बिहार विधानसभा चुनावों से ऐन पहले नीतीश कुमार सरकार ने खजाना खोल दिया है! एक के बाद एक की जा रही घोषणाओं की कड़ी में नीतीश कुमार ने शुक्रवार को महिलाओं को लुभाने वाली एक योजना की घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य में 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' की शुरुआत की गई है, जिसके तहत प्रत्येक परिवार की एक महिला को रोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना को बिहार सरकार की कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है और इसे सितंबर 2025 से लागू किया जाएगा। इस कदम को नीतीश सरकार का 'महिला कार्ड' के रूप में देखा जा रहा है। तो क्या नीतीश कुमार और बीजेपी को इसका कुछ फायदा मिल पाएगा?

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी घोषणा में कहा है, "हमारी सरकार ने 2005 में सत्ता में आने के बाद से ही महिला सशक्तीकरण को प्राथमिकता दी है। इस नई योजना के माध्यम से हम महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत करना चाहते हैं, बल्कि उन्हें स्वावलंबी बनाकर बिहार की प्रगति में उनकी भागीदारी को और बढ़ाना चाहते हैं।'

क्या है योजना में?

  • आर्थिक सहायता: प्रत्येक परिवार की एक महिला को अपनी पसंद का रोजगार शुरू करने के लिए 10,000 रुपये की प्रारंभिक राशि दी जाएगी। यह राशि प्रथम किस्त के रूप में उनके बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी।
  • आवेदन प्रक्रिया: इच्छुक महिलाओं से आवेदन जल्द ही आमंत्रित किए जाएंगे। इस प्रक्रिया को ग्रामीण विकास विभाग द्वारा चलाया जाएगा, जिसमें नगर विकास एवं आवास विभाग भी सहयोग करेगा।
  • राशि हस्तांतरण: सितंबर 2025 से महिलाओं के बैंक खातों में राशि का हस्तांतरण शुरू हो जाएगा।
  • अतिरिक्त सहायता: रोजगार शुरू करने के छह महीने बाद महिलाओं के कार्य का आकलन किया जाएगा और ज़रूरत पड़ने पर 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी जाएगी।
  • हाट-बाजार की व्यवस्था: महिलाओं के उत्पादों की बिक्री के लिए गाँवों से लेकर शहरों तक हाट-बाजार विकसित किए जाएंगे, ताकि उनके उत्पादों को बेहतर बाजार मिल सके।

नीतीश कुमार का मक़सद

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, 'हमारा मकसद है कि बिहार की महिलाएँ न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करें, बल्कि राज्य की प्रगति में भी अहम भूमिका निभाएँ। इस योजना से न सिर्फ महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, बल्कि बिहार में ही रोजगार के बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे, जिससे लोगों को मजबूरी में बाहर नहीं जाना पड़ेगा।'

क्या चलेगा 'महिला कार्ड'?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह योजना राज्य में विधानसभा चुनावों से पहले नीतीश कुमार की सरकार का एक रणनीतिक कदम है, जिसे 'महिला कार्ड' के रूप में देखा जा रहा है। बिहार में महिलाएँ मतदाता के रूप में एक अहम हिस्सा हैं और उनकी आर्थिक सशक्तीकरण से जुड़ी यह योजना न केवल सामाजिक बदलाव ला सकती है, बल्कि आगामी चुनावों में भी जेडीयू के लिए एक मज़बूत आधार तैयार कर सकती है। लेकिन सवाल उठाए जा रहे हैं कि आख़िर महिलाओं के सशक्तिकरण की चिंता सरकार को चुनाव से ऐन पहले क्यों हुई? विपक्षी दल भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या नीतीश कुमार को पिछले पाँच सालों में इसकी ज़रूरत महसूस नहीं हुई? 

नीतीश ने हाल में कई घोषणाएँ कीं

हाल के महीनों में बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कई लुभावनी घोषणाएँ की हैं। 15 अगस्त 2025 को नीतीश कुमार ने घोषणा की कि अगले पाँच वर्षों में 1 करोड़ युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। इसका मक़सद युवाओं को आकर्षित करना और बिहार में रोजगार के अवसरों को बढ़ाना है।

19 अगस्त 2025 को नीतीश कुमार ने शिक्षा विभाग के तहत अनुकंपा के आधार पर 5,353 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए, जिसमें 4,835 विद्यालय लिपिक और 518 विद्यालय परिचारी शामिल थे। 20 अगस्त 2025 को नीतीश कुमार ने बाढ़ से प्रभावित 6 लाख 51 हजार 602 परिवारों के बैंक खातों में 7,000 रुपये प्रति परिवार की दर से कुल 456 करोड़ 12 लाख रुपये की राहत राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की। तो सवाल वही है कि क्या इससे नीतीश कुमार को चुनाव में फायदा हो पाएगा या फिर चुनाव से ऐन पहले की घोषणा को लोग समझेंगे और संदेह की नज़र से देखेंगे?