ईरान ने शांति वार्ता के अमेरिका के दावे को खारिज कर दिया फिर भी डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि 'ईरानी शानदार वार्ताकार' हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंत्रिमंडल की बैठक की शुरुआत में यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'वे डील करने के लिए मिन्नतें कर रहे हैं, मैं नहीं।' ट्रंप का दावा है कि ईरान ही बातचीत शुरू करने के लिए उतावला है, जबकि अमेरिका अभी फ़ैसला नहीं कर पाया है कि वह डील करे या नहीं। इसके साथ ही उन्होंने ईरानी नेतृत्व की तारीफ़ करते हुए कहा, 'वे मूर्ख नहीं हैं। वे एक खास तरीके से बहुत स्मार्ट हैं। मैं कहता हूं कि वे लड़ाई में कमजोर हैं, लेकिन बातचीत में बहुत अच्छे वार्ताकार हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को चार हफ्ते पहले ही डील कर लेनी चाहिए थी। अब शायद मौक़ा चूक गए हैं।
ट्रंप ने यह भी माना कि अमेरिका अभी पूरी तरह तैयार नहीं है कि वह ईरान के साथ डील करे। उन्होंने कहा, 'वे डील करने के लिए बहुत बेचैन हैं, लेकिन मुझे नहीं पता कि हम तैयार हैं या नहीं।'
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ईरान ने यूएस के 15 सूत्रीय प्रस्ताव को ठुकराया

ट्रंप के इस बयान से पहले ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान के जरिए भेजा गया अमेरिकी प्लान 'एकतरफा और अनुचित' है। इसमें सिर्फ अमेरिका और इसराइल के हितों की रक्षा की गई है। ईरानी अधिकारी ने कहा, 'प्रस्ताव में ईरान से अपनी रक्षा करने के अधिकार को छोड़ने को कहा गया है, बदले में प्रतिबंध हटाने का एक अस्पष्ट वादा किया गया है। यह सिर्फ अमेरिका और इसराइल के हितों को बचाता है।'
ईरान ने साफ़ कहा कि अभी 'वार्ता के लिए कोई व्यवस्था नहीं है'। हालाँकि उन्होंने पूरी तरह दरवाजा बंद नहीं किया। अधिकारी ने कहा, 'कूटनीति बंद नहीं हुई है।' तुर्की और पाकिस्तान दोनों तरफ के बीच पुल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही ईरान ने पाँच बड़ी शर्तें रख दी हैं।

ईरान की 5 मुख्य मांगें क्या हैं?

ईरान ने संघर्ष खत्म करने के लिए ये पांच बड़ी शर्तें रखी हैं-
  • दुश्मन की तरफ से सभी हमले और हत्याओं को पूरी तरह रोकना।
  • युद्ध दोबारा शुरू न हो, इसके लिए ठोस और विश्वसनीय तंत्र बनाना।
  • युद्ध से हुए नुकसान का पूरा मुआवजा और क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करना।
  • पूरे क्षेत्र में सभी मोर्चों पर युद्ध ख़त्म करना और सभी रेजिस्टेंस समूहों को शामिल करना।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के प्राकृतिक और कानूनी अधिकार को मान्यता देना।

ट्रंप की 15-सूत्रीय योजना में क्या था?

अमेरिका ने पाकिस्तान के ज़रिए ईरान को यह योजना भेजी थी। योजना के मुख्य बिंदु थे-
  • एक महीने का तत्काल संघर्ष-विराम, ताकि बातचीत हो सके।
  • ईरान का परमाणु हथियार कार्यक्रम पूरी तरह ख़त्म करना।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना, ताकि तेल और गैस की सप्लाई बिना रुकावट चले।
  • ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करना और संबंधित सैन्य ढांचा तोड़ना।
  • क्षेत्र में हमास, हिजबुल्लाह जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन बंद करना।

दोनों तरफ़ की स्थिति

ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि ईरान डील चाहता है, लेकिन यह अमेरिका की शर्तों पर होगा। उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमता को कम आंकते हुए बातचीत पर जोर दिया। यह ट्रंप का पुराना अंदाज है। दबाव बनाकर डील करवाना। इधर, ईरान सार्वजनिक रूप से किसी भी वार्ता से इनकार कर रहा है। 

ईरान कह रहा है कि अमेरिका खुद से बात कर रहा है। ईरान अपनी शर्तें रख रहा है और कह रहा है कि वह अपनी सुरक्षा छोड़ने को तैयार नहीं है।

यह युद्ध अब चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। दोनों तरफ़ से हमले जारी हैं, जिससे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ गई है और तेल की कीमतें भी प्रभावित हो रही हैं। ट्रंप के बयान और ईरान के इनकार से साफ़ है कि दोनों देश अभी भी एक-दूसरे पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका सैन्य दबाव और बातचीत दोनों का इस्तेमाल कर रहा है, जबकि ईरान अपना बचाव कर रहा है और कह रहा है कि कोई भी समझौता उसके हितों की रक्षा करे।
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पाकिस्तान और तुर्की जैसे मध्यस्थ देश अभी भी दोनों पक्षों के बीच संपर्क बनाए हुए हैं। अब देखना होगा कि अगले कुछ दिनों में कोई नया विकास होता है या युद्ध और बढ़ता है। दुनिया भर में इस स्थिति पर नजर है क्योंकि अगर युद्ध लंबा चला तो वैश्विक अर्थव्यवस्था, खासकर तेल आपूर्ति और शिपिंग रूट्स पर बड़ा असर पड़ सकता है।