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फ़ोटो साभार: वीडियो ग्रैब/ऑल्ट न्यूज़

'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' नारा नहीं लगा था, ठोका राजद्रोह का मुक़दमा!

सोशल मीडिया पर तो छोड़िए, टीवी चैनलों पर दिखाए गए एक वीडियो में दिखता है कि किसी चुनाव के लिए एक प्रत्याशी नामांकन भरने जा रहा है। उसमें प्रत्याशी के ज़िंदाबाद के नारे लगाए जा रहे थे। इसी वीडियो को कुछ न्यूज़ चैनलों ने इस दावे के साथ ख़बर चला दी कि 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' के नारे लगाए गए। मामला तो यहाँ तक पहुँच गया कि उस मुखिया प्रत्याशी और कई अन्य लोगों पर राजद्रोह और लोक शांति में बाधा डालने सहित कई धाराओं में मुक़दमा दर्ज कर लिया गया। मुखिया प्रत्याशी सहित 10 लोगों को गिरफ़्तार भी कर लिया गया। मोहम्मद ज़ुबैर ने इस मामले में ट्विटर थ्रेड में पूरे घटनाक्रम को विस्तार से फ़ैक्ट चेक कर सचाई बताई है!

यह मामला झारखंड के गिरीडीह ज़िले के डोकीडीह का है। वहाँ पंचायत चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया चल रही है। उसमें एक प्रत्याशी शाकिर हुसैन नामांकन करने पहुँचे थे। उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक थे और वे उनके पक्ष में नारे लगा रहे थे। इसी दौरान का एक वीडियो वायरल हुआ।

जल्द ही यह वीडियो न्यूज़ चैनलों और वेबसाइटों पर चलने लगा। उन रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि नामांकन के दौरान 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' के नारे लगाए गए। लेकिन क्या इन रिपोर्टों में उस वीडियो या उसमें लगाए गए नारे की किसी ने पुष्टि की? ख़बरों की सत्यता की पड़ताल करने के लिए मशहूर 'ऑल्ट न्यूज़' ने वीडियो की तो पड़ताल की ही है, उन रिपोर्टों की भी पड़ताल की जिन्होंने बिना जाँचे उस ख़बर को चला दी।

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ऑल्ट न्यूज़ के अनुसार, न्यूज़18 बिहार झारखंड टीवी चैनल ने अपने एक वीडियो रिपोर्ट में दावा किया कि डोकीडीह के मुखिया प्रत्याशी ‘शफीक हैदर’ के नामांकन जुलूस में ‘पाकिस्तान जिन्दाबाद’ के नारे लगे और मुखिया प्रत्याशी ने अपने समर्थकों को नहीं रोका। 

रिपोर्ट के अनुसार, प्रोपगेंडा वेबसाइट ऑप इंडिया, आरएसएस की मुखपत्रिका पाञ्चजन्य, ज़ी न्यूज, आज तक, न्यूज़-18, दैनिक जागरण, इंडिया टीवी, टाइम्स नाउ, हिंदुस्तान, एनडीटीवी, न्यू इंडियन एक्स्प्रेस, इंडिया टुडे, नवभारत टाइम्स, फर्स्ट पोस्ट, रिपब्लिक भारत, दैनिक भास्कर समेत कई प्रमुख न्यूज़ पोर्टलों ने यही दावा किया। 

लेकिन ऑल्ट न्यूज़ ने फैक्ट चेक कर बताया है कि ये दावे ग़लत हैं। फ़ैक्ट चेक करने वाली इस वेबसाइट ने दावा किया कि उसने डोकीडीह के स्थानीय लोगों से संपर्क किया और लोगों ने कहा कि जुलूस के दौरान 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' के नारे नहीं लगे। इसके साथ ही उसने वायरल वीडियो और उसी वक़्त के दूसरे ऐंगल से लिए गए वीडियो की पड़ताल की। रिपोर्ट में दावा किया गया कि वीडियो को धीमी गति में सुनने पर ‘शाकिर हुसैन ज़िंदाबाद, शाकिर हुसैन ज़िंदाबाद, डोकीडीह पंचायत का मुखिया कैसा हो – शाकिर हुसैन जैसा हो’ सुना जा सकता है। 

वायरल वीडियो में प्रवेश द्वार पर तैनात फ़ोर्स को ये कहते हुए सुना जा सकता है, 'बस तीन आदमी अंदर जाएंगे'। ऑल्ट न्यूज़ ने एक दूसरे वीडियो की पड़ताल कर कहा कि दूसरे वीडियो को भी धीमी गति में सुनने पर यही पता चलता है कि उसमें ‘शाकिर हुसैन ज़िंदाबाद' के नारे लगाए जा रहे थे।

फ़ैक्ट चेक करने वाली इस वेबसाइट ने लिखा है कि कुल मिलाकर डोकीडीह मुखिया प्रत्याशी शाकिर हुसैन के नामांकन जुलूस के दौरान ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे नहीं लगाए गए थे बल्कि ‘शाकिर हुसैन ज़िंदाबाद’ के नारे लगे थे। तो सवाल है कि ऐसी ख़बरें क्या बिना आधार के इस आधार पर चलाई जा रही हैं क्योंकि समाज में काफ़ी ज़्यादा नफ़रत घोल दी गई है?

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