कांतारा चैप्टर 1 की बेतहाशा हाइप के बावजूद डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी की समीक्षा इसे एक कमजोर कृति मानती है। यह फ़िल्म ठोस लॉजिक, मजबूत स्टोरीटेलिंग और नियंत्रित मारधाड़ के अभाव में ओवर-ड्रामा, शोर-शराबे और बेतुकी हिंसा का शिकार हो गई है।
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