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'टेक फॉग' ऐप के जरिए बीजेपी सोशल मीडिया पर फैलाती है नफरत, द वायर का खुलासा

क्या बीजेपी आईटी से जुड़े लोग 'टेक फॉग' नामक ऐप के जरिए सोशल मीडिया पर अपनी पार्टी के नेताओं, मंत्रियों की लोकप्रियता बढ़ाने, नेरेटिव बदलने, सोशल मीडिया पर ट्रेंड कराने और अपने आलोचकों को परेशान करने के लिए करते हैं? द वायर ने आज इस रिपोर्ट का प्रकाशन करते हुए ये बातें कहीं है। दरअसल, बीजेपी मीडिया सेल की एक असंतुष्ट कर्मचारी ने टेक फॉग के बारे में सोशल मीडिया पर अप्रैल 2020 में तमाम जानकारियां शेयर की थीं। 

इसके बाद द वायर ने इस पर काम करते हुए इसकी गंभीरता से जांच की तो और भी तथ्य सामने आए। अप्रैल 2020 में एक अनाम ट्विटर अकाउंट @ Aarthisharma08 ने बीजेपी आईटी सेल के असंतुष्ट कर्मचारी होने का दावा करते हुए एक अत्यधिक गुप्त ऐप 'टेक फॉग' के बारे में ट्विटर पर लिखना शुरू किया। उस व्हिसलब्लोवर ने दावा किया कि इस ऐप का इस्तेमाल सत्ताधारी पार्टी से जुड़े राजनीतिक गुर्गों द्वारा पार्टी की लोकप्रियता को बनावटी रूप से बढ़ाने, इस के आलोचकों को परेशान करने और प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धारणाओं (नेरेटिव) में हेरफेर करने के लिए किया जाता है।

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उस कर्मचारी ने लिखा था कि टेक फॉग 'रीकैप्चा कोड को बायपास' करने में सक्षम था। यानी सोशल मीडिया के ऐसे प्लेफॉर्म पर,  जहां कैप्चा भरने के बाद ही एंट्री मिलती है, इस ऐप के जरिए वहां तक सीधे पहुंचा जा सकता है।  इसी वजह से आईटी सेल के कर्मचारियों को विभिन्न मुद्दों पर 'ऑटो-अपलोड टेक्स्ट और हैशटैग ट्रेंड्स' करने में आसानी होती थी। द वायर के रिपोर्टरों ने इस मामले की और उस असंतुष्ट कर्मचारी की जांच पड़ताल शुरू की। व्हिसलब्लोवर से भी बात की गई।

आईटी सेल के सूत्रों ने रिपोर्टरों से दावा किया कि उनके रोजाना के काम में टारगेट वाले हैशटैग के साथ ट्विटर के 'ट्रेंडिंग' सेक्शन को हाईजैक करना, बीजेपी से जुड़े कई व्हाट्सऐप ग्रुप बनाना और उनका प्रबंधन करना और टेक फॉग ऐप के जरिए बीजेपी की आलोचना करने वाले पत्रकारों का ऑनलाइन उत्पीड़न करना शामिल है। 

सूत्र ने द वायर टीम को बताया - 

बीजेपी आईटी सेल के पूर्व राष्ट्रीय सोशल मीडिया प्रमुख और बीजेपी युवा मोर्चा के पदाधिकारी देवांग दवे ने आईटी सेल के लोगों से नौकरी का वादा किया था, लेकिन उन लोगों से किए वादे पूरे न करने पर उसने सच बताने के लिए आगे आने का फैसला किया था। दरअसल, दवे ने इन लोगों से 2018 में कहा था अगर बीजेपी 2019 में सत्ता में लौटी तो वो उन लोगों की नौकरियां लगवा देंगे। केंद्र में सरकार बन गई लेकिन उन लोगों से किया गया वादा पूरा नहीं हुआ।


तकनीक का इस्तेमालउसने द वायर टीम को तमाम एन्क्रिप्टेड ईमेल और ऑनलाइन चैट रूम आदि के कई स्क्रीनकास्ट और स्क्रीनशॉट भेजे। स्रोत ने अपनी पहचान सत्यापित करने के लिए वेतन की पर्ची और बैंक विवरण भी साझा किए (इस शर्त पर कि इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा)। इनसे साबित हुआ कि वह स्रोत वाकई बीजेपी आईटी सेल से जुड़ा हुआ है।

स्रोत ने द वायर को टेक फॉग ऐप तक सीधी पहुंच नहीं दी। उसने कहा था यह विभिन्न सुरक्षा प्रतिबंधों की वजह से है। उस ऐप के डैशबोर्ड में लॉगिन करने के लिए तीन वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) की आवश्यकता और एक स्थानीय फ़ायरवॉल का उपयोग करना पड़ता था। इसलिए बाहरी व्यक्ति उसे नहीं खोल सकता था। उसने द वायर टीम को ईमेल के जरिए युवा मोर्चा के पदाधिकारी से जोड़ दिया। उसने कोड स्क्रिप्ट दे दी, जिससे टीम को टेक फॉग ऐप को होस्ट करने वाले सुरक्षित सर्वर से कनेक्ट होने वाले विभिन्न बाहरी टूल और सेवाओं की पहचान करने में मदद मिली। 

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उसी स्क्रिप्ट ने द वायर की टीम को ऐप को होस्ट करने वाले सर्वरों में से एक तक पहुँचाया, जिससे स्वतंत्र रूप से यह सत्यापित करने में सफलता मिली कि ऐप एक्टिव थी और वो एक प्रोटोटाइप नहीं थी। स्रोत द्वारा दिए गए सबूत के अलावा, द वायर की टीम ने सोर्स द्वारा दी गई विभिन्न सोशल मीडिया प्रॉपर्टीज का व्यापक फोरेंसिक विश्लेषण करने और नेटवर्क के बुनियादी ढांचे की पुष्टि करने के लिए ओपन-सोर्स खोजी तकनीकों का भी इस्तेमाल किया। टीम ने स्वतंत्र विशेषज्ञों और कई मौजूदा कर्मचारियों का भी इंटरव्यू लिया। इतने सारे लोगों से मिली जानकारी, सूचनाओं से साफ हो गया कि बीजेपी आईटी सेल इस ऐप का इस्तेमाल इस लोकतांत्रिक देश में किस तरह सत्तारूढ़ पार्टी की छवि बनाने और विपक्षी लोगों की छवि धूमिल करने के लिए कर रहा है।
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