प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 मई की शाम को बिहार की राजधानी पटना पहुंच रहे हैं। उनके दो दिवसीय दौरे का मुख्य आकर्षण गुरुवार शाम को पटना में आयोजित होने वाला रोड शो होगा। इस दौरान ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को भुनाने की पूरी तैयारी है, जिसके तहत 32 स्थानों पर प्रधानमंत्री का सम्मान किया जाएगा। रोड शो को भव्य बनाने में कोई कसर बीजेपी नहीं छोड़ रही है। इसके जरिए बिहार का चुनावी माहौल बीजेपी बदलना चाहती है। जून में पीएम मोदी बिहार की कम से कम दो-तीन यात्राएं करने वाले हैं।

प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने पत्रकारों को बताया कि प्रधानमंत्री 29 मई को शाम 5 बजे पटना हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे। इसके बाद वे पटना हवाई अड्डे के नए टर्मिनल का उद्घाटन करेंगे और बिहटा में एक नए हवाई अड्डे की आधारशिला रखेंगे। उद्घाटन के बाद, प्रधानमंत्री भाजपा कार्यालय की ओर रवाना होंगे, जहां रास्ते में एक भव्य रोड शो आयोजित होगा। यह रोड शो पुलिस मुख्यालय, पटना हाईकोर्ट, और आयकर कार्यालय जैसे प्रमुख स्थानों से होकर गुजरेगा।

पीएम मोदी के पहुंचने से पहले बिहार में ऑपरेशन सिंदूर का प्रचार

इस रोड शो के दौरान प्रधानमंत्री का 32 स्थानों पर विशेष सम्मान किया जाएगा, जो ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को समर्पित होगा। यह ऑपरेशन हाल ही में आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। जायसवाल ने कहा कि यह रोड शो न केवल भाजपा कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाएगा, बल्कि बिहार की जनता के बीच भी विकास और सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करेगा।

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दौरे के दूसरे दिन, 30 मई को, प्रधानमंत्री रोहतास जिले के बिक्रमगंज में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। जायसवाल ने दावा किया कि यह रैली "ऐतिहासिक" होगी और इसमें रिकॉर्ड संख्या में लोग शामिल होंगे। पटना को मोदी के पोस्टरों से पाट दिया गया है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत करेंगे, जिनमें सड़क, रेल, और बिजली क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। हालांकि विपक्ष इसे चुनावी झुनझुना बता रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर से जोड़कर मोदी के पोस्टर कई शहरों में लगाए गए हैं।

बिहार में कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भाजपा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू, केंद्रीय मंत्री जीतन राम माझी का हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), और उपेंद्र कुश्वाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। जायसवाल ने संकेत दिया कि प्रधानमंत्री का अगला दौरा 20 जून को तय है, जिसके विवरण बाद में साझा किए जाएंगे।

प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए पटना में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। रोड शो के लगभग 3 किलोमीटर लंबे मार्ग को सजाने और साफ-सफाई का काम तेजी से चल रहा है। नागरिक प्रशासन और पुलिस ने यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। प्रधानमंत्री के इस दौरे के दौरान 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक की 16 परियोजनाओं की सौगात बिहार को मिलने की उम्मीद है। इनमें सड़क, रेल, और बिजली क्षेत्र की परियोजनाएं शामिल हैं, जिनसे बिहार के विकास को नई गति प्रदान देने के दावे किए जा रहे हैं।।

प्रधानमंत्री का यह दौरा बिहार में भाजपा और एनडीए के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना के रूप में पेश किया जा रहा है। क्योंकि इसके बाद पीएम फिर बिहार आएंगे। बीजेपी मानकर चल रही है कि इससे माहौल बदलेगा। तमाम नेता बीजेपी की ओर मुड़ेंगे।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक है। बीजेपी अपने नेतृत्व वाली एनडीए के साथ मजबूत स्थिति में दिख रही है। बीजेपी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में हाल की जीत और 2024 के लोकसभा चुनाव में बिहार में 40 में से 30 सीटें जीतकर अपनी गति को बनाए रखा है। पार्टी ने नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) के साथ गठबंधन को और मजबूत किया है, और दोनों दल मिलकर 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में 225 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रख रहे हैं।

बीजेपी की रणनीति में केंद्रीय बजट 2025 में बिहार के लिए भारी आवंटन, सामाजिक समावेशी नीतियां, और ऊपरी जातियों के साथ-साथ ओबीसी और दलित समुदायों तक पहुंच बढ़ाने पर जोर है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और नीतीश कुमार की विकास-केंद्रित छवि को भुनाने के लिए बीजेपी ने जोरदार अभियान शुरू किया है, जिसमें पटना में हाल का रोड शो और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का उत्सव शामिल है।

बिहार का चुनावी गणित

हालांकि, बीजेपी और एनडीए के लिए राह आसान नहीं है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और महागठबंधन (कांग्रेस, लेफ्ट, और अन्य) मिलकर एक मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं। आरजेडी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कुशवाहा समुदाय जैसे गैर-यादव ओबीसी वोटों में सेंध लगाकर अपनी स्थिति मजबूत की है। हाल के एक आंतरिक सर्वे में आरजेडी को 28% वोट शेयर मिलने का अनुमान है, जबकि बीजेपी को 25% और जेडीयू को 16% वोट मिलने की संभावना है।

इसके अलावा, नीतीश कुमार की बार-बार गठबंधन बदलने की छवि ("पलटू राम") और जेडीयू के कमजोर होते आधार ने बीजेपी पर दबाव बढ़ाया है। बीजेपी को गठबंधन के भीतर नेतृत्व के सवालों और जमीनी स्तर पर जेडीयू के साथ तालमेल की कमी जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, बिहार की जातिगत राजनीति और रोजगार, प्रवास, और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे मतदाताओं के बीच असंतोष पैदा कर सकते हैं।

बीजेपी की स्थिति मजबूत होने के बावजूद, बिहार का चुनाव अत्यंत मुकाबले वाला होने की उम्मीद है। पार्टी ने कमजोर प्रदर्शन करने वाले विधायकों के टिकट काटने के लिए सर्वे शुरू किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह अपनी रणनीति को और तेज करने की कोशिश में है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए का अभियान "विकास, कानून, और रोजगार" पर केंद्रित है, और बीजेपी इसका लाभ उठाने की कोशिश कर रही है।

हालांकि, महागठबंधन की एकजुटता और आरजेडी की MY-BAAP रणनीति (मुस्लिम, यादव, बहुजन, अगड़ा, आधी आबादी, और गरीब) बीजेपी के लिए खतरा बन सकती है। अगर बीजेपी और जेडीयू अपने वोट आधार को एकजुट रख पाए और केंद्र की योजनाओं का प्रचार प्रभावी ढंग से कर पाए, तो वे दो-तिहाई बहुमत हासिल कर सकते हैं। लेकिन, विपक्ष की मजबूत चुनौती और बिहार की जटिल सामाजिक-राजनीतिक गतिशीलता के कारण बीजेपी परेशान तो है।

बिहार के अलावा देशभर में ऑपरेशन सिंदूर के जश्न को फैलाने की तैयारी

इस बीच, बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे शपथ ग्रहण समारोह वाली तारीख 9 जून को 'ऑपरेशन सिंदूर' का जश्न पूरे देश में फैलाने की भी तैयारी हो रही है। ताकि उस बहाने मोदी 3.0 सरकार की उपलब्धियों को देशभर में फैलाया जा सके। महीने भर चलने वाले इस जनसंपर्क अभियान के तहत, भाजपा का लक्ष्य हर घर से जुड़ना है, खास तौर पर महिलाओं को सिंदूर भेंट करके और सूचनात्मक पर्चे बांटकर। इस अभियान में सभी केंद्रीय मंत्रियों, एनडीए सांसदों और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भागीदारी होगी। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा सांसदों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतिदिन 15-20 किलोमीटर पैदल चलें, जबकि मंत्री साप्ताहिक 20-25 किलोमीटर की यात्रा करेंगे।

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हालांकि बीजेपी का फोकस बिहार पर रहेगा, जहां इस साल नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में अगले साल चुनाव होने हैं। आउटरीच अभियान को ऑपरेशन सिंदूर से जोड़कर बीजेपी यह दिखाना चाहेगी कि केंद्र में एक मजबूत सरकार है जो किसी भी तरह की चुनौतियों से निपटने में सक्षम है।

9 जून को मोदी 3.0 का पहला साल और प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का 11वां साल पूरा होगा। अभी मोदी गुजरात की दो दिन की यात्रा पर थे। वहां वडोदरा में भी उन्होंने रोड शो किया था।