क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की रिहाई के बावजूद लद्दाख में विरोध-प्रदर्शन नहीं रुकेगा। लद्दाख के लोग सोमवार यानी 16 मार्च को बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन करने वाले हैं। वे केंद्र सरकार से लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की रिहाई हो गई है, लेकिन प्रदर्शन को रद्द नहीं किया जाएगा। यह बात लद्दाख की सिविल सोसाइटी ग्रुप्स ने साफ़ कर दी है।

सोनम वांगचुक की रिहाई

केंद्र सरकार ने शनिवार को सोनम वांगचुक की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत हिरासत ख़त्म कर दी है। वह सितंबर 2025 से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। क़रीब 6 महीने जेल में रहने के बाद उन्हें रिहा किया गया। गृह मंत्रालय ने कहा कि यह फ़ैसला शांति और बातचीत का माहौल बनाने के लिए लिया गया है। अब वे जेल से बाहर हैं और परिवार के साथ हैं।

प्रदर्शन क्यों नहीं रुकेगा?

लेह एपेक्स बॉडी यानी एलएबी और करगिल डेमोक्रेटिक एलायंस यानी केडीए ने 10 मार्च को 16 मार्च के लिए प्रदर्शन का ऐलान किया था। इन ग्रुप्स का कहना है कि सोनम वांगचुक की रिहाई एक मुद्दा था, लेकिन मुख्य मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। एलएबी के को-कन्वीनर चेरिंग डोरजे लक्रुक ने कहा, 'सोनम वांगचुक की रिहाई हमारी कई मांगों में से एक थी। लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा और विकास की मांगें अभी बाक़ी हैं। दो अन्य एक्टिविस्ट सितंबर 2025 से जेल में हैं। इसलिए प्रदर्शन 16 मार्च को होगा।'
केडीए के सज्जाद करगिली ने बताया कि करगिल में करीब 1000 लोग जमा होंगे। उन्होंने एनएसए हटाने का स्वागत किया, लेकिन कहा कि संघर्ष जारी रहेगा। वे पूर्व कांग्रेस विधायक डेल्डन नामग्याल और स्मानला डोरजे की तुरंत रिहाई की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही 24 सितंबर को गिरफ्तार लोगों पर से सभी आरोप हटाने की अपील की है।

लद्दाख के लोगों की मांगें क्या हैं?

  • लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले।
  • संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए, ताकि आदिवासी क्षेत्रों की सुरक्षा मिले।
  • लेह और करगिल दोनों के लिए अलग-अलग परिषद हों।
  • सरकारी नौकरियों की खाली जगहें भरी जाएं।

केंद्र के साथ बातचीत कहाँ पहुँची?

लद्दाख के लोगों की मांगों पर बात करने और उनके मुद्दे सुलझाने के लिए गठित हाई पावर कमिटी यानी एचपीची की बैठकें हो रही हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। आखिरी बैठक 4 फरवरी को हुई थी। सितंबर 2025 में लेह में हिंसा हुई थी, जिसमें पुलिस फायरिंग से 4 लोग मारे गए थे। इनमें एक करगिल युद्ध का वेटरन भी था। केंद्र ने आर्टिकल 371 के तहत सुरक्षा देने की बात कही है और हिल काउंसिल को मज़बूत करने पर जोर दिया है। लेकिन प्रदर्शनकारी इससे संतुष्ट नहीं हैं।

सरकार की तरफ़ से क़दम

लोगों के गु़स्से के बीच 13 मार्च को लद्दाख के मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख ने पुलिस में 365 कांस्टेबल और 35 सब-इंस्पेक्टर की भर्ती का ऐलान किया। यह अप्रैल से शुरू होगी।

विपक्षी दलों ने केंद्र को कोसा

  • आप के अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मोदी सरकार एक्सपोज हो गई है। एक वैज्ञानिक और क्लाइमेट एक्टिविस्ट को बिना सबूत जेल में डाला गया। उनको जेल में रहना देश का नुक़सान है।
  • समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी ने राज्य के दर्जे का वादा किया था, फिर पीछे हट गई। वांगचुक को जेल नहीं डालना चाहिए था।
  • जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं करना चाहिए था।
  • कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार को लद्दाख के लोगों से माफी मांगनी चाहिए। सभी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को रिहा करें।
  • राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने एनएसए के इस्तेमाल पर सवाल उठाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा बीजेपी के फायदे-नुकसान पर निर्भर है क्या?

2019 से बढ़ी नाराज़गी

2019 में आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर से अलग होकर लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश बना। 2020 से ही लोग संवैधानिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। सितंबर 2025 की हिंसा के बाद हालात तनावपूर्ण हैं। अब 16 मार्च का प्रदर्शन अहम है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि केंद्र जल्द बातचीत से समाधान निकाले। यह स्थिति लद्दाख की जनता के अधिकारों और विकास से जुड़ी है।