पश्चिम बंगाल में बुधवार को दूसरे चरण का मतदान ख़त्म होते ही एग्जिट पोल के नतीजे आने लगेंगे। शाम 6:30 बजे के बाद पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और असम के विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल जारी होंगे। तो क्या 4 मई की मतगणना से पहले ही एग्जिट पोल में नतीजे साफ़ हो जाएंगे? कम से कम पिछले सालों के अनुभव से ऐसा तो नहीं लगता। पिछले एक दशक से बंगाल के चुनावों में एग्जिट पोल्स कई बार ग़लत साबित हुए हैं। दरअसल, पूरे देश में हुए चुनावों के बाद आए एग्जिट पोल के नतीजे बार-बार ग़लत साबित हुए हैं।

2021 के एग्जिट पोल

राज्य में एग्ज़िट पोल के विफल होने का सबसे बड़ा उदाहरण 2021 का विधानसभा चुनाव है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बंगाल में 18 सीटें जीती थीं और वोट शेयर करीब 40 प्रतिशत पहुंच गया था। इसी के आधार पर ज्यादातर राष्ट्रीय एजेंसियों ने 2021 में कड़ी टक्कर या भाजपा की जीत का अनुमान लगाया। कुछ तो ममता बनर्जी की सरकार गिरने की भी बात कर रहे थे। लेकिन नतीजा कुछ और ही निकला। तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी ने 215 सीटों की भारी जीत हासिल की। भाजपा को सिर्फ 77 सीटें मिलीं। बाद में विश्लेषकों ने माना कि उन्होंने 'साइलेंट महिला वोटरों' और टीएमसी की ग्रामीण कल्याण योजनाओं, खासकर लक्ष्मीर भंडार जैसी स्कीमों को कम आंक लिया था।
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2016 में भी था ग़लत अनुमान

राज्य में 2016 के चुनाव में भी यही हुआ। ज्यादातर एग्जिट पोल्स ने टीएमसी की आसान जीत बताई, लेकिन किसी ने 211 सीटों की भारी जीत का अंदाजा नहीं लगाया था। उस समय वाम-कांग्रेस गठबंधन बुरी तरह टूट गया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी एग्जिट पोल्स ने भाजपा को 25-30 सीटें देने का अनुमान लगाया था। लेकिन टीएमसी ने 29 सीटें जीतकर एक बार फिर चौंकाया। इससे साफ़ है कि बंगाल में राष्ट्रीय लहर अक्सर स्थानीय मुद्दों और ममता बनर्जी के संदेश के आगे नहीं टिक पाती।

हरियाणा 2024: एग्जिट पोल बुरी तरह फेल

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में लगभग सभी एग्जिट पोल ने कांग्रेस की भारी जीत का अनुमान लगाया था। कई सर्वे एजेंसियों ने कहा कि कांग्रेस आराम से बहुमत हासिल कर लेगी और इसे 'कांग्रेस की लहर' बताया गया। लेकिन नतीजे बिल्कुल उलट निकले। 

2024 के हरियाणा चुनाव में भाजपा ने अपनी सरकार बचाई और कांग्रेस से आगे रही। सभी एजेंसियों का एक जैसा गलत अनुमान हाल के सालों का सबसे बड़ा एग्जिट पोल फेलियर बना गया।

लोकसभा चुनाव 2024: ‘400 पार’ का सपना टूटा

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कई एग्जिट पोल ने एनडीए के लिए भारी बहुमत और कुछ ने तो '400 पार' सीटें भी बता दी थीं। बाजार और राजनीतिक चर्चाएं इन आंकड़ों पर चल रही थीं। वास्तविक नतीजे बहुत अलग थे। एनडीए को 293 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा अकेले 240 सीटों पर सिमट गई। इंडिया गठबंधन को 235 सीटें मिलीं। ये हाल के सालों का सबसे चर्चित एग्जिट पोल फेलियर माना जा रहा है।

बिहार 2025: दिशा सही, मगर आँकड़े ग़लत

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में ज़्यादातर एग्जिट पोल ने एनडीए की जीत बताई थी, लेकिन उन्होंने जीत का आकार बहुत छोटा बताया था। नतीजों में एनडीए ने 200 सीटों का आंकड़ा पार कर लिया। यहां तक कि सबसे भरोसेमंद मानी जाने वाली एजेंसी Axis My India भी भाजपा गठबंधन की भारी जीत को नहीं समझ पाई। इसने दिखाया कि वोट शेयर से सीटों में बदलाव का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है।
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छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश 2023

छत्तीसगढ़ चुनाव 2023 में ज्यादातर एग्जिट पोल ने कांग्रेस की आसान जीत बताई थी। लेकिन बीजेपी ने वापसी करते हुए 50 से ज्यादा सीटों के अंतर से सरकार बनाई। मध्य प्रदेश में भी सिर्फ कुछ एजेंसियां ही भाजपा की बड़ी जीत का सही अंदाजा लगा पाईं। दोनों राज्यों ने साबित किया कि क्षेत्रीय मुद्दे और स्थानीय भावनाओं को पोलिंग मॉडल अक्सर नहीं पकड़ पाते।

उत्तर प्रदेश 2017

2017 के उत्तर प्रदेश चुनाव में एग्जिट पोल ने कहा था कि विधानसभा त्रिशंकु हो सकती है और भाजपा सबसे बड़ी पार्टी तो बनेगी, लेकिन बहुमत नहीं मिलेगा। लेकिन भाजपा ने 325 सीटों का भारी बहुमत हासिल कर एकतरफा जीत दर्ज की। ये हाल के दशकों की सबसे बड़ी चुनावी लहरों में से एक थी, जिसे एग्जिट पोल देख ही नहीं पाए।

बिहार 2015: कांटे का मुकाबला था

2015 बिहार चुनाव में एग्जिट पोल ने एनडीए और महागठबंधन के बीच कड़ी टक्कर बताई थी। किसी को साफ जीत नहीं दिख रही थी। लेकिन नतीजे आए तो आरजेडी-जदयू-कांग्रेस गठबंधन ने साफ बहुमत हासिल किया और आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनी। जाति समीकरण और गठबंधन की ताकत को पोलिंग एजेंसियां कम आंक रही थीं।
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दिल्ली 2015: जीत का अंतर सही नहीं

दिल्ली 2015 में एग्जिट पोल ने आम आदमी पार्टी की जीत तो बता दी थी, लेकिन उसकी भारी जीत का अंदाजा नहीं लगा पाए। आप को 70 में से 67 सीटें मिलीं। ये दिल्ली के इतिहास की सबसे एकतरफा जीतों में से एक थी।

लोकसभा 2004: सबसे बड़ा उलटफेर

2004 का लोकसभा चुनाव एग्जिट पोल फेलियर का सबसे क्लासिक उदाहरण है। 'इंडिया शाइनिंग' के नारे के बीच सभी एग्जिट पोल ने एनडीए की आसान जीत बता दी थी। नतीजे उलट निकले। एनडीए सिर्फ 187 सीटों पर सिमट गया और कांग्रेस गठबंधन ने सरकार बनाई।

अब 2026 में क्या नया है?

इस बार चुनाव थोड़ा अलग है। टीएमसी 15 साल से सत्ता में है, इसलिए एंटी इंकंबेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर का बोझ उसके ऊपर है। भाजपा ने इस बार रणनीति बदली है। राष्ट्रीय मुद्दों के बजाय डबल इंजन सरकार और औद्योगीकरण पर जोर दे रही है, ताकि टीएमसी की प्रत्यक्ष लाभ वाली योजनाओं का मुकाबला किया जा सके। 

2026 के बंगाल चुनाव के पहले चरण में मतदान प्रतिशत बहुत ऊंचा रहा। करीब 93 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाला, जो स्वतंत्रता के बाद का रिकॉर्ड है। इससे लगता है कि मतदाता काफी उत्साहित हैं।

लेकिन चुनाव में विवाद भी रहा। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के तहत वोटर लिस्ट से करीब 90-91 लाख नाम कट गए, जो कुल मतदाताओं का लगभग 12 प्रतिशत है। भाजपा इसे वोटर लिस्ट साफ करने का जरूरी कदम बता रही है, जबकि टीएमसी इसे लोकतंत्र पर हमला कह रही है।

एग्जिट पोल्स कितने भरोसेमंद?

एग्जिट पोल्स मतदान के बाद मतदाताओं से राय लेकर बनाए जाते हैं। ये सीटों की संख्या, वोट शेयर और क्षेत्रीय रुझान बताते हैं। लेकिन इनकी सटीकता कई बातों पर निर्भर करती है- जैसे सैंपल का साइज, तरीका और बंगाल जैसी जगहों पर मतदाताओं की चुप्पी। बंगाल में कई बार 50-60 प्रतिशत मतदाता अपनी पसंद नहीं बताते, जिससे सर्वे मुश्किल हो जाते हैं। इसलिए एग्जिट पोल्स सिर्फ संकेत देते हैं, अंतिम फैसला नहीं। आधिकारिक मतगणना 4 मई 2026 को होगी। उसी दिन नतीजे घोषित किए जाएंगे।