पश्चिम बंगाल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की कोर्ट ने गुरुवार 30 अप्रैल को आई-पैक के निदेशक विनेश चंदेल को जमानत दे दी। ईडी ने जमानत याचिका का विरोध तक नहीं किया। आई-पैक ही ममता बनर्जी की पार्टी का काम संभाल रही थी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव खत्म होने के ठीक एक दिन बाद, गुरुवार को दिल्ली की एक अदालत ने राजनीतिक सलाहकार फर्म I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के निदेशक विनेश चंदेल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत दे दी है। आई-पैक वो कंपनी है जो ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का राजनीतिक अभियान संभाल रही थी। बंगाल चुनाव के दौरान आई-पैक के निदेशकों पर छापे मारे गए। मीडिया में इस कंपनी से जुड़ी तमाम कहानियां भी आईं। लेकिन गुरुवार को इस घटनाक्रम ने सभी को चौंका दिया है।
अदालत का फैसला और ED का रुख
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन ने यह आदेश सुनाया। जमानत देते समय अदालत ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चंदेल की जमानत याचिका का विरोध नहीं किया है। ईडी के विरोध न किए जाने के कारण, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 45 के तहत लागू होने वाली कड़ी शर्तें (twin conditions) इस मामले में बाधा नहीं बनीं।पहले खारिज हो गई थी अंतरिम जमानत
इससे पहले, 28 अप्रैल (मंगलवार) को अदालत ने विनेश चंदेल को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। चंदेल ने अपनी 74 वर्षीय मां के खराब स्वास्थ्य और डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) का हवाला देते हुए मानवीय आधार पर राहत मांगी थी। हालांकि, तब अदालत ने कहा था कि रिकॉर्ड्स में ऐसी कोई 'जीवन को खतरे' वाली स्थिति नहीं दिखती, जिसमें आरोपी की तत्काल मौजूदगी ज़रूरी हो।क्या है पूरा मामला?
विनेश चंदेल को ED ने अप्रैल 2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान गिरफ्तार किया था। यह मामला पश्चिम बंगाल में कोयले के अवैध खनन और परिवहन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से संबंधित है। लेकिन आई-पैक टीएमसी का चुनाव प्रचार संभाल रही थी। इसलिए ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ने इसका विरोध किया था। छापे के दौरान ममता खुद आईपैक के दफ्तर में पहुंच गई थीं। जिसकी शिकायत ईडी ने अदालत में की थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि I-PAC को पश्चिम बंगाल कोयला खनन रैकेट से लगभग 20 करोड़ रुपये हवाला चैनलों के माध्यम से प्राप्त हुए थे। यह अपराध से की गई कमाई थी। विनेश चंदेल I-PAC में निदेशक हैं और कंपनी में उनकी 33% हिस्सेदारी है।ED का आरोप है कि कोयला तस्करी सिंडिकेट से जुड़े एक 'हवाला' ऑपरेटर ने I-PAC की पंजीकृत कंपनी (Indian PAC Consulting Private Limited) को करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए थे। मामला नवंबर 2020 में CBI द्वारा दर्ज की गई उस FIR से जुड़ा है, जिसमें आसनसोल के पास 'ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड' की खदानों से करोड़ों रुपये के कोयले की चोरी और तस्करी का आरोप लगाया गया था। ED की जांच में सामने आया है कि इस अवैध कारोबार से होने वाली कमाई का एक हिस्सा हवाला के जरिए I-PAC तक पहुँचाया गया था। हालांकि ये सिर्फ आरोप है। ईडी ने अभी न तो साबित कर पाया है और न ही अदालत ने विनेश चंदेल को कोई सज़ा सुनाई है।
टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी के राजनीतिक दुरुपयोग का आरोप मोदी सरकार पर लगाया था। अभिषेक ने एक्स पर लिखा था- बंगाल चुनावों से महज 10 दिन पहले आई-पीएसी के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी न केवल चिंताजनक है, बल्कि इसने निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांत को ही हिला दिया है। ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की ओर बढ़ना चाहिए, इस तरह की कार्रवाई एक भयावह संदेश देती है: यदि आप विपक्ष के साथ काम करते हैं, तो अगला नंबर आपका हो सकता है। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि डराना-धमकाना है!
टीएमसी नेता ने कहा- इसे और भी अनदेखा करना मुश्किल है क्योंकि यहाँ दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे लोगों को पाला बदलते ही संरक्षण मिल जाता है, जबकि अन्य लोगों को राजनीतिक रूप से सुविधाजनक समय पर निशाना बनाया जाता है। लोग अब इस बात से अनजान नहीं हैं। यहां पर अभिषेक का इशारा मुर्शिदाबाद के पूर्व विधायक हुमायूं कबीर की तरफ था। जिन पर दूसरी बाबरी मस्जिद मुर्शिदाबाद में बनवाने के नाम पर एक हजार करोड़ रुपये चंदा लेने का आरोप है। हाल ही एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसके ज़रिए आरोप लगाया था कि हुमायूं कबीर को मुसलमानों का वोट बांटने के लिए बीजेपी ने आगे किया था। हुमायूं कबीर ने फटाफट अपनी पार्टी बनाई। बड़े बड़े प्रोग्राम किए।
विपक्ष का सवाल
भाजपा को मनी लॉन्ड्रिंग जांच का सामना कर रही तमाम कंपनियों से चुनावी चंदा मिलने का आरोप टीएमसी और अन्य विपक्षी पार्टियों ने लगाया लेकिन ईडी ने कभी बीजेपी के किसी नेता या मंत्री पर छापा नहीं मारा। ईडी देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के खातों तक को सीज़ कर चुकी है। ईडी आम आदमी पार्टी के नेताओं पर कार्रवाई कर चुकी है। खुद बीजेपी शासित राज्यों के नेता, मुख्यमंत्रियों पर करप्शन के गंभीर आरोप हैं लेकिन किसी जांच एजेंसी ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की।
बहरहाल, विनेश चंदेल पर ईडी का ताजा रवैया राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि चंदेल की जमानत चुनाव खत्म होने के ठीक अगले दिन हुई है। चंदेल की गिरफ्तारी के समय विपक्ष ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया था।