ब्रिक्स के अध्यक्ष के नाते भारत की ज़िम्मेदारी क्या बनती है जब इसके सदस्य देश पर हमला हो रहा हो? इसका जवाब तो पिछले साल के घटनाक्रम से भी मिलता है। पिछले साल भी ईरान पर इसराइल और अमेरिका ने हमला किया था। तब ब्रिक्स की अध्यक्षता ब्राज़ील के पास थी और तब उसने साझा बयान जारी करवाया था और इसकी निंदा भी की गई थी। हालाँकि, कुछ देश इससे असहमत थे। इसी घटनाक्रम की याद दिलाते हुए कांग्रेस ने सोमवार को मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला।
कांग्रेस ने कहा कि भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, लेकिन ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमलों की सामूहिक निंदा नहीं कर रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने और इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अपने क़रीबी रिश्ते बनाए रखने की चाहत में ब्रिक्स+ की प्रतिष्ठा को कम कर रहे हैं।
कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उठाया। उन्होंने याद दिलाया कि 2025 में ब्राजील ब्रिक्स+ का अध्यक्ष था। उस समय जून 2025 में अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों पर 11 सदस्य देशों ने साझा बयान जारी किया था। इस बयान में हमलों की निंदा की गई थी।
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रमेश ने लिखा, 'भारत 2026 में ब्रिक्स+ की अध्यक्षता का दावा कर रहा है। लेकिन अब तक उसने अमेरिका-इसराइल द्वारा ईरान पर हवाई हमलों और चुनिंदा हत्याओं, साथ ही ईरान द्वारा जीसीसी देशों में गैर-सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमलों, और श्रीलंका व भारत के पास हिंद महासागर में अमेरिकी नौसेना की चौंकाने वाली कार्रवाई पर कोई सामूहिक बयान जारी करने की न तो इच्छा दिखाई है और न ही हिम्मत जुटाई है।' उन्होंने आगे कहा, 
ट्रंप को खुश करने और नेतन्याहू से अपने करीबी रिश्ते बनाए रखने की लालसा में मोदी जी ब्रिक्स+ अध्यक्षता के महत्व और प्रतिष्ठा को कम कर रहे हैं।
जयराम रमेश
कांग्रेस नेता

सरकार की चुप्पी पर सवाल

कांग्रेस ने पिछले हफ्ते भी सरकार की आलोचना की थी। पार्टी ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या पर सरकार की 'चुप्पी' को लेकर हमला बोला था। रमेश ने कहा था कि भारत ने ईरान के खाड़ी देशों पर हमलों की सही तरीके से निंदा की, लेकिन अमेरिका-इसराइल के ईरान पर पहले हमले पर पूरी तरह चुप रहा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 'कंप्रोमाइज्ड प्रधानमंत्री' अपने अमेरिकी और इसराइली दोस्तों को नाराज़ नहीं करना चाहता।

संसद में चर्चा की मांग

पार्टी ने संसद के दोनों सदनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत पर उसके असर पर चर्चा की मांग की है। लेकिन कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार इस बहस की अनुमति नहीं दे रही, क्योंकि वह 'डर' रही है। विपक्षी दल ने दावा किया कि सरकार की विदेश नीति उजागर हो गई है। पिछले सोमवार को कांग्रेस ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के पश्चिम एशिया पर बयान पर नाराजगी जताते हुए राज्यसभा से वॉकआउट किया और लोकसभा में विरोध प्रदर्शन किया था।
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ईरान की ब्रिक्स से अपील

इस बीच, ईरान ने भारत से अपील की है कि वह ब्रिक्स की तरफ़ से पिछले दो हफ्तों के अमेरिकी-इसराइली हमलों की निंदा करने वाला बयान जारी करे। दो दिन पहले ही सूत्रों के हवाले से ख़बर आई थी कि तेहरान ने दिल्ली से संपर्क किया है, क्योंकि भारत वर्तमान में ब्रिक्स का अध्यक्ष है। इससे भारत कूटनीतिक मुश्किल में फँस गया है, क्योंकि वह संघर्ष में किसी का पक्ष नहीं ले रहा।

पीएम मोदी ने की थी फोन पर बात

प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान द्वारा निशाना बनाए गए क्षेत्रीय देशों के नेताओं से पिछले हफ़्ते बात की। उन्होंने हमलों की निंदा की और भारतीय समुदाय की देखभाल के लिए धन्यवाद दिया। पिछले हफ्ते पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी फोन पर बात की थी। उन्होंने तनाव बढ़ने, नागरिकों की मौत और नागरिक ढांचे को नुकसान पर गहरी चिंता जताई। एक्स पर पोस्ट में पीएम मोदी ने 'संवाद और कूटनीति' की अपील की और भारत की शांति व स्थिरता के लिए प्रतिबद्धता दोहराई।

विदेश मंत्री की 4 बार बातें हुईं

विदेश मंत्री जयशंकर ने भी गुरुवार रात ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची से बात की। यह 28 फरवरी से दुश्मनी शुरू होने के बाद उनकी चौथी बातचीत थी। एक्स पर जयशंकर ने लिखा कि उन्होंने द्विपक्षीय मामलों और ब्रिक्स से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। अरागची ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मंचों से ईरान पर सैन्य हमले की निंदा की ज़रूरत बताई। उन्होंने ब्रिक्स को बहुपक्षीय सहयोग का अहम मंच बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में इसे क्षेत्र और दुनिया की स्थिरता के लिए सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
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ब्रिक्स में मूल रूप से पांच देश हैं- ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका। बाद में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हुए। सऊदी अरब और यूएई में अमेरिकी ठिकाने हैं और ईरान ने उन पर मिसाइल व ड्रोन हमले किए हैं। कहा जा रहा है कि तीनों देश ब्रिक्स में होने से भारत के लिए कूटनीति मुश्किल हो गई है।
भारत 2026 में रोटेशन के आधार पर ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाल रहा है और इस साल बाद में ब्रिक्स नेताओं का शिखर सम्मेलन आयोजित करेगा। यह विवाद पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की विदेश नीति पर सवाल उठा रहा है।