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सोनिया पर कृषि मंत्री का पलटवार, कहा, यूपीए में मनरेगा नाकाम, मोदी ने किया बेहतर काम

कृषि व ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि उनकी पार्टी जिस चीज को छू देती है, वहीं भ्रष्टाचार होता है और वह चीज निष्प्रभावी हो जाती है। 

सोनिया गाँधी ने इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख लिख कर महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार अधिनियम की तारीफ़ करते हुए कहा था कि किस तरह नरेंद्र मोदी सरकार इसके प्रति हिकारत का भाव रखती थी और स्वयं प्रधानमंत्री ने इसके ख़िलाफ़ अपमानजनक तरीके से बात की थी, पर आज वही मनरेगा ग़रीबों तक पहुँचने का माध्यम बना हुआ है। उन्होंने सरकार से कहा था कि वह मनरेगा को कांग्रेस बनाम बीजेपी न बनाएं और ग़रीबों की मदद करें। 

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नरेंद्र सिंह तोमर ने इसके जवाब में इंडियन एक्सप्रेस में ही एक लेख लिखा है। उन्होंने इस लेख में आरोप लगाया कि यूपीए के समय मनरेगा में भ्रष्टाचार होता था और वह नाकाम था।
नरेंद्र तोमर ने सोनिया गाँधी पर तंज करते हुए कहा कि उन्हें शायद न मालूम हो कि भारत में रोज़गार गारंटी योजनाएं 1970 से ही हैं।
कृषि मंत्री ने कहा कि पॉल नीहॉज़ और संदीप सुकंठकर ने 2013 और इम्बर्ट क्लीमेंट व जॉन पैप ने 2014 में अध्ययनों से पाया कि मनरेगा में खूब भ्रष्टाचार होता था।

मनरेगा में लीकेज!

तोमर ने कहा कि मनरेगा पर बहस इस वजह से शुरू हुई है कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजित बनर्जी ने बताया कि किस तरह मनरेगा से ग़लत तरीके से पैसे निकालना बंद किया गया। डाइरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से पैसे देना सुनिश्चित किया गया। 

तोमर ने राजीव गाँधी को उद्धृत करते हुए कहा कि 85 प्रतिशत पैसे निकाल लिए जाते थे, पर अब यह बंद हो चुका है। जनवरी 2014 में 76 लाख लोगों को बैंक खाते से जोड़ा गया था, अब यह संख्या बढ़ कर 8.46 करोड़ हो गई है। इसी तरह अब 99 प्रतिशत लोगों को वेतन इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर से दिया जाता है, जबकि 2013-14 में यह 37 प्रतिशत था। 

कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि मनरेगा का इस्तेमाल प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में किया जाता है। कुएं और तालाब गाँव के किसानों की आय बढ़ाने के काम आते हैं।

मनरेगा से जल संचय

जल संचय कार्यक्रमों के तहत 1.50 करोड़ हेक्टेअर ज़मीन को सुरक्षित रखा गया है। निष्पक्ष संस्था इंस्टीच्यूट ऑफ़ इकोनॉमिक ग्रोथ ने 2018 में कहा कि मनरेगा के तहत किए कामों में सिर्फ 05 प्रतिशत को ही असंतोषजनक कहा जा सकता है। 

जल संचय कार्यक्रमों के तहत 1.50 करोड़ हेक्टेअर ज़मीन को सुरक्षित रखा गया है। निष्पक्ष संस्था इंस्टीच्यूट ऑफ़ इकोनॉमिक ग्रोथ ने 2018 में कहा कि मनरेगा के तहत किए कामों में सिर्फ 05 प्रतिशत को ही असंतोषजनक कहा जा सकता है। 

उत्पादकता तीन गुणी

तोमर ने इस लेख में दावा किया है कि 2013-14 तक मनरेगा के तहत 25-30 लाख काम हुए थे, अब इसकी संख्या बढ़ कर 72 लाख हो गई है। इससे साफ़ है कि उत्पादकता दूनी हो गई है।
उन्होंने यह दावा भी किया कि 20.18 लाख तालाब, 11.68 लाख छोटे गड्ढे, 6.12 बड़े गड्ढे, 1.65 लाख बकरी शेड और 6.91 लाख पशु शेड बनाए गए।

कृषि मंत्री ने यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनरेगा के तहत 40 हज़ार करोड़ रुपए दिए हैं। कुल मिला कर इस मद में 1,01,500 करोड़ रुपए की रकम हो गई, जो 2013-14 में दी गई रकम की तीन गुणी है। 

बीजेपी के इस नेता ने तंज के साथ कहा कि इन्हीं वजहों से देश की जनता ने कांग्रेस को लोकसभा में 10 प्रतिशत से भी कम सीटों पर समेट दिया। 

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