loader

रहम करो सरकार! कैसे भरेंगे हज़ारों का चालान 

यातायात के नए नियमों को लेकर देश भर में चर्चा हो रही है। घरों, चौराहों, दुकानों से लेकर ऑफ़िसों में लोग बात कर रहे हैं कि आख़िर इतना बड़ा जुर्माना क्यों लगाया जा रहा है। 1 सितंबर से नए नियम लागू हुए और भारी जुर्माने की पहली ख़बर आई कि गुड़गांव में दिल्ली के रहने वाले एक शख़्स की स्कूटी का 23 हज़ार रुपये का चालान कट गया। उसके बाद देश के कई हिस्सों से भारी-भरकम चालान होने की ख़बरें आईं। लेकिन सवाल यह है कि आख़िर लोग इतना ज़्यादा जुर्माना कैसे भरेंगे। 

बता दें कि देश भर में नये मोटर वाहन संशोधन अधिनियम के तहत एक सितंबर से नये नियम लागू कर दिये गये हैं। इसमें कुछ मामलों में चार गुना से अधिक जुर्माना लगाया गया है। ड्राइविंग लाइसेंस को जारी करने के लिए भी नियम सख़्त कर दिये गये हैं। सीट बेल्ट नहीं लगाने के लिए जुर्माना 1000 रुपये कर दिया गया है जबकि पहले यह 300 रुपये था। इमरजेंसी वाहन (एबुलेंस) को रास्ता न देने पर पहले कोई जुर्माना नहीं था लेकिन अब ऐसा करने पर 10 हज़ार रुपये का चालान देना होगा। इसी तरह शराब पीकर गाड़ी चलाने पर पहले जुर्माना 2000 रुपये था लेकिन अब इसे बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया गया है। 

NEW TRAFFIC RULES MAKE PROBLEM MOTOR VEHICLES ACT - Satya Hindi

स्कूटी वाले चालान के बाद गुड़गांव में ही एक और घटना सामने आई कि एक ट्रक ड्राइवर का ट्रैफ़िक पुलिस ने 59 हज़ार रुपये का चालान कर दिया। ट्रक ड्राइवर का नाम राम गोपाल है और उन्होंने गुड़गांव में राजीव चौक पर ट्रैफ़िक सिग्नल को जंप करने के बाद पुलिस से बचने के लिए भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। जब उनसे गाड़ी के दस्तावेज़ मांगे गए तो राम गोपाल के पास कुछ भी नहीं था। 

अब पढ़िए कि पुलिस ने राम गोपाल पर किन मामलों में जुर्माना लगाया है। अंग्रेजी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़, पुलिस ने कुल मिलाकर राम गोपाल का 10 मामलों में चालान किया है। इनमें बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाना, रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट न होना, बिना फ़िटनेस पत्र के गाड़ी चलाना, इंश्योरेंस और प्रदूषण सर्टिफ़िकेट न होना, ख़तरनाक सामान ले जाना, पुलिस के आदेशों को न मानना, ख़तरनाक ढंग से गाड़ी चलाना, ट्रैफ़िक सिग्नल का पालन न करना और सिग्नल जंप करना शामिल हैं। साथ ही राम गोपाल के ट्रक को भी जब्त कर लिया गया है। 

ताज़ा ख़बरें

टीओआई के मुताबिक़, एसीपी (ट्रैफ़िक) अशोक कुमार ने बताया कि तीन दिनों में काफ़ी ज़्यादा जुर्माने वाले चालान किये गये हैं लेकिन औसत देखें तो हर दिन 700 से 800 चालान ही हुए हैं। उन्होंने बताया कि 2,512 बाइक चालकों का चालान किया गया है और इनमें से अधिकतर ऐसे हैं जिनके ख़िलाफ़ पुलिस ने 20 हज़ार रुपये का चालान किया है। उन्होंने बताया कि लगभग सभी मामलों में लोगों ने अभी तक चालान की राशि जमा नहीं की है। इसी तरह मंगलवार को एक ट्रक ड्राइवर का 38 हज़ार रुपये का चालान किया गया और तीन ऑटो वालों का क्रमश: 42,500, 40,600 और 37 हज़ार रुपये का चालान किया गया है। 

एसीपी (ट्रैफ़िक) अशोक कुमार ने लोगों से अपील की है कि वे सभी ज़रूरी कागजात अपने पास रखें। उन्होंने कहा कि अगर लोग वाहन चलाते समय सभी कागजात अपने पास रखेंगे तो वे जुर्माना देने से बच सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यातायात के नए नियमों के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए पुलिस की ओर से जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा और इस बारे में बैनर व होर्डिंग भी लगाये जायेंगे। 

देश से और ख़बरें
गुड़गाँव में ऐसे ही कुछ और मामले सामने आए हैं जिनमें एक ऑटो ड्राइवर को ट्रैफ़िक सिग्नल जंप करने के कारण 32,500 रुपये और उड़ीसा के भुवनेश्वर में शराब पीकर ऑटो चलाने के कारण एक ड्राइवर पर 47,500 रुपये का चालान कर दिया गया। 
नये नियम लागू होने के बाद आरसी न होना, ड्राइविंग लाइसेंस न होना, ट्रिपल राइडिंग करना, प्रदूषण सर्टिफ़िकेट न होना, नंबर प्लेट सही नहीं होना, प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल, ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फ़ोन पर बात करने को लेकर भी भारी जुर्माना देना होगा।

शुरू हुआ विरोध 

भारी जुर्माने के कारण नये मोटर व्हीकल एक्ट का विरोध भी शुरू हो गया है। विपक्षी दलों की सरकारों में से कई राज्यों ने इस क़ानून को लागू करने से मना कर दिया है। मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने तो साफ़ कह दिया है कि वह इतने अधिक जुर्माने से सहमत नहीं हैं और इसे इस रूप में लागू नहीं किया जाएगा। 

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने भी भारी जुर्माने के साथ संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट को लागू करने से साफ मना कर दिया है और तो और हिमाचल की बीजेपी सरकार ने भी इसे लागू करने की सहमति नहीं दी है। ऐसे हालात में सवाल यही है कि क्या सरकार इन नियमों में बदलाव करेगी? 

सरकार लेगी हादसों की ज़िम्मेदारी?

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह नए ट्रैफ़िक नियम हैं या जनता के साथ लूटपाट के नियम हैं। उनका कहना है कि सड़कें ख़राब होने, ट्रैफ़िक सिग्नल ख़राब होने से जो हादसे होते हैं क्या सरकार उनकी भी ज़िम्मेदारी लेगी। इन नियमों से नाराज लोगों का कहना है कि आख़िर मेनहोल के खुले ढक्कन की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं के लिए कौन ज़िम्मेदार होगा। 

सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशुओं की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं के लिए कौन ज़िम्मेदार होगा। इसी तरह सरकार सड़कों से अतिक्रमण क्यों नहीं हटवाती और जाम को ख़त्म क्यों नहीं करती क्योंकि कई दुर्घटनाएँ इस कारण भी होती हैं।
देश भर में इस बारे में सोशल मीडिया से लेकर घरों-चौराहों पर चर्चा कर रहे लोगों की जुबां पर एक बात ज़रूर है कि ट्रैफ़िक नियमों का कड़ाई से पालन करवाना बहुत अच्छा क़दम है। लेकिन जुर्माने की राशि इतनी होनी चाहिए कि लोग उसे भर तो सकें।

क्या बढ़ेंगी दुर्घटनाएँ?

यह भी चर्चा आम है कि अगर पुलिस वाला किसी कार या बाइक चालक को रोकेगा और उसे पता होगा कि उसके पास गाड़ी के फलां-फलां कागजात नहीं हैं और इसके लिए उसे भारी जुर्माना देना होगा तो जुर्माने से बचने के लिए वह गाड़ी को तेजी से भगाएगा, ऐसे में दुर्घटनाएं कम होने की जगह और बढ़ेंगी। क्योंकि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि लोगों की जान बचाना ज़्यादा ज़रूरी है और अगर यातायात नियम कड़े होंगे तो दुर्घटनाएँ कम होंगी।  
संबंधित ख़बरें

भारत मध्यम आय वर्ग वाला देश है और नये नियमों का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि निजी फ़ाइनेंस कम्पनियों से क़र्ज़ लेकर या पैसा जुटाकर ही अधिकांश लोग वाहन ख़रीदते हैं। ऐसे लोगों को यदि पाँच, दस और बी हज़ार रुपये जुर्माने का भुगतान करना पड़ा तो वे कैसे करेंगे। 

ऐसी स्थिति में उनके पास दो विकल्प होंगे, या तो वे अपना वाहन हमेशा के लिए ट्रैफ़िक पुलिस के हवाले करके घर चले जाएँगे या उन्हें जुर्माना भरने लिए फिर से क़र्ज़ लेना पड़ेगा। ऐसे में यह बहस अब आम हो चुकी है कि क्या इतने सख़्त नियम सही हैं या नहीं। सरकार को निश्चित रूप से जल्द से जल्द इसका समाधान निकालना चाहिए। 

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें