ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर राहुल गांधी ने बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने आख़िर इसे प्रकृति और आदिवासियों के खिलाफ अपराध क्यों बताया?
ग्रेट निकोबार में राहुल गांधी।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को केंद्र सरकार के सबसे महत्वाकांक्षी 81 हज़ार करोड़ रुपये के ग्रेट निकोबार इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने इसे देश की प्राकृतिक धरोहर और आदिवासी संस्कृति के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा घोटाला और गंभीर अपराध' बताया। राहुल गांधी इन दिनों अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार द्वीप का दौरा कर रहे हैं। वहां जंगलों में पहुंचकर उन्होंने कहा कि सरकार इसे 'प्रोजेक्ट' कह रही है, लेकिन जो कुछ वह देख रहे हैं, वह विकास नहीं, बल्कि 'विनाश है जो विकास के कपड़े पहने हुए है'।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, 'सरकार इसे प्रोजेक्ट कह रही है। मैंने जो देखा है, वह प्रोजेक्ट नहीं है। ये लाखों पेड़ हैं जिन पर कुल्हाड़ी चलने वाली है। यह 160 वर्ग किलोमीटर का वर्षावन है जिसे तबाह होने के लिए छोड़ दिया गया है। ये वे समुदाय हैं जिनके घर छीन लिए गए हैं और उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।'
उन्होंने ग्रेट निकोबार के जंगलों में खड़े होकर कहा, 'ये पेड़ इतने पुराने हैं कि इनकी उम्र याद से भी ज्यादा है। पीढ़ियों से पनपे ये खूबसूरत जंगल और यहां रहने वाले सुंदर लोगों से उनका हक छीना जा रहा है।' राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह पूरा प्रोजेक्ट अडानी ग्रुप के मालिक गौतम अडानी के फायदे के लिए चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा, '160 वर्ग किलोमीटर का यह जंगल सिर्फ इसलिए काटा जा रहा है ताकि एक कारोबारी श्री अडानी अपनी कल्पनाओं को पूरा कर सकें। यहाँ सिर्फ लकड़ी का मूल्य लाखों करोड़ रुपये है। यह शायद देश की सबसे बड़ी लूट और पर्यावरणीय संपत्ति की चोरी है।'
प्रोजेक्ट क्या है?
ग्रेट निकोबार द्वीप अंडमान सागर में स्थित है। सरकार यहां अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल यानी जहाजों का माल उतारने-चढ़ाने का बड़ा बंदरगाह, नई बस्ती, पावर प्लांट और ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने की योजना बना रही है। इस प्रोजेक्ट से 130 से 160 वर्ग किलोमीटर का घना वर्षावन यानी रेनफॉरेस्ट काटा जाएगा। इसके साथ ही कोरल रीफ यानी मूंगा चट्टानें और समुद्री कछुओं के अंडे देने वाले इलाक़ों को भी नुक़सान पहुँचेगा। सरकार का कहना है कि यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा के लिहाज से बेहद ज़रूरी है। यह मलक्का स्ट्रेट के पास होने के कारण रणनीतिक रूप से अहम है। लेकिन राहुल इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं।
कांग्रेस का विरोध
राहुल गांधी से पहले सोनिया गांधी भी इस प्रोजेक्ट का विरोध कर चुकी हैं। उन्होंने इसे 'आदिवासियों को उजाड़ने वाली योजना' बताया था। कांग्रेस ने इसे 'अधूरा और गलत सोच वाला' प्रोजेक्ट करार दिया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, 'व्यावसायिक दृष्टि से ही देखें तो यह प्रोजेक्ट टिकाऊ नहीं लगता। पर्यावरण के लिहाज से तो यह आपदा की रेसिपी है।'
निकोबार के लोगों की चिंता
राहुल गांधी ने 28 अप्रैल को कैंपबेल बे के राजीव नगर में निकोबरी समुदाय के नेताओं से मुलाक़ात की। स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि उन्हें इस प्रोजेक्ट के बारे में पहले से कुछ नहीं बताया गया। उन्हें अपनी जमीन के बदले कितना मुआवजा मिलेगा, यह भी नहीं पता। राहुल गांधी ने कहा कि द्वीप पर रहने वाला हर व्यक्ति इस प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ है। उन्होंने दावा किया कि सरकार यह सब छुपाकर कर रही है।
यात्रा पर पाबंदी का आरोप
राहुल गांधी के दौरे के दौरान 28 अप्रैल से 1 मई तक निकोबार द्वीप समूह के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएँ रोक दी गई थीं। कांग्रेस ने इसे राहुल गांधी को द्वीप पहुँचने से रोकने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा, 'अब मुझे समझ आया कि सरकार मुझे यहां आने से क्यों रोकना चाहती थी।' उन्होंने कहा कि यहां के आदिवासी, स्थानीय लोग और यहाँ तक कि रक्षा बलों के सैनिक भी उनसे संसद में इस मुद्दे को उठाने के लिए कह रहे हैं।योजना का समर्थन या विरोध क्यों?
विरोध करने वाले कह रहे हैं कि यह पर्यावरणीय आपदा है। लाखों पेड़ कटेंगे, जैव विविधता नष्ट होगी और आदिवासी समुदाय बेघर हो जाएंगे। इधर, इस योजना के समर्थक कह रहे हैं कि यह प्रोजेक्ट व्यापार बढ़ाएगा, रोजगार पैदा करेगा और भारत की समुद्री शक्ति को मजबूत करेगा। रणनीतिक रूप से चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने में मदद करेगा।
राहुल गांधी ने आखिर में कहा, 'यह प्रोजेक्ट रोका जाना चाहिए। अगर भारतीय लोग वह देख पाएं जो मैंने देखा है तो इसे रोका जा सकता है।' उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को संसद में उठाएँगे। सरकार और विपक्ष के बीच इस बड़े प्रोजेक्ट को लेकर तीखी बहस होने की संभावना है।