चुनाव आयोग ने मालदा घटना की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई घटना को "असामाजिक तत्वों द्वारा न्यायपालिका को धमकाने का निर्लज्ज प्रयास" करार दिया। कोर्ट ने इस घटना को अदालत को चुनौती देने" वाला बताया। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना की जांच कराने का आदेश दिया। इसके बाद चुनाव आयोग ने निर्देश का पालन किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार को कानून व्यवस्था के लिए कटघरे में खड़ा करना चाहा लेकिन राज्य सरकार के वकील ने कहा कि इस समय पुलिस चुनाव आयोग के मातहत है। चुनाव आयोग बंगाल के डीजीपी और अन्य अधिकारियों को बदल चुका है। सारे पुलिस अधिकारी उसके निर्देशों पर काम कर रहे हैं। 
आरोप है कि बुधवार को मालदा के मोठाबाड़ी, कालियाचक में ब्लॉक विकास कार्यालय (बीडीओ) में सात न्यायिक अधिकारी (चार पुरुष और तीन महिला) को गांव वालों के एक समूह ने नौ घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखा। यह घेराव दोपहर करीब 3:30 बजे शुरू हुआ और आधी रात के बाद तक चला। फिर वहां केंद्रीय बलों ने पहुंचकर उन्हें बचाया। इस दौरान अधिकारियों को खाना-पीना भी नहीं दिया गया। रिहाई के बाद उनके वाहनों पर पत्थर, बांस के डंडे और ईंटों से हमला किया गया। वहां के लोग एसआईआर के बाद उनके नाम मतदाता सूची से उड़ाए जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने उन अधिकारियों का घेराव किया जो इस प्रक्रिया से जुड़े हैं।
इस मामले की जानकारी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली को मिली तो वो आगबबूला हो गए। बेंच ने कहा कि न्यायिक अधिकारी एसआईआर प्रक्रिया "इस अदालत की ओर से" निभा रहे थे और वे "इस अदालत का हिस्सा" हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि न्यायिक अधिकारियों के मन में "मनोवैज्ञानिक भय" का माहौल बनाने का कोई भी प्रयास "आपराधिक अवमानना" के समान है। इस घटना में सिविल और पुलिस प्रशासन की पूरी विफलता दिखाई दी। 
कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव से बेहद निराशा जताई कि वे संपर्क में नहीं आए क्योंकि उन्होंने व्हाट्सएप सुविधा वाला मोबाइल नंबर साझा नहीं किया था। घटना के बाद सभी न्यायिक अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बात की गई।
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उन्होंने 5 अप्रैल की रात तक शेष मतदाता संशोधन कार्य पूरा करने का सकारात्मक जवाब दिया, लेकिन इस घटना पर वे "ठंडे" रहे। जबकि न्यायिक अधिकारी बिना छुट्टी के, यहां तक कि शनिवार-रविवार को भी लगातार काम कर रहे थे। कोर्ट ने मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, जिला मजिस्ट्रेट और एसपी की भूमिका को "अत्यधिक निंदनीय" बताया। यहां बताना जरूरी है कि डीजीपी से लेकर एसपी तक इस समय चुनाव आयोग के नियंत्रण में हैं। मुख्य मंत्री या राज्य सरकार उन्हें आदेश नहीं दे सकता।
इन अधिकारियों को प्रभावी कदम न उठाने के लिए सोमवार को वर्चुअली पेश होकर जवाब देने का निर्देश दिया गया है। कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस. सुजॉय पॉल और अन्य अधिकारियों के एसओएस संदेशों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने दोपहर 3:30 बजे के तुरंत बाद राज्य प्रशासन को सूचित किया, लेकिन 8:30 बजे तक "स्पष्ट निष्क्रियता" रही।
मुख्य न्यायाधीश पॉल ने रात में गृह सचिव और डीजीपी को अपने आवास पर बुलाया। आधी रात के बाद बंधकों को रिहा किया गया। कोर्ट ने कहा कि घटना के बारे में उन्हें कई व्हाट्सएप संदेश और मुख्य न्यायाधीश पॉल से सीजेआई को डीओ पत्र मिला था।चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के दबाव के बाद एनआईए को पत्र लिखकर जांच शुरू करने को कहा। पत्र में कहा गया है कि "ऊपर दिए गए निर्देशों के अनुसार मामले की जांच/पूछताछ की जाए"। जांच एजेंसी को प्रारंभिक रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपनी होगी।
अदालत ने चुनाव आयोग को "स्वतंत्र एजेंसी" जैसे सीबीआई या एनआईए को जांच सौंपने का संकेत दिया था। कोर्ट ने अंतरिम उपायों के तौर पर निर्देश दिए कि जहां भी न्यायिक अधिकारी मतदाता संशोधन के लिए तैनात हैं, वहां पर्याप्त केंद्रीय बल तैनात किए जाएं। अधिकारियों और उनके परिवारों के ठहरने वाले होटलों व सरकारी गेस्टहाउसों में पर्याप्त सुरक्षा हो। पुलिस अधिकारियों की सुरक्षा संबंधी आशंकाओं का आकलन कर उचित कदम उठाए जाएं।अदालत ने यह भी आदेश दिया कि मुख्य सचिव, डीजीपी और बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुपालन रिपोर्ट सौंपें। किसी भी स्थल पर आपत्तियों या सुनवाई के लिए पांच से अधिक व्यक्ति नहीं घुस सकेंगे और पांच से अधिक लोग इकट्ठा नहीं हो सकेंगे।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया

मालदा में 9 घंटे तक न्यायिक अधिकारियों को कथित तौर पर बंधक बनाने की घटना को चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत द्वारा सुनियोजित साज़िश बताये जाने पर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह पूरी घटना बीजेपी और चुनाव आयोग की गंदी साज़िश का नतीजा है।

ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद में चुनावी रैली में कहा, 'बीजेपी और चुनाव आयोग आग से खेल रहे हैं। मालदा की कल की दुर्भाग्यपूर्ण घटना उनकी गंदी साजिश का नतीजा है। उन्होंने बंगाल के अनुभवी अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को हटा दिया, जो हर गली-मोहल्ले को अच्छी तरह जानते थे। उनकी जगह केंद्र के ऐसे अधिकारी लगा दिए जो बंगाल की भूगोल, जनसंख्या और जमीनी हकीकत कुछ भी नहीं जानते। ये बाहर के लोग स्थानीय हालात संभाल नहीं पा रहे। अब बीजेपी इस एक घटना का इस्तेमाल पूरे बंगाल को बदनाम करने के लिए कर रहा है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' ममता ने कहा कि इस घटना के लिए यदि कोई असली दोषी है तो वह अमित शाह हैं। उन्होंने कहा,