राम मंदिर ग़बन मामला एक संगठित अपराध जैसा सामने आ रहा है। आरोपी अविनाश शुक्ला जिस योग केंद्र में नौकरी करता था, वहां से बरामद रामराज्य कोष लिखा संदूक का बरामद होना यही बता रहा है।
राम राज्य कोष और आरोपी अविनाश शुक्ला
अयोध्या के राम मंदिर चोरी मामले में शक की सुई आरोपी अविनाश शुक्ला पर जाकर ठहर गई है। मामले के मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला (जो जेल में बंद है) के ठिकानों पर पुलिसिया कार्रवाई तेज हो गई है। पुलिस ने उस योग केंद्र पर छापेमारी की जहां अविनाश शुक्ला रहता था। तलाशी के दौरान पुलिस ने योग केंद्र से एक संदूक बरामद किया है, जिस पर "रामराज्य कोष" लिखा हुआ है। इसमें कितनी नकदी मिली है, पुलिस ने जानकारी नहीं दी है।
इस संदूक पर एक PayTm QR कोड भी छपा हुआ मिला है। पुलिस अब इस QR कोड से जुड़े बैंक खातों और इसके जरिए हुए सभी डिजिटल ट्रांजैक्शन की हिस्ट्री खंगाल रही है, ताकि अवैध रूप से जुटाए गए चंदे के मुख्य स्रोत का पता लगाया जा सके। पुलिस उस मास्टरमाइंड तक पहुंचना चाहती है, जिसके कहने पर रामराज्य कोष बनाया गया।
आरोपी अविनाश शुक्ला का बैकग्राउंड और नौकरी का रहस्य
अविनाश शुक्ला के इतिहास को लेकर कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जो इस पूरी साजिश की गहराई को दर्शाती हैं: अविनाश मूल रूप से किसी दूसरे जिले का रहने वाला है। करीब डेढ़ साल पहले वह इस क्षेत्र में आया और इस योग केंद्र में पनाह ली। योग केंद्र में रहने के दौरान ही उसने योजनाबद्ध तरीके से राम मंदिर में नौकरी हासिल की। जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगा रही हैं कि एक बाहरी व्यक्ति को इतनी आसानी से मंदिर परिसर और चंदा प्रबंधन से जुड़ी नौकरी दिलाने में किन लोगों ने पैरवी की थी।शुक्ला उन आरोपियों में शामिल है जिसे राम मंदिर में कैश गिनने के काम पर लगाया गया था। एसबीआई ने जब अविनाश शुक्ला समेत सभी 8 लोगों को हटाना चाहा तो राम मंदिर ट्रस्ट ने इन 8 लोगों को नहीं हटाने के लिए दबाव बनाया। अविनाश शुक्ला ही वो आरोपी है जिसके घर से 80 लाख रुपये बरामद किए गए।
सरकारी कार्रवाई: SIT जांच की समय-सीमा बढ़ी
मामले की गंभीरता और इसमें शामिल बड़े नेटवर्क को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पूरे घोटाले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) को और समय दे दिया है। SIT को अब अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए 15 जुलाई तक का समय दिया गया है। माना जा रहा है कि इस बढ़ी हुई अवधि में SIT वित्तीय हेरफेर और डिजिटल फॉरेंसिक साक्ष्यों को और मजबूत करेगी।70 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस
अयोध्या पुलिस ने चढ़ावे के प्रबंधन (Management), दान की निगरानी व्यवस्था (Surveillance), कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया और बैंकिंग सिस्टम से जुड़े 70 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है। इस नोटिस के जरिए उन सभी लोगों को जांच के दायरे में लाया गया है जिनकी जिम्मेदारी दान के पैसों की गिनती करने, उसे बैंक में जमा करने या सुरक्षा व्यवस्था को देखने की थी। पुलिस यह पता लगा रही है कि इतने लंबे समय तक इतनी बड़ी हेराफेरी बिना किसी आंतरिक मिलीभगत या बड़ी लापरवाही के कैसे चलती रही।
राम मंदिर ट्रस्ट की भूमिका और वर्तमान कानूनी स्थिति
इस पूरे विवाद में राम मंदिर ट्रस्ट की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, लेकिन कानूनी कार्रवाई के मोर्चे पर स्थिति इस प्रकार है:
- पदाधिकारियों पर कोई FIR नहीं: इस संवेदनशील मामले में अभी तक राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े किसी भी बड़े पदाधिकारी या सदस्य के खिलाफ कोई आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है।
- आरोपी सूची से बाहर: वर्तमान में ट्रस्ट के किसी भी सदस्य को इस मामले में नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है।
- घूमती शक की सुई: भले ही कागजी तौर पर ट्रस्ट के अधिकारी सुरक्षित दिख रहे हों, लेकिन जांच का दायरा और शक की सुई सीधे तौर पर प्रबंधन से जुड़े लोगों की तरफ घूम रही है। बिना किसी आंतरिक मिलीभगत या ढिलाई के इतने बड़े स्तर पर चंदे की हेराफेरी संभव नहीं मानी जा रही है।
'रामराज्य कोष' वाले संदूक और QR कोड की बरामदगी ने इस चोरी को एक संगठित वित्तीय अपराध के रूप में स्थापित कर दिया है। 15 जुलाई को आने वाली SIT की रिपोर्ट इस मामले में निर्णायक साबित होगी, जिससे यह साफ हो जाएगा कि शक के घेरे में आए ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर शिकंजा कसेगा या नहीं।
केजरीवाल ने राम मंदिर चोरी मामले में लगाए आरोप
आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल ने बुधवार को इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को घेरा। केजरीवाल ने कहा- "राम मंदिर बनने के बाद से गृह मंत्री श्री अमित शाह जी एक बार भी राम मंदिर में भगवान श्री राम के चरणों में नमन करने नहीं गए हैं। इन ढाई सालों में अमित शाह जी एक बार भी राम मंदिर नहीं गए। कुछ दिन पहले मुझे कुछ लोगों ने यह बात बताई। मुझे यकीन नहीं हुआ। मैंने कहा कि जो लोग भगवान राम के नाम का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं, वे मंदिर बनने के बाद से भगवान राम का आशीर्वाद लेने राम मंदिर नहीं गए? मैंने कहा, ऐसा कैसे हो सकता है?... इन 891 दिनों में उन्होंने अपने भाषणों और इंटरव्यू में 42 से ज़्यादा बार राम मंदिर का ज़िक्र किया है।"