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लंबा जीना है…? तो बस ऐसा खाना खाएँ

लंबा जीना चाहते हैं तो स्वाद ही नहीं, खाने के मेन्यू का भी ध्यान रखें। मेन्यू में सिर्फ़ चिकन-मटन या दूध-पनीर ही नहीं, बल्कि सब कुछ हो। यानी संतुलित आहार। हर रोज़ खाने में हरी सब्जी, दूध, मीट, पनीर, अंडे जैसी चीज़ें एक तय मात्रा में हों। न तो ज़्यादा और न ही कम। ऐसा नहीं करें तो क्या होगा? इसके लिए जानी-मानी अंतरराष्ट्रीय पत्रिका लांसेट की रिपोर्ट को पढ़ें। लांसेट ने एक रिपोर्ट में कहा है कि संतुलित भोजन नहीं लेने से हर साल क़रीब 1.10 करोड़ लोगों की मौत समय से पहले हो जाती है। इसका मतलब यह हुआ कि सही खाना खाया जाए तो इतने लोग लंबे समय तक जी सकते हैं। 

लांसेट पत्रिका ने इसी हफ़्ते दुनिया भर में 'डायट' यानी खाने की मात्रा को लेकर रिपोर्ट दी है। इस रिपोर्ट को ‘ईट-लांसेट कमीशन’ ने तैयार किया है जिसमें 16 देशों के 18 सह-लेखक और 19 विज्ञानी शामिल थे। रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं।

  • लांसेट की रिपोर्ट में कहा गया है कि संतुलित आहार के लिए एक व्यस्क को हर रोज़ क़रीब 2500 कैलोरी ज़रूरी होती है। इसमें गेहूँ-चावल जैसे अनाज वाली 800 कैलोरी, सब्जी-फल वाली 204 कैलोरी और रेड मीट वाली 30 कैलोरी से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। 
पत्रिका ने विश्व भर में शुगर और रेड मीट को खाने में 50 फ़ीसदी कम करने और हरी सब्जियों व फल को बढ़ाने की सलाह दी गई है। रेड मीट में बीफ, भेड़, सुअर के माँस आते हैं। खाने में अलग से शुगर या अलग से वसा यानी घी वाली चीज़ें नहीं लेने का भी सुझाव दिया गया है। खाने में ओलिव, कनोला, सरसों जैसे वेजिटेबल ऑयल लें। बटर और घी को कम से कम खाएँ।

मीट खाएँ या न खाएँ?

लांसेट कमीशन ने हेल्दी डाइट में रेड मीट को शामिल करने का सुझाव दिया है, लेकिन कई देशों में रेड मीट ज़रूरत से ज़्यादा खाए जाने के कारण इसे कम करने और अनाज और हरी सब्जियाँ ज़्यादा खाने पर ज़ोर दिया गया है। मीट में प्रोटीन की मात्रा काफ़ी होती है, जो शरीर के लिए ज़रूरी है। हालाँकि रिपोर्ट में शाकाहारियों का भी ख़याल रखा गया है। यानी जो माँस नहीं खाते हैं वे प्रोटीन वाला दूसरा विकल्प अपना सकते हैं। 

  • रिपोर्ट में कहा गया है कि कई देशों में लोग रेड मीट ज़रूरत से ज़्यादा खाते हैं तो कई देशों में काफ़ी कम। उत्तरी अमेरिकी देशों में ज़रूरत से क़रीब सात गुना ज़्यादा मीट की ख़पत होती है। लेकिन भारत सहित दक्षिण एशिया के देशों में लोगों को ज़रूरत का आधा ही मिल पाता है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत जैसे देशों में आलू जैसे कंद-मूल शरीर की ज़रूरत के हिसाब से ज़्यादा खाते हैं। अफ़्रीका के सहारा क्षेत्र में तो लोग तय मात्रा से क़रीब आठ गुना ज़्यादा तक खाते हैं। असंतुलित भोजन के कारण लोग पहले कुपोषण का और फिर कई बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।

लांसेट ने रिपोर्ट में कहा है कि दुनिया भर में लोगों का स्वास्थ्य ख़राब होने का सबसे बड़ा कारण बढ़िया आहार नहीं मिलना रहा है। फ़िलहाल पोषण वाला खाना तो दूर, क़रीब 80 करोड़ लोगों को तो भरपेट खाना भी नहीं मिलता है।
इसका साफ़ मतलब यह हुआ कि बड़ी तादाद में लोग कुपोषित हैं। और कुपोषण से खून की कमी यानी एनीमिया, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, पाचन-तंत्र में ख़राबी जैसी पचासों बीमारियाँ पैदा होती हैं। अब ज़ाहिर है बीमारियाँ तो उम्र को कम ही करेंगी या ज़िंदगियाँ भी निगलेंगी। लांसेट ने इन्हीं ख़तरों से बचने के लिए संतुलित आहार की रिपोर्ट तैयार की है।
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