पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में चुनाव के दौरान पक्षपातपूर्ण व्यवहार और धमकियों के आरोपों के मद्देनजर, आईपीएस अजय पाल शर्मा को पर्यवेक्षक के पद से फौरन हटाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच एक खास खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट में आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना जिले से पुलिस ऑब्जर्वर के पद से 'तुरंत' हटाने की मांग वाली याचिका दायर की गई है। याचिका में उन्हें 'अत्यधिक पक्षपाती' और अपनी तय भूमिका के उलट काम करने वाला बताया गया है।
याचिका में शर्मा पर पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में पदभार संभालने के बाद "धमकी, अनुचित प्रभाव और पक्षपाती व्यवहार" करने के आरोप लगाए गए हैं। इनमें राजनीतिक उम्मीदवारों को दी गई धमकियां भी शामिल हैं। याचिका में कहा गया है कि शर्मा अपने रोल के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं।
अजयपाल शर्मा कौन है
अजय पाल शर्मा 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। संभल और रामपुर में भी उनकी चुनाव ड्यूटी रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस बारे में एक्स पर ट्वीट कर इस अधिकारी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उत्तर प्रदेश में अपनी विभिन्न पोस्टिंग के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुरक्षा अभियानों में भूमिका निभाई, जिसके चलते उन्हें 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' और 'सिंघम' (दुर्दांत) का खिताब मिला। हालांकि काफी मामले विवादित भी हैं। चुनाव आयोग ने उन्हें पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण के मतदान के लिए 95 ऑब्जर्वरों में से एक के रूप में तैनात किया है। बुधवार को दूसरे चरण का मतदान हो रहा है, 4 मई को नतीजे आएंगे। ऐसे में 4 मई के बाद अजयपाल शर्मा की भूमिका बंगाल चुनाव में खत्म हो जाएगी। क्योंकि तब तक सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर कोई आदेश आना मुश्किल है। हां, अगर सुप्रीम कोर्ट बुधवार को ही सुनवाई करके कोई आदेश जारी कर दे तो अलग बात है।
शर्मा की तैनाती से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भाजपा के बीच बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा और चुनाव आयोग का कहना है कि शर्मा को राज्य में "स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान" सुनिश्चित करने के लिए भेजा गया है। वहीं टीएमसी और समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा मतदाताओं को डराने-धमकाने के लिए "एजेंट" तैनात कर रही है। चुनाव आयोग को विपक्ष पहले ही बीजेपी का एजेंट घोषित कर चुका है।
दक्षिण 24 परगना जिले के फल्टा में मंगलवार को टीएमसी समर्थकों ने शर्मा के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने शर्मा पर पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को "धमकाने" का आरोप लगाया। स्थानीय टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के आवास और चुनाव कार्यालय के बाहर 'जय बंगला' के नारे लगाए गए।
चुनाव आयोग को रिपोर्ट मिली कि जहांगीर खान के लोग कथित तौर पर मतदाताओं से वोटर आईडी कार्ड छीन रहे हैं और उन्हें धमका रहे हैं। इसके बाद शर्मा सोमवार देर रात जहांगीर खान के घर पहुंचे और साफ कहा कि उम्मीदवार या उनके सहयोगी मतदाताओं को डराने-धमकाने की कोशिश करेंगे तो "सख्त और तुरंत कार्रवाई" की जाएगी। टीएमसी के वरिष्ठ नेता और मंत्री आरोप लगा रहे हैं कि शर्मा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जा रहे हैं। शर्मा के कुछ वीडियो भी वायरल हुए, जिसमें वो लोगों को डांटते नज़र आ रहे हैं। लेकिन इन वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं की जा सकती। कई बार राजनीतिक दल फर्जी वीडियो भी जारी कर देते हैं।
पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 142 सीटों पर बुधवार को हो रहा है। इस बीच कई संवेदनशील मुद्दे सामने आ रहे हैं। चुनाव आयोग ने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए विशेष पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। लेकिन वे आरोपों से घिर गए हैं। शर्मा की तैनाती को लेकर पहले भी विवाद हुआ था। यह याचिका बंगाल चुनाव की गरमागरम राजनीति को और तीखा बनाने वाली है। सुप्रीम कोर्ट अब इस पर क्या फैसला लेता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।