देश में डिजिटल आजादी को लगातार कमजोर किया जा रहा है। सरकार ने अब यूट्यूब से कहकर 4PM न्यूज़ को बंद करने को कहा है। चैनल के संपादक का कहना है कि मोदी सरकार उनके चैनल से डर गई है।
भारत दुनिया के सबसे आक्रामक ऑनलाइन कंटेंट नियंत्रकों में से एक बन गया है। ताज़ा मामला यूट्यूब चैनल 4पीएम न्यूज़ का है। 4पीएम यूट्यूब चैनल ने गुरुवार 12 मार्च को कहा कि उसके चैनल को बंद करने का निर्देश भारत सरकार ने यूट्यूब को दिया है। यूट्यूब ने उन्हें सूचित किया है। एक्स पर चैनल के संपादक संजय शर्मा ने लिखा है कि आज 12 मार्च को सुबह यूट्यूब से मेल आया कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर हमारे चैनल को बंद करने का आदेश दिया है।
सवाल है कि क्या मोदी सरकार आलोचना की वजह से इस चैनल को बंद करने के लिए कहा गया है। चैनल के संपादक संजय शर्मा ने कहा कि यह पहली बार नहीं है। पिछले साल भी पहलगाम हमले के दौरान इसी आरोप की आड़ में हमारा चैनल बंद कराया गया था। लेकिन जैसे ही हमने सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर की। सरकार ने चुपचाप अपना आदेश वापस ले लिया।
मोदी प्रशासन ने गृह मंत्रालय के अधिकारियों को तेजी से सामग्री हटाने और ब्लॉक करने के आदेश देने की पावर दे दी है। यह प्रवृत्ति 2024 के बाद तेज हुई है। खासकर जम्मू-कश्मीर में पहलगाम आतंकी हमले और यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस जैसे घरेलू विवादों ने सरकारी आदेशों को बढ़ा दिया है। मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम) ने 2025 के पहले छह महीनों में 2023 की तुलना में तीन गुना अधिक टेकडाउन आदेशों का पालन किया। इसी तरह, गृह मंत्रालय (MHA) ने 2025 में ही 1.1 लाख से अधिक सामग्री को हटाने का लक्ष्य बनाया, जिसमें राजनीतिक दलों, पत्रकारों और अंतरराष्ट्रीय उपयोगकर्ताओं की पोस्ट शामिल हैं।
यह "अघोषित सेंसरशिप" अपारदर्शी तंत्रों के जरिए काम करती है, जिसमें न्यायिक निगरानी और सुरक्षा को दरकिनार किया जाता है। यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विपरीत है, जिसे केवल राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था जैसे उचित आधारों पर प्रतिबंधित किया जा सकता है। हालांकि, अदालती दस्तावेजों और प्लेटफॉर्म के खुलासों से पता चलता है कि व्यंग्यात्मक, आलोचनात्मक या जांच-पड़ताल वाली सामग्री को अधिकतर निशाना बनाया जा रहा है, जिससे राजनीतिक मंशा पर सवाल उठते हैं। द वायर ने कई व्यंग्यात्मक कॉर्टून और वीडियो बनाए, मोदी सरकार ने उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर से हटाने को बाध्य किया।
4पीएम का मामला क्या है
4PM न्यूज यूट्यूब चैनल के 73 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं। चैनल मोदी सरकार की आलोचना करने से परहेज़ नहीं करता है। 29 अप्रैल 2025 को, पहलगाम आतंकी हमले (जिसमें 26 लोग मारे गए) के बाद, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने चैनल को बंद करने का आदेश दिया, जिसमें "राष्ट्रीय सुरक्षा" और आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत "सार्वजनिक व्यवस्था" का हवाला दिया। संपादक संजय शर्मा ने यूट्यूब से मिले ईमेल की जानकारी दी, जिसमें सरकार ने आरोप लगाया कि चैनल "पाकिस्तान के नैरेटिव" को दोहरा रहा है और "उकसाने वाली, सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील" सामग्री प्रसारित कर रहा है, जो राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक है।
यह पहली घटना नहीं है। संजय शर्मा ने बताया कि 2024 में कश्मीर से संबंधित एक अन्य घटना के दौरान भी इसी आरोप में चैनल ब्लॉक किया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में रिट दाखिल करने के बाद सरकार ने चुपचाप आदेश वापस ले लिया। 2025 में, 13 मई को शर्मा की सुप्रीम कोर्ट याचिका के बाद आदेश वापस लिया गया, लेकिन अदालत ने आईटी ब्लॉकिंग नियमों की वैधता की जांच के लिए याचिका को जीवित रखा। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने बिना विशिष्ट कारण या सबूत दिए कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई और इसे प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन बताया।
4PM मामला एक पैटर्न का हिस्सा है
पहलगाम हमले के बाद सरकार ने 16 पाकिस्तान से जुड़े यूट्यूब चैनलों (जैसे Dawn News, Geo News) को ब्लॉक किया, जिसमें क्रिकेटर शाहिद अफरीदी और शोएब अख्तर के चैनल भी शामिल थे। घरेलू चैनलों जैसे बोलता हिंदुस्तान को 2024 चुनावों के दौरान स्वतंत्र रिपोर्टिंग के लिए निशाना बनाया गया। ये ब्लॉक राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर किए जाते हैं, लेकिन आलोचक इन्हें सरकार-विरोधी नैरेटिव को दबाने के रूप में देखते हैं।
मोदी सरकार किस तरह कंटेंट को कंट्रोल कर रही है
मोदी सरकार ने कंटेंट रेगुलेशन के लिए आईटी नियमों में संशोधन किया। आईटी नियमों को फरवरी 2026 में और सख्त किया गया, जिसमें "अवैध" सामग्री हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर मात्र 3 घंटे कर दी गई। इसे मेटा, यूट्यूब और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लागू किया। आलोचक इसे "ऑटोमैटिक सेंसरशिप" बता रहे हैं।
सहयोग पोर्टल: अक्टूबर 2024 में MHA द्वारा लॉन्च किया गया यह केंद्रीकृत पोर्टल आईटी एक्ट की धारा 79(3)(b) के तहत टेकडाउन नोटिस को संचालित करता है, जिसमें जिला-स्तरीय अधिकारियों और पुलिस को पावर दी गई है। 72 से अधिक प्लेटफॉर्म्स (व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, गूगल) इसमें शामिल हैं। लेकिन एक्स ने कर्नाटक हाईकोर्ट में सरकार पर मुकदमा किया है, इसे "सेंसरशिप पोर्टल" बताया। सितंबर 2025 में एकल जज बेंच ने इसकी वैधता बरकरार रखी, लेकिन एक्स की अपील पर मार्च 2026 में केंद्र को नोटिस जारी किया गया। 2025 में MHA के एक्स को दिए 30% नोटिस केंद्रीय मंत्रियों या एजेंसियों से संबंधित सामग्री पर थे। जिसमें गृह मंत्री अमित शाह के मैनिपुलेटेड वीडियो शामिल हैं।
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP) 2023
इस एक्ट के जरिए आपके व्यक्तिगत डेटा को सार्वजनिक हित में जांच की छूट दी गई है। लेकिन आरटीआई को लेकर नियम सख्त किए गए हैं। इससे अधिकारियों की संपत्ति घोषणा या भ्रष्टाचार रिकॉर्ड तक पहुंच सीमित हो गई है। इसमें पत्रकारों को भी कोई छूट नहीं है, जिससे मीडिया को डेटा जांच-पड़ताल में दिक्कत आती है। पत्रकारों का कहना है कि यह सामान्य डेटा प्रोसेसिंग को अपराध बनाता है, जिससे भारत वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 180 देशों में 151 स्थान पर पहुंच गया है।
स्वतंत्र पत्रकार लगातार EVM, सरकारी नीतियों या अल्पसंख्यकों पर रिपोर्टिंग, डेटा सस्पेंशन और कंटेंट टेकडाउन के सवाल उठा रहे हैं। मोदी या यूजीसी गाइडलाइंस पर आलोचनात्मक एक्स पोस्ट 2026 में रोके गए, जिसमें द वायर जैसे आउटलेट्स के व्यंग्य शामिल हैं। फ्रीडम हाउस की 2025 रिपोर्ट में कश्मीर हमलों के बाद आक्रामक कंटेंट ब्लॉकिंग का जिक्र है, जिसमें कश्मीरी आवाजों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया को निशाना बनाया गया।