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जानिए, क्या है मथुरा का कृष्ण जन्मभूमि मंदिर विवाद

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा की एक अदालत से कहा है कि श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर विवाद मामले में 4 महीने के भीतर सभी अर्जियों का निस्तारण कर दिया जाए। हाई कोर्ट ने यह आदेश मनीष यादव की ओर से दायर याचिका पर दिया है। हाई कोर्ट से अनुरोध किया गया था कि मथुरा की अदालत में चल रहे सभी मामलों को एक साथ जोड़कर उनकी सुनवाई की जाए।

दरअसल, मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर विवाद से जुड़े मामले में विभिन्न दीवानी अदालतों के पास कई आवेदन और याचिकाएँ लंबित हैं। इनमें कटरा केशव देव मंदिर के 13.37 एकड़ के परिसर में भगवान श्री कृष्ण के जन्मस्थान के पास से मसजिद को हटाने की मांग की गई है। यह मसजिद कथित तौर पर 1669-70 में मुगल सम्राट औरंगजेब के आदेश पर बनाई गई थी।

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सवाल है कि आख़िर यह विवाद क्या है कि यह मामला हाई कोर्ट तक पहुँचा। इस मंदिर को लेकर ताजा विवाद शुरू होने की आशंका तभी शुरू हो गई थी जब अयोध्या मंदिर मामले में फैसला हुआ था। उसी वक़्त नारे लगाए जाने लगे थे कि 'काशी-मथुरा बाक़ी है...'। यूपी चुनाव में भी नारा लगाया गया था 'मथुरा की बारी है...'।

पिछले साल भी विवाद तब हुआ था जब अखिल भारत हिंदू महासभा ने ईदगाह मसजिद के अंदर भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति स्थापित करने और उसका जलाभिषेक करने की घोषणा की थी। हालाँकि वह ऐसा नहीं कर सकी थी।

हिंदू संगठनों का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने 1669 में मंदिर को तुड़वा दिया था और इसके एक हिस्से में मसजिद का निर्माण कराया था। इन संगठनों का मानना है कि ईदगाह मसजिद वाली जगह पर ही कंस की जेल हुआ करती थी।

क्या है विवाद

  • यह विवाद मुख्य तौर पर 13.37 एकड़ ज़मीन का है। इसमें से 10.9 एकड़ जमीन श्रीकृष्ण जन्मस्थान और 2.5 एकड़ जमीन शाही ईदगाह मसजिद के पास है।
  • श्रीकृष्ण विराजमान और अन्य हिंदू संगठन उस पूरी ज़मीन पर मालिकाना हक चाहते हैं। वे चाहते हैं कि मसजिद कहीं और शिफ़्ट की जाए। 
  • विवाद की वजह 400 साल पहले के घटनाक्रमों में ढूंढा जाता है। 1669-1670 में मुगल शासक औरंगजेब ने कथित तौर पर मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर को ध्वस्त करवा दिया था और एक हिस्से में मसजिद बनवाई थी। 
  • कहा जाता है कि 1770 में मुगलों और मराठाओं में जंग हुई और इसमें मराठाओं की जीत हुई। इसके बाद मराठाओं ने फिर से वहाँ भगवान केशवदेव मंदिर का निर्माण कराया।
  • दावा किया जाता है कि धीरे-धीरे ये मंदिर भी जर्जर होता चला गया, कुछ सालों बाद भूकंप में मंदिर ध्वस्त हो गया और आखिरकार यह टीले में बदल गया।
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  • अंग्रेजों ने 1815 में कटरा केशवदेव की जमीन को बनारस के राजा पटनीमल को बेच दिया।
  • 1920-1930 के दशक में जमीन खरीद को लेकर विवाद शुरू हुआ। मुसलिम पक्ष ने दावा किया कि अंग्रेजों ने जो जमीन बेची, उसमें कुछ हिस्सा ईदगाह मसजिद का भी था।
  • 1944 में उद्योगपति जुगल किशोर बिरला ने राजा पटनीमल के वारिसों से ये जमीन खरीद ली। आज़ादी के बाद 1951 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट बना और ये 13.37 एकड़ जमीन कृष्ण मंदिर के लिए इस ट्रस्ट को सौंप दी गई।
  • 1953 में मंदिर निर्माण शुरू हुआ और 1958 में पूरा हुआ। यह मंदिर शाही ईदगाह मसजिद से सटकर बनाया गया। 1958 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान बना।
  • 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान ने शाही मसजिद ईदगाह ट्रस्ट के साथ एक समझौता किया। इसमें तय हुआ कि 13.37 एकड़ जमीन पर मंदिर और मसजिद दोनों बने रहेंगे।
लेकिन अब जो मथुरा की विभिन्न अदालतों में याचिकाएँ दायर की गई हैं उनमें कहा गया है कि वे उस समझौते को नहीं मानते हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट दावा करता रहा है कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान द्वारा किया गया समझौता ग़लत है क्योंकि उसको ऐसा करने का अधिकार नहीं है। अब इन्हीं सभी याचिकाओं को एक साथ सुनवाई करने का आदेश दिया गया है।

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