबूत नहीं देगी तो वे मानहानि का केस करेंगे। उन्होंने कहा कि वीडियो से मुस्लिम समुदाय की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया है।
AIMIM ने गठबंधन तोड़ा
इस विवाद के बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने हुमायूं कबीर की नई पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया है।ओवैसी ने बंगाल में हुमायूं कबीर की पार्टी से गठबंधन तोड़ा
अमित शाह का कड़ा जवाब
इसी बीच, अब तक चुप्पी साधे रही बीजेपी के नेता अमित शाह का बयान आया है। एक पत्रकार के सवाल पूछने पर अमित शाह ने कहा, 'ममता जी की क्षमता का आपको अंदाजा नहीं है। वह 2000 ऐसे वीडियो बना सकती हैं। हुमायूं कबीर और भाजपा उत्तर और दक्षिण ध्रुव की तरह हैं। हम कभी एक नहीं हो सकते। बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने वालों के साथ बैठने से बेहतर है कि हम 20 साल तक विपक्ष में बैठें।'
बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने भी कबीर पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें 100 करोड़ भी नहीं मिलने चाहिए, 1000 करोड़ की बात तो दूर की है।
यह विवाद बंगाल के विधानसभा चुनाव को और गरमा गया है। हुमायूं कबीर का वीडियो मुस्लिम वोट बैंक पर असर डाल सकता है। टीएमसी इसे अपना हथियार बना रही है, जबकि बीजेपी ने साफ़ कर दिया है कि ऐसे लोगों से उनका कोई लेना-देना नहीं है।