ग़ाज़ियाबाद में पत्रकार विक्रम जोशी की हत्या के बाद सरकार और पुलिस पर उठ रहे सवाल। दस लाख रुपए मुआवज़े और पत्नी को नौकरी का एलान। लेकिन हत्या के बाद मुआवज़ा ही हर समस्या का अंत है। जान बचाने में नाकाम क्यों है सरकार?
लेखक सीएनबीसी आवाज़ के पूर्व संपादक हैं, आर्थिक मामलाों के विशेषज्ञ हैं और समसामयिक विषयों पर लिखते रहते हैं।

























