मणिपुर में एनडीए के 10 विधायकों ने बुधवार को राज्यपाल अजय भल्ला से मिलकर सरकार बनाने की संभावना पैदा कर दी है। उन्होंने कहा है कि 44 विधायकों ने सरकार बनाने का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि सरकार बनाने पर आख़िरी फ़ैसला केंद्रीय नेतृत्व लेगा। फ़िलहाल राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है। इस घटनाक्रम ने मणिपुर की अस्थिर राजनीतिक हालात में हलचल मचा दी है, जहां पहले से ही सामाजिक और राजनीतिक तनाव चरम पर है।

मणिपुर में लंबे समय से जातीय तनाव और हिंसा की स्थिति बनी हुई है। इस वजह से राज्य में स्थिर सरकार चलाना चुनौतीपूर्ण रहा है। हाल ही में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद से राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ी हुई है। ऐसे में एनडीए के विधायकों का यह क़दम एक नई सरकार के गठन की दिशा में अहम माना जा रहा है। हालाँकि, द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि केंद्र राज्य में राष्ट्रपति शासन ख़त्म करने के पक्ष में नहीं है और बीजेपी विधायकों ने राज्यपाल से सद्भाव के तौर पर मुलाक़ात की।

ताज़ा ख़बरें

बीजेपी थॉकचोम राधेश्याम सिंह ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया, 'हमने 44 विधायकों की राय राज्यपाल के समक्ष रखी। जनता के दबाव और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए हमने कहा कि अब लोकप्रिय सरकार बनाने का सही समय है। राष्ट्रपति शासन आपातकालीन कदम है और इसे अंतिम विकल्प होना चाहिए। यदि नई सरकार विफल रहती है तो राष्ट्रपति शासन फिर से लागू किया जा सकता है।'

उन्होंने बताया कि मणिपुर विधानसभा के 60 में से 44 विधायक सरकार बनाने के पक्ष में हैं, जिसमें 10 कुकी-जो विधायक और पांच कांग्रेस विधायक शामिल नहीं हैं। एक सीट विधायक के निधन के कारण रिक्त है।

इससे पहले 29 अप्रैल को 21 एनडीए विधायकों ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर राज्य में लोकप्रिय सरकार बनाने की मांग की थी। इस पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह या उनके करीबी विधायकों को शामिल नहीं किया गया था। बुधवार को राज्यपाल से मिलने वाले 10 विधायक उन 21 में शामिल थे।

पत्र में लिखा गया था कि 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद से राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। उनका कहना था कि लोकप्रिय सरकार ही मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति लाने का एकमात्र उपाय है।

थॉकचोम राधेश्याम ने कहा, 'हमने राज्यपाल को वह पत्र भी सौंपा, जिसमें हमने पहले ही प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर लिखा था। 44 विधायक लोकप्रिय सरकार के गठन के लिए एकजुट हैं। हमें जनता की मांग का सम्मान करना होगा। हमने किसी व्यक्ति विशेष को नेता के रूप में प्रस्तावित नहीं किया है। केंद्र अपनी पसंद का नेता चुन सकता है।' उन्होंने बताया कि राज्यपाल के साथ भविष्य की रणनीति पर लंबी चर्चा हुई, और राज्यपाल ने मामले को देखने का आश्वासन दिया।

राज्य से और ख़बरें

हालाँकि, इस दावे में कुकी-जो समुदाय के विधायक और कांग्रेस के विधायकों को शामिल नहीं किया गया है। इस इस कदम के सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव को और जटिल बनाता है।

एनडीए का यह क़दम एक रणनीतिक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रपति शासन को ख़त्म कर एक स्थिर, चुनी हुई सरकार बनाना है। 44 विधायकों का दावा अगर सही साबित होता है तो यह सरकार गठन के लिए पर्याप्त है। लेकिन इस दावे की सत्यता को अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है। यह भी संभव है कि यह क़दम कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हो।

एनडीए के दावे में कुकी-जो विधायकों को शामिल न करना सामुदायिक तनाव को और बढ़ा सकता है। यह क़दम राज्य में समावेशी शासन की संभावनाओं पर सवाल उठाता है, क्योंकि कुकी-जो समुदाय पहले ही खुद को हाशिए पर महसूस कर रहा है। अगर सरकार बनती है तो उसे सभी समुदायों का विश्वास जीतने की चुनौती होगी।

राष्ट्रपति शासन का भविष्य

एनडीए विधायकों ने साफ़ तौर पर राष्ट्रपति शासन को ख़त्म करने की मांग की है। यह मांग मणिपुर की जनता के बीच एक लोकप्रिय सरकार की चाहत को दिखाती है। हालांकि, गवर्नर और केंद्र सरकार इस दावे की जांच करेंगे और यह प्रक्रिया समय ले सकती है। अगर दावा सही पाया जाता है तो जल्द ही सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस घटनाक्रम पर अभी तक खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दे पाए हैं। लेकिन यह साफ़ है कि एनडीए का यह क़दम उनके लिए चुनौतीपूर्ण होगा। 

सर्वाधिक पढ़ी गयी ख़बरें

इस घटनाक्रम के कई संभावित परिणाम हो सकते हैं। अगर 44 विधायकों का समर्थन सत्यापित हो जाता है तो एनडीए को सरकार बनाने का मौका मिल सकता है। इससे मणिपुर में स्थिरता लौटने की उम्मीद बढ़ेगी, बशर्ते सरकार सभी समुदायों को साथ लेकर चले। अगर यह दावा खोखला साबित होता है या समर्थन में कमी पाई जाती है तो यह एनडीए की विश्वसनीयता को नुक़सान पहुँचा सकता है। कुकी-जो समुदाय के बहिष्कार से सामाजिक अशांति बढ़ सकती है, जिसका असर सरकार की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है।

मणिपुर में एनडीए के 10 विधायकों का गवर्नर से मिलना और 44 विधायकों के समर्थन का दावा एक अहम राजनीतिक क़दम है। यह क़दम मणिपुर में स्थिरता और लोकप्रिय शासन की दिशा में एक प्रयास हो सकता है।