विधानसभा चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने आख़िर बंगाल के शीर्ष अधिकारियों को क्यों हटा दिया? चुनाव आयोग के क़दम के ख़िलाफ़ ममता ने आख़िर क्यों बड़ा मोर्चा खोल दिया?
ज्ञानेश कुमार, ममता बनर्जी।
चुनाव की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद जब चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में शीर्ष अधिकारियों के तबादले कर दिए तो हंगामा मच गया। यह तबादला पश्चिम बंगाल में हाल के समय में बहुत बड़ा और असामान्य है। टीएमसी सांसदों ने संसद में हंगामा किया तो ममता बनर्जी ने सड़कों पर उतरने की घोषणा की है। यानी राज्य में चुनाव की घोषणा होते ही बंगाल में ममता ने भी जवाबी 'युद्ध' छेड़ दिया है।
बंगाल के घटनाक्रमों का असर राज्यसभा में दिखा। राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार को राज्यसभा से पूरे दिन के लिए वॉकआउट कर दिया। यह विरोध चुनाव आयोग के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ था, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती जैसे कई बड़े अधिकारियों को हटा दिया गया। यह फ़ैसला विधानसभा चुनाव की तारीख़ों की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही आधी रात को लिया गया।
राज्यसभा में शून्यकाल से ठीक पहले टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा, 'आधी रात को मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और गृह सचिव को चुनाव आयोग ने हटा दिया। उनके पास ऐसा करने की पूरी शक्ति है।' उन्होंने आगे कहा कि उनकी पार्टी इस विरोध में पूरे दिन सदन से बाहर चली गई है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले पर बहुत नाराजगी जताई है। उन्होंने सोमवार शाम 4 बजे सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। टीएमसी का कहना है कि यह फ़ैसला निष्पक्ष चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश है।
सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग: TMC
टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय ने कहा कि बीजेपी चुनाव जीतने के लिए सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा, 'बीजेपी हर तरकीब इस्तेमाल कर रही है। मुख्य सचिव को इसी वजह से हटाया गया। जनता तृणमूल के साथ है।' पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे। पहले चरण में 23 अप्रैल को और दूसरे चरण में 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। वोटों की गिनती 4 मई को होगी।
किन अफसरों को हटाया गया?
टीएमसी की ओर से यह प्रतिक्रिया तब आ रही है जब चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना को उनके पदों से हटा दिया है। नंदिनी चक्रवर्ती को चुनाव से जुड़े किसी भी काम से दूर रखा जाएगा। उनकी जगह 1993 बैच के आईएएस अधिकारी दुष्यंत नरियाल को नया मुख्य सचिव बनाया गया है। गृह विभाग में प्रधान सचिव के पद पर 1997 बैच की आईएएस अधिकारी संघमित्रा घोष को लगाया गया है।
इसके अलावा राज्य के पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी पीयूष पांडे को हटाकर सिद्धनाथ गुप्ता को उनकी जगह लगाया गया है। कोलकाता पुलिस कमिश्नर सुप्रतीम सरकार की जगह अजय कुमार नंद को कमिश्नर बनाया गया है।
चुनाव आयोग ने तबादले क्यों किए?
चुनाव आयोग का कहना है कि यह बदलाव राज्य में चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद किया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि पश्चिम बंगाल में चुनाव शांतिपूर्ण और बिना हिंसा के होंगे। इसी मक़सद से वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तबादला किया गया है। चुनाव आयोग ने कहा कि ये आदेश तुरंत लागू होंगे और सोमवार दोपहर 3 बजे तक नए अधिकारियों के पदभार ग्रहण की रिपोर्ट मांगी गई है।
ईसीआई पर सवाल उठाना ठीक नहीं: बीजेपी
राज्यसभा में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने टीएमसी के विरोध पर कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। सदन में उसकी आलोचना करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा, 'अगर हर सदस्य अदालत या चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थाओं के फ़ैसलों पर सवाल उठाएगा तो यह ठीक नहीं। चुनाव आयोग को अलग शक्ति दी गई है।' उन्होंने टीएमसी और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वे हमेशा संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करते हैं और सदन का समय बर्बाद करते हैं।एसआईआर का मुद्दा भी
टीएमसी लंबे समय से चुनाव आयोग की आलोचना कर रही है, खासकर राज्य में चल रहे विशेष गहन संशोधन यानी एसआईआर अभियान को लेकर। टीएमसी का आरोप है कि यह अभियान निष्पक्ष नहीं है। एसआईआर का मुद्दा काफी पेचीदा है। इसको लेकर अमित शाह जहाँ घुसपैठिये का मुद्दा बना रहे हैं तो ममता वैध मतदाताओं के नाम काटे जाने का आरोप लगा रही हैं। ममता बनर्जी आरोप लगा रही हैं कि राज्य में एक करोड़ से ज़्यादा मतदाता कम हो सकते हैं और बीजेपी ने जानबूझकर टीएमसी के समर्थकों को निशाना बनाया है। हालाँकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों से इनकार किया है।
बहरहाल, चुनाव की घोषणा के बाद की ये घटनाएँ पश्चिम बंगाल में आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक तनाव को और बढ़ा रही है। टीएमसी इसे बीजेपी के ख़िलाफ़ साज़िश बता रही है, जबकि विपक्षी दल इसे निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने का क़दम मान रहे हैं।