अमेरिका में 'सैंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2025' नामक द्विदलीय बिल तैयार किया गया है। इसमें रूस से यूरेनियम और पेट्रोलियम का कारोबार करने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक के टैरिफ लगाने की तैयारी है। इस सूची में भारत के अलावा चीन भी है। अमेरिका इसे रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवाने के उपाय के रूप में बता रहा है।

रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बुधवार को ट्रंप के साथ बैठक के बाद एक्स पर पोस्ट कर बताया कि राष्ट्रपति ने इस प्रतिबंध बिल को 'हरी झंडी' दिखा दी है। ग्राहम ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप के साथ विभिन्न मुद्दों पर बहुत अच्छी बैठक के बाद, उन्होंने महीनों से तैयार हो रहे द्विदलीय रूस प्रतिबंध बिल को मंजूरी दे दी।" उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले हफ्ते से ही इस पर मजबूत द्विदलीय मतदान हो सकता है।

ग्राहम ने आगे कहा कि यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को 'सजा' देने की पावर देगा जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों का जिक्र करते हुए कहा कि यह विधेयक इन देशों पर "भारी दबाव" डालेगा ताकि वे रूसी तेल खरीदना बंद करें, जो पुतिन के यूक्रेन के खिलाफ 'खूनी हमले' को वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है।

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यह बिल मुख्य रूप से सीनेटर ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेनथल द्वारा तैयार किया गया है। इसमें रूस के तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य निर्यात खरीदने वाले देशों पर टैरिफ और सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने की अनुमति दी गई है, ताकि रूस की सैन्य कार्रवाइयों के लिए वित्तीय स्रोत बंद हो जाएं।

ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान यूक्रेन-रूस युद्ध को अपने कार्यकाल के पहले दिन ही समाप्त करने का वादा किया था। वर्तमान में उनकी सरकार शांति वार्ता के लिए प्रयासरत है, जिसमें विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर मुख्य वार्ताकार हैं। हालांकि, पहले यह बिल कांग्रेस में अटका हुआ था क्योंकि ट्रंप कूटनीतिक प्रयासों से शांति समझौता चाहते थे। अब ट्रंप के समर्थन से यह जल्द पारित हो सकता है।

ग्राहम ने कहा, "यह बिल सही समय पर आएगा, क्योंकि यूक्रेन शांति के लिए रियायतें दे रहा है, जबकि पुतिन केवल बातें कर रहे हैं और निर्दोषों की हत्या जारी रखे हुए हैं।"

यह विकास भारत जैसे देशों के लिए महत्वपूर्ण है, जो रूस से सस्ता तेल आयात करते हैं। यदि बिल लागू हुआ तो इससे द्विपक्षीय व्यापार पर असर पड़ सकता है।

भारत है रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीददार

2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का प्रमुख खरीदार बन गया। पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण सस्ते रूसी तेल की उपलब्धता ने भारत को आकर्षित किया, जिससे युद्ध शुरू होने से फरवरी 2022 से जनवरी 2026 तक भारत ने लगभग 144 बिलियन यूरो (लगभग 168 बिलियन डॉलर) मूल्य का रूसी क्रूड आयात किया। यह चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा आयात था, और रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया, जो कुल आयात का 35-40 प्रतिशत तक पहुंच गया। नवंबर 2025 में आयात छह महीने के उच्च स्तर 7.7 मिलियन टन पर पहुंच गया, जो कुल आयात का 35.1 प्रतिशत था।

हाल के महीनों में अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों के कारण आयात में गिरावट आई है। दिसंबर 2025 में आयात घटकर लगभग 1.1-1.2 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया, जो तीन साल का निचला स्तर था। रिलायंस इंडस्ट्रीज, जो पहले भारत की सबसे बड़ी रूसी तेल खरीदार थी, ने जनवरी 2026 में कोई रूसी क्रूड डिलीवरी की उम्मीद नहीं जताई और पिछले तीन सप्ताह में कोई शिपमेंट नहीं लिया। अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, और ट्रंप प्रशासन ने और सख्ती की धमकी दी है, जिससे भारत अमेरिकी और मध्य पूर्वी तेल की ओर मुड़ रहा है। सरकार रिफाइनरों से साप्ताहिक डेटा मांग रही है ताकि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किया जा सके।

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इस बदलाव से भारत ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है, लेकिन सस्ते रूसी तेल पर निर्भरता कम हो रही है। कुछ अनुमानों के अनुसार जनवरी में आयात 1 मिलियन बैरल प्रति दिन से नीचे गिर सकता है, जो 2022 के बाद सबसे कम होगा। राज्य संचालित रिफाइनर और नायरा एनर्जी अभी भी कुछ आयात कर रही हैं, लेकिन कुल मिलाकर गिरावट स्पष्ट है। यह भारत की भू-राजनीतिक संतुलन बनाने की रणनीति को दर्शाता है, जहां रूस से संबंध बनाए रखते हुए अमेरिकी दबाव का सामना किया जा रहा है।