हरियाणा सरकार ने सोमवार 16 मार्च को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अली खान महमूदबाद के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट के लिए मुकदमे की मंजूरी देने से मना कर दिया है।
प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद
हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि वह अशोका यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर और पॉलिटिकल साइंस विभाग के प्रमुख डॉ. अली खान महमूदाबाद के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं देगी। यह निर्णय "एक बार की उदारता" (one-time magnanimity) दिखाते हुए लिया गया है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मामला बंद कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल थे, ने हरियाणा सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू की दलील को दर्ज करते हुए ट्रायल कोर्ट में लंबित कार्यवाही को बंद करने का आदेश दिया। राजू ने कोर्ट को बताया, "एक बार की उदारता दिखाते हुए हमने इस मुद्दे को बंद कर दिया है और मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया है।"
मई 2025 में भारत ने पाकिस्तान में कई आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। इसे 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया गया था। यह ऑपरेशन अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 पर्यटकों की पाकिस्तान प्रशिक्षित आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। इस सैन्य कार्रवाई पर अली खान महमूदाबाद ने सोशल मीडिया (फेसबुक) पर पोस्ट किया था, जिसे लेकर हरियाणा पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज कीं। बीजेपी और हिन्दू संगठनों ने प्रोफेसर के ट्वीट को देशविरोधी करार दिया और प्रदर्शन किए थे। हालांकि उनका ट्वीट सरकार और देश के खिलाफ नहीं था।
प्रोफेसर खान की पोस्ट्स को देश की संप्रभुता और अखंडता को खतरे में डालने वाला, सार्वजनिक उपद्रव फैलाने वाला, महिलाओं की मर्यादा का अपमान करने वाला और विभिन्न समूहों के बीच धर्म के आधार पर दुश्मनी बढ़ाने वाला बताया गया। उनके ऊपर बीएनएस की धारा 152 (देश की संप्रभुता या एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य), धारा 353 (सार्वजनिक उपद्रव के लिए बयान), धारा 79 (महिला की मर्यादा का अपमान करने वाले कृत्य) और धारा 196 (1) (धर्म के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ाना) के तहत दो एफआईआर की गई थी।
प्रोफेसर महमूदाबाद को 18 मई 2025 को गिरफ्तार किया गया था। शिकायत हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया और एक गांव के सरपंच द्वारा दर्ज कराई गई थी। दोनों एफआईआर सोनीपत जिले के राई पुलिस स्टेशन में दर्ज हुईं। हरियाणा पुलिस की एसआईटी ने अगस्त 2025 में चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन मंजूरी लंबित थी।
महमूदाबाद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जनवरी 2026 में कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को चार्जशीट पर संज्ञान लेने से रोका था और हरियाणा सरकार को उदारता दिखाने का सुझाव दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अगर राज्य मंजूरी नहीं देता तो मामला बंद हो सकता है। आज (16 मार्च 2026) हरियाणा सरकार ने यही सूचना सुप्रीम कोर्ट को दी।
प्रोफेसर की गिरफ्तारी पर कई राजनीतिक दलों और शिक्षाविदों ने सरकार की आलोचना की थी, इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया था। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाही बंद कर दी है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि प्रोफेसर को चेतावनी दी जा सकती है कि भविष्य में ऐसा दोहराया न जाए। मामला अब समाप्त माना जा रहा है।