तेल अवीव में ईरान से युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया इसकी कवरेज नहीं के बराबर कर रहा है। तेल अवीव, हाइफा में आए दिन प्रदर्शन हो रहे हैं। लोगों को बंकर में रहना पड़ रहा है। इसे लेकर काफी नाराज़गी है।
इसराइल की फिल्ममेकर टाल ग्रांट तेल अवीव के युद्धविरोधी प्रदर्शन में
इसराइल के ईरान पर सैन्य हमलों और अमेरिका के साथ मिलकर चल रहे युद्ध की निंदा करते हुए तेल अवीव में एंटी-वार प्रदर्शन आयोजित किया गया। हालांकि छोटे प्रदर्शन रोज़ाना हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नेतन्याहू के सरकार आवास के बाहर भी प्रदर्शन हुए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रदर्शन युद्ध के तीसरे सप्ताह में हुआ, जब ईरान ने इसराइल पर मिसाइलों की बौछार की और इराक व कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों का दावा किया। प्रदर्शनकारियों ने 'नो वॉर' (युद्ध नहीं) के नारे लगाए और हाथों पर 'नो वॉर' लिखकर अपनी मांग रखी। इसराइल की जानी-मानी फिल्ममेकर टाल ग्रांट इस प्रदर्शन में शामिल थीं। उनकी हथेली पर नो वॉर लिखा हुआ था।
प्रदर्शन हबीमा स्क्वायर (Habima Square) पर जमा हुए। प्रदर्शनकारियों ने युद्ध की तुरंत समाप्ति और क्षेत्र में सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकने की मांग की। रॉयटर्स की रिपोर्ट में बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान ईरानी हवाई हमले की चेतावनी (सायरन) बजने लगे, जिसके बाद प्रदर्शनकारी सार्वजनिक बंकर में शरण लेने को मजबूर हुए। इस घटना ने युद्ध की तीव्रता को और उजागर किया। प्रदर्शनकारियों ने इसराइल-अमेरिका के हमलों को क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बताया और शांति की अपील की। तेल अवीव शहर बंकर की शरण में है। इसे लेकर प्रदर्शनकारियों में ज्यादा नाराज़गी देखी गई।
यह प्रदर्शन 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इसराइल-अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के खिलाफ है। इस अभियान में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल सुविधाओं और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और उनके परिवार की हत्या भी इन हमलों में हुई, जिसकी पुष्टि ईरानी मीडिया ने की। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इसराइल और खाड़ी में क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए, जिससे युद्ध तीसरे सप्ताह में पहुंच गया। गल्फ देशों (जैसे UAE पोर्ट्स) पर भी हमले हुए और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया गया।
इससे पहले तेल अवीव और हाइफा में 7-8 मार्च को हुए एंटी-वार प्रदर्शनों को पुलिस ने बलपूर्वक समाप्त किया था। फार-राइट कार्यकर्ताओं के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने 'सार्वजनिक सुरक्षा' का हवाला देते हुए प्रदर्शन रोका और एक प्रदर्शनकारी को गिरफ्तार किया। इसराइल के प्रतिष्ठित अखबार हारेत्ज़ की रिपोर्ट में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई को दमनकारी बताया।
पूरी दुनिया में ईरान पर थोपे गए युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। इसराइल का प्रदर्शन भी वैश्विक स्तर पर ईरान युद्ध के खिलाफ उठ रही आवाजों का हिस्सा है। 14 मार्च को सियोल (दक्षिण कोरिया) में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने US-इसराइल हमलों के खिलाफ मार्च निकाला। एथेंस (यूनान) में हजारों लोग US दूतावास के बाहर जमा हुए। विश्व भर में (अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व) एंटी-वार प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां प्रदर्शनकारी 'एंटी-इम्पीरियलिज्म' और 'एंटी-जियोनिज्म' के नारे लगा रहे हैं। पाकिस्तान में ऐसे ही प्रदर्शनों के दौरान 24 लोग पुलिस फायरिंग में मारे गए। भारत के दिल्ली, लखनऊ, श्रीनगर, करगिल, हैदराबाद, मुंबई जैसे बड़े शहरों में ईरान के समर्थन में और यूएस-इसराइल के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन हुए। आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या को शहादत करार देते हुए मुस्लिमों ने ईरानी एम्बैसी जाकर भारी तादाद में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। क्यूआर कोड के जरिए भी लोगों ने अपने हस्ताक्षर ईरान एम्बैसी को सौंपे।
इसराइली मीडिया (टाइम्स ऑफ इसराइल, हारेत्ज़) के अनुसार, इस युद्ध में इसराइल के मिसाइल इंटरसेप्टर कम हो रहे हैं और ईरानी मिसाइल हमलों से केंद्रीय इसराइल (तेल अवीव समेत) प्रभावित हो रहा है। ईरान ने 9 मिसाइल बैराज दागे, जिनमें से कई को रोका गया लेकिन कुछ ने लक्ष्य भेदा। इस युद्ध में इसराइल में 15 लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन ईरान में मरने वालों की तादाद 1400 तक जा पहुंची है। जिसमें ईरान के मिनाब के स्कूल में 160 छात्राओं और 20 टीचरों का नरसंहार शामिल है। ये हमला अमेरिका ने किया था।
इसराइल में प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह युद्ध क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है और कूटनीतिक समाधान की जरूरत है। ट्रंप प्रशासन ने गल्फ देशों से होर्मुज स्ट्रेट खुला रखने की अपील की है, जबकि ईरान ने जवाबी हमलों की चेतावनी जारी रखी। होर्मुज में यूएस फंस गया है। उसने मित्र देशों से मदद मांगी लेकिन लगभग सभी किनारा कर गए।