टीएमसी को बगावत से राजनीतिक झटका लगने के बाद अब उसके पैसे पर रोक लग गई है। ईडी ने कहा है कि 3 साल में टीएमसी के खातों से उस कंपनी को क़रीब 160 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए जिसपर एजेंसी ने हाल में PMLA मामले में छापे मारे थे।
ममता बनर्जी की टीएमसी को बगावत वाले राजनीतिक झटके के बाद अब ईडी से आर्थिक चोट पहुँची है। ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत पार्टी के तीन बैंक खातों में जमा क़रीब 440.42 करोड़ रुपये को फ्रीज कर दिया है। एजेंसी का दावा है कि पार्टी के खातों से बड़ी मात्रा में संदिग्ध वित्तीय लेन-देन हुए हैं, जिनकी जांच धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए के तहत की जा रही है। यह कार्रवाई तब हुई है जब पार्टी पहले से ही आंतरिक खींचतान और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। यह कार्रवाई उस एजेंसी की है जिस पर विपक्ष केंद्र के इशारे पर कार्रवाई करने का आरोप लगाती रही है और सुप्रीम कोर्ट तक ने एजेंसी को कई बार कटघरे में खड़ा कर दिया है।
तीन बैंक खातों पर क्यों कार्रवाई?
ईडी ने बुधवार को जारी बयान में बताया कि उसने पीएमएलए की धारा 17(1ए) के तहत तृणमूल कांग्रेस के एचडीएफसी बैंक में मौजूद तीन खातों को फ्रीज कर दिया है। इन खातों में कुल 440.42 करोड़ रुपये जमा थे। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान इन खातों से हुए कई लेन-देन संदिग्ध पाए गए हैं, इसलिए फिलहाल इन खातों से पैसे निकालने पर रोक लगा दी गई है।
पांच जगहों पर छापेमारी के बाद कार्रवाई
टीएमसी के बैंक खातों पर इस कार्रवाई से पहले ईडी ने कोलकाता और उसके आसपास पांच ठिकानों पर छापेमारी की थी। ये सभी स्थान केयरवेल ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़े बताए गए हैं, जो विमानन क्षेत्र में काम करती है। ईडी का आरोप है कि जांच के दौरान कंपनी और तृणमूल कांग्रेस के बीच बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन के सबूत मिले हैं।
जाँच एजेंसी के मुताबिक़ अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से क़रीब 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी एक अन्य कंपनी को भेजे गए। ईडी का कहना है कि इसके बाद इस राशि का बड़ा हिस्सा दूसरी नई कंपनी के ज़रिए आगे भेजा गया।
विमान और हेलीकॉप्टर खरीदने का आरोप
ईडी ने कहा है कि शुरुआती जाँच में पता चला कि 82.96 करोड़ रुपये एक नई कंपनी के खाते में भेजे गए जहाँ से एम्ब्रेयर लिगेसी 600 विमान और अगस्ता 109 ग्रैंड न्यू हेलीकॉप्टर खरीदे गए। एजेंसी का दावा है कि इन दोनों की खरीद पर कुल 112 करोड़ रुपये खर्च किए गए।ईडी ने यह भी कहा कि हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए केमैन आइलैंड्स स्थित एक कंपनी से 17 लाख अमेरिकी डॉलर का अनसिक्योर्ड लोन लिया गया था। अब एजेंसी यह जांच कर रही है कि यह विदेशी धन कहां से आया, क्या नियमों का पालन किया गया था और कहीं विदेशी फंडिंग से जुड़े कानूनों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
खरीदे गए विमान फिर TMC को ही किराए पर दिए गए
ईडी का दावा है कि जिन पैसों से विमान और हेलीकॉप्टर खरीदे गए वे बाद में तृणमूल कांग्रेस को ही किराए पर उपलब्ध कराए गए। एजेंसी के अनुसार, इसके बाद विमान और हेलीकॉप्टर के उपयोग के नाम पर फिर से पार्टी के खातों से बड़ी रकम का भुगतान किया गया। ईडी का कहना है कि यह पूरा वित्तीय ढांचा बेहद संदिग्ध लगता है और इससे वास्तविक लाभार्थियों तथा धन के इस्तेमाल को छिपाने की कोशिश की गई हो सकती है।
मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच जारी
ईडी फिलहाल कई पहलुओं की जांच कर रहा है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि धन का मूल स्रोत क्या था, पार्टी फंड का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया, विदेशी फंडिंग वैध थी या नहीं और विभिन्न कंपनियों के बीच हुए लेन-देन का वास्तविक उद्देश्य क्या था? एजेंसी का कहना है कि जांच के आधार पर आगे और भी कार्रवाई की जा सकती है।टीएमसी क्या करेगी?
हालाँकि ईडी की इस कार्रवाई पर टीएमसी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकन पार्टी के ख़िलाफ़ कई मामलों में क़ानूनी कार्रवाई किए जाने पर तृणमूल कांग्रेस पहले ही कह चुकी है कि उसके ख़िलाफ़ राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है। टीएमसी नेता लगातार आरोल लगाते रहे हैं कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों के खिलाफ कर रही है। उनका कहना है कि ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग और अन्य एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
अब पार्टी अदालत का रुख कर सकती है और यह तर्क दे सकती है कि सभी लेन-देन वैध व्यावसायिक अनुबंधों के तहत हुए, विमान किराये पर लेने में कोई गड़बड़ी नहीं थी, ईडी ने बिना अंतिम निष्कर्ष के कठोर कार्रवाई की है और खातों को फ्रीज करना राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावित करने की कोशिश है। यदि अदालत को प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि कार्रवाई का ठोस आधार नहीं है तो राहत भी मिल सकती है।
ईडी पर विपक्ष के बड़े आरोप
कांग्रेस, टीएमसी, आप जैसे तमाम इंडिया गठबंधन के विपक्षी दल लंबे समय से ईडी पर 'बीजेपी का राजनीतिक हथियार' होने का आरोप लगाते रहे हैं। इन दलों का आरोप है कि केवल विपक्षी नेताओं, उनके परिवारों और सहयोगियों पर ही छापे और केस हैं। उनका आरोप है कि बीजेपी के नेता, बीजेपी में शामिल होने वाले नेता या सहयोगी नेता पर केस कम या बंद हो जाते हैं। विपक्ष का दावा है कि 2014 से अब तक ईडी ने 95% से ज्यादा केस विपक्षी नेताओं के खिलाफ ही किए हैं।
ये दल आरोप लगाते रहे हैं कि ईडी की कार्रवाई कर विपक्षी नेताओं को बीजेपी में शामिल होने का दबाव डाला जाता है। हाल में टीएमसी ने भी ऐसे ही आरोप लगाए हैं। विपक्षी दलों का आरोप यह भी है कि विधानसभा या लोकसभा चुनावों से ठीक पहले बड़े-बड़े छापे और अरेस्ट करने की कार्रवाई की जाती है। हालाँकि बीजेपी का कहना है कि ईडी केवल सबूतों के आधार पर काम करती है।डेबिट-फ्रीजिंग केस में हाईकोर्ट में सुनवाई टली
इस बीच, पहले 'डेबिट फ्रीज' किए गए टीएमसी के बैंक खातों का मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में पहुँचा है। सुनवाई के दौरान संबंधित निजी बैंक ने अदालत में सीलबंद रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें खातों में जमा राशि का विवरण दिया गया है। हालांकि अदालत ने फिलहाल उस रिपोर्ट को नहीं खोला। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की व्यक्तिगत व्यस्तता के कारण अदालत ने मामले की अगली सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी।
टीएमसी के ममता बनर्जी गुट ने पार्टी के तीन बैंक खातों से पैसे निकालने पर पिछले महीने लगी रोक यानी डेबिट-फ्रीज़ को कोर्ट में याचिका लगाकर चुनौती दी थी। इस पर जस्टिस भट्टाचार्य ने 2 जुलाई को प्राइवेट बैंक को उन खातों में मौजूद रकम की जानकारी देने का आदेश दिया था। सुनवाई टल गई। इस बीच, तृणमूल कांग्रेस की ओर से अदालत को बताया गया कि पार्टी के कुछ अन्य बैंक खातों को भी डेबिट-फ्रीज कर दिया गया है। इस संबंध में पार्टी ने अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने की बात कही है।
बगावत के बाद बढ़ी टीएमसी की चुनौती
बहरहाल, यह पूरा मामला तब सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर कुछ नेताओं की ओर से पार्टी फंड के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर पुलिस में मामला दर्ज हुआ था, जिसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।