एक्सिस माय इंडिया जैसी एजेंसी पश्चिम बंगाल के लिए एग्ज़िट पोल क्यों जारी नहीं कर रही है? इसने बाक़ी चार राज्यों- तमिलनाडु, केरल, असम और पुदुचेरी के लिए एग्ज़िट पोल के आँकड़े जारी भी कर दिए। फिर बंगाल में आख़िर ऐसा क्या हो गया? वह भी तब जब एक्सिस माय इंडिया ने कहा है कि उसने सर्वे कराया था। लेकिन अब एजेंसी का ही कहना है कि एक आशंका या कहें कि डर की वजह से उसने इन्हें जारी किया है।

तो आख़िर यह डर क्या है? इस सवाल का जवाब खुद एक्सिस माय इंडिया के संस्थापक प्रदीप गुप्ता ने ही दिया है। उन्होंने कहा है कि बंगाल के मतदाताओं के चुप्पी साधने से उन्हें डर है कि उनका आकलन सही नहीं होगा। उन्होंने कहा है कि उनके पास पर्याप्त और सही सैंपल नहीं मिल पाया है, इसलिए वे कोई अनुमान नहीं लगा रहे हैं।

मतदाता की चुप्पी का दावा

एक्सिस माई इंडिया आमतौर पर फेस टू फेस बात करके सर्वे करती है। प्रदीप गुप्ता ने एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में बताया कि पहले चरण के बाद जब उनकी टीम लोगों से बात करने गई तो 60-70 प्रतिशत लोग बिल्कुल मुंह बंद रखे। वे हाँ या ना भी नहीं बोल रहे थे। गुप्ता ने कहा, 'चुनाव के माहौल में कोई किसी से बात करने को तैयार नहीं है। जब तक हमारा सैंपल पूरी तरह उनका प्रतिनिधित्व नहीं करेगा, तब तक 20-30 प्रतिशत सैंपल के आधार पर कोई नंबर पेश करना सही नहीं होगा।' रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बताया कि वे एक बार फिर कोशिश करेंगे क्योंकि शायद मतदान पूरा होने के बाद लोग शायद बात करने लगें। लेकिन गुरुवार दोपहर को प्रदीप गुप्ता ने साफ कर दिया कि एक्सिस माई इंडिया बंगाल के एग्जिट पोल डाटा जारी नहीं करेगी।
प्रदीप गुप्ता ने कहा, 'जब कोई बोल ही नहीं रहा है तो मेरी अपनी राय भी बन नहीं पाती। मेरी सीमाएँ बहुत छोटी हो गई हैं।' उन्होंने अपनी टीम की मेहनत का भी ज़िक्र किया और कहा कि इतनी मेहनत के बाद अगर अनुमान नहीं लगा पाए तो उन्हें भी बहुत निराशा होगी। फिर भी वे गलत अनुमान लगाने से बेहतर समझते हैं कि कुछ न कहें।

बाक़ी एजेंसियों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए?

एक्सिस माय इंडिया के संस्थापक प्रदीप गुप्ता ने क्या यह कहकर बंगाल में बाक़ी सर्वे करने वाली एजेंसियों की विश्वसनियता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं कि बंगाल में 60-70 प्रतिशत लोगों ने बिल्कुल मुंह बंद रखे? यदि बंगाल के मतदाताओं ने सर्वे एजेंसियों के सवालों के जवाब नहीं दिए तो एक्सिस माय इंडिया के अलावा अन्य एजेंसियों ने आँकड़े कैसे जारी कर दिए?

अगर एक्सिस माई इंडिया जैसी बड़ी और अनुभवी एजेंसी को इतना भारी रिजेक्शन मिल रहा है तो जो एजेंसियाँ एग्जिट पोल जारी कर रही हैं उनके सैंपल की गुणवत्ता पर बड़े सवाल उठता है। क्या वे भी फेस-टू-फेस कर रहे थे? या फोन, ऑनलाइन, छोटे सैंपल पर निर्भर थे?

और यदि सच में लोग सर्वे करने वाली बाक़ी एजेंसियों के सामने सवालों के जवाब दे रहे थे तो क्या एक्सिस माय इंडिया और प्रदीप गुप्ता के दावों पर सवाल नहीं उठता है? तो क्या सभी एग्ज़िट संदेह के दायरे में हैं? वैसे, पहले से ही एग्ज़िट पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसा इसलिए कि इन सर्वे एजेंसियों के एग्ज़िट पोल अक्सर ग़लत आते रहे हैं।

बंगाल: 2021 के एग्जिट पोल

बंगाल में एग्ज़िट पोल के विफल होने का सबसे बड़ा उदाहरण 2021 का विधानसभा चुनाव है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बंगाल में 18 सीटें जीती थीं और वोट शेयर करीब 40 प्रतिशत पहुंच गया था। इसी के आधार पर ज्यादातर राष्ट्रीय एजेंसियों ने 2021 में कड़ी टक्कर या भाजपा की जीत का अनुमान लगाया। कुछ तो ममता बनर्जी की सरकार गिरने की भी बात कर रहे थे। लेकिन नतीजा कुछ और ही निकला। तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी ने 215 सीटों की भारी जीत हासिल की। भाजपा को सिर्फ 77 सीटें मिलीं। बाद में विश्लेषकों ने माना कि उन्होंने 'साइलेंट महिला वोटरों' और टीएमसी की ग्रामीण कल्याण योजनाओं, खासकर लक्ष्मीर भंडार जैसी स्कीमों को कम आंक लिया था।
पश्चिम बंगाल से और ख़बरें

2016 में भी था ग़लत अनुमान

राज्य में 2016 के चुनाव में भी यही हुआ। ज्यादातर एग्जिट पोल्स ने टीएमसी की आसान जीत बताई, लेकिन किसी ने 211 सीटों की भारी जीत का अंदाजा नहीं लगाया था। उस समय वाम-कांग्रेस गठबंधन बुरी तरह टूट गया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी एग्जिट पोल्स ने भाजपा को 25-30 सीटें देने का अनुमान लगाया था। लेकिन टीएमसी ने 29 सीटें जीतकर एक बार फिर चौंकाया। इससे साफ़ है कि बंगाल में राष्ट्रीय लहर अक्सर स्थानीय मुद्दों और ममता बनर्जी के संदेश के आगे नहीं टिक पाती।

हरियाणा 2024: एग्जिट पोल बुरी तरह फेल

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में लगभग सभी एग्जिट पोल ने कांग्रेस की भारी जीत का अनुमान लगाया था। कई सर्वे एजेंसियों ने कहा कि कांग्रेस आराम से बहुमत हासिल कर लेगी और इसे 'कांग्रेस की लहर' बताया गया। लेकिन नतीजे बिल्कुल उलट निकले। 2024 के हरियाणा चुनाव में भाजपा ने अपनी सरकार बचाई और कांग्रेस से आगे रही। सभी एजेंसियों का एक जैसा गलत अनुमान हाल के सालों का सबसे बड़ा एग्जिट पोल फेलियर बना गया।

लोकसभा चुनाव 2024: ‘400 पार’ का सपना टूटा

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कई एग्जिट पोल ने एनडीए के लिए भारी बहुमत और कुछ ने तो '400 पार' सीटें भी बता दी थीं। बाजार और राजनीतिक चर्चाएं इन आंकड़ों पर चल रही थीं। वास्तविक नतीजे बहुत अलग थे। एनडीए को 293 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा अकेले 240 सीटों पर सिमट गई। इंडिया गठबंधन को 235 सीटें मिलीं। ये हाल के सालों का सबसे चर्चित एग्जिट पोल फेलियर माना जा रहा है।
सर्वाधिक पढ़ी गयी ख़बरें

2026 में बंगाल के लिए अनुमान क्या?

बंगाल चुनाव के लिए 2026 में अन्य एजेंसियों के एग्जिट पोल में तस्वीर काफी बंटी हुई नजर आ रही है।
  • प्रजा पोल ने बीजेपी को 178 से 208 सीटों तक का अनुमान लगाया है।
  • मैट्राइज और पोल डायरी ने भाजपा को 161 और 171 सीटें दी हैं।
  • वहीं जनमत पोल ने टीएमसी और उसके सहयोगियों को 195-205 सीटें बताई हैं।
  • पीपुल्स पल्स ने टीएमसी को 177-187 सीटों का अनुमान दिया है।
बहरहाल, पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं। बहुमत के लिए 148 सीटें चाहिए। एक्सिस माई इंडिया जैसी बड़ी एजेंसी के चुप रहने से इस बार बंगाल चुनाव के नतीजों को लेकर और ज्यादा उत्सुकता बढ़ गई है। असली नतीजे 2 मई या 3 मई को घोषित होने वाले हैं।