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दूसरे देशों में भी लग चुका है ऑड-ईवन फ़ॉर्मूला, क्या रहे हैं नतीजे?

ऑड-ईवन फ़ॉर्मूला यानी एक दिन वे गाड़ियाँ सड़कों पर निकलें जिनके नंबर प्लेट का अंतिम नंबर सम हो और दूसरे दिन वे गाड़ियाँ चलें जिनके नंबर प्लेट का अंतिम अंक विषम हो, दिल्ली में दूसरी बार लागू किया जा रहा है। पर इसके पहले दुनिया के कई अलग-अलग देशों में यह आजमाया जा चुका है और उनके नतीजे मिलेुजले रहे हैं। कुछ जगहों पर अनुमान से बेहतर नतीजे आए हैं और प्रदूषण का स्तर नीचे आ गया है तो कुछ जगहों पर ऐसा नहीं हुआ है। 
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बीजिंग, चीन

चीन सरकार ने राजधानी बीजिंग में 2008  के ओलंपिक खेलों के ठीक पहले ऑड-ईवन फ़ॉर्मूला लागू किया था। इसके बाद वहाँ के प्रदूषण में 20 प्रतिशत की कमी आ गई। सरकार इसे बीच-बीच में लागू करती रहती है, प्रदूषण स्तर बढ़ने पर ऑड-ईवन फ़ॉर्मूला लागू किया जाता है और एक स्तर से नीचे आने पर उसे हटा लिया जाता है। इसके अलावा सरकार ने 2011 यह भी फ़ैसला किया कि हर साल अधिकतम 20 हज़ार गाड़ियों का ही रजिस्ट्रेशन हो सकेगा।
इसके बाद चीन सरकार ने 20 अगस्त, 2015 को ऑड-ईवन फ़ॉर्मूला एक बार फिर लागू किया। इसका नतीजा यह हुआ कि बीजिंग में प्रदूषण के स्तर में कमी आई। सरकार अब इसे स्थायी तौर पर लागू करना चाहती है। इसकी वजह यह नहीं है कि वहाँ स्थिति सुधर नहीं रही है, इसकी वजह यह है कि इस फ़ॉर्मूले का नतीजा अच्छा आया है। सरकार इससे उत्साहित है। 

पेरिस, फ्रांस

फ्रांस की राजधानी पेरिस में ऑड-ईवन फ़ॉर्मूला परिवहन व्यवस्था का हिस्सा बन चुका है। वहाँ प्रदूषण एक स्तर से ऊपर होने पर अपने आप लागू कर दिया जाता है। उस दिन सरकारी परिवहन व्यवस्था में लोग मुफ़्त यात्रा कर सकते हैं। उस स्तर से प्रदूषण नीचे होने पर पहली की तरह हो जाता  है। यहाँ अंतिम बार मार्च 2015 मे ऑड-ईवन फ़ॉर्मूला लागू किया गया था। 

बोगोटा, कोलंबिया

कोलंबिया ने राजधानी बोगोटा में ऑड-ईवन फ़ॉर्मूला शुरू किया। पर इसे ज़्यादा कामयाबी नहीं मिली क्योंकि यह निश्चित समय अवधि के लिए ही था। लोग उस समय सीमा के बाद गाड़ियाँ लेकर सड़कों पर निकल पड़ते थे, जिससे कुल मिला कर प्रदूषण जस का तस रहा। 

मेक्सिको

लातिन अमेरिकी देश मेक्सिको में 1989 में ऑड-ईवन फ़ॉर्मूला पहली बार लागू किया गया। इसे वहाँ की स्थानीय भाषा में 'होय नो सर्कुला' कहते हैं। देश के सभी शहरों में इसे बारी-बारी से एक-एक हफ़्ते के लिए लागू किया गया। इससे कार्बन मोनोऑक्साइड के स्तर में लगभग 11 प्रतिशत की कमी हुई। इसे लंबे समय के लिए लागू करने का एक नतीजा यह भी हुआ कि लोगों ने कार वगैरह खरीदना कम कर दिया, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर और कम हो गया। 

इटली

इटली के अलग-अलग शहरों में ऑड-ईवन फ़ॉर्मूला लागू किया जाता रहा है, उसका नतीजा भी मिलाजुला रहा है। पिछले साल 28 दिसंबर को मिलान और रोम में इसे लागू कर दिया गया। इसके बाद मिलान और पाविया शहरों में अधिकारियों ने फ़ैसला लिया कि सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक तीन-तीन दिन के लिए सम और विषम नंबर प्लेट की गाड़ियाँ चलेंगी। इसके साथ ही सरकार ने यह व्यवस्था थी कि इन दिनों सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सस्ता कर दिया। 

ऑड-ईवन फ़ार्मूला दुनिया के दूसरे देशों में भी लागू किया गया है। 

ग्रीस ने सबसे पहले 1982 में राजधानी एथेन्स में ऑड-ईवन फ़ार्मूला लागू किया था। इसे बाद में वहाँ स्थायी कर दिया गया। इसके तहत एक स्तर से ऊपर प्रदूषण पर साइरन बजते ही अपने आप लोग गाड़ियाँ सडकों से हटा लेते हैं। ऐसा तब तक चलता है, जब तक स्थिति सामान्य न हो जाए। स्थिति के सामान्य होते ही फिर लोगों को बताया जाता है और उसके बाद पहले की स्थिति में सबकुछ लौट जाता है। 

लातिन अमेरिकी देश चिली की राजधानी सैन्टिएगो में पहली बार इसे 1986 में लागू किया गया था। बाद में इसे 2001 में एक बार फिर आजमाया गया था। इसी तरह ब्राजील के शहर साओ पॉलो में 1997 में, बोलीविया की राजधानी ला पाज़ में 2003, इक्वेडोर की राजधानी क्वीटो में 2010 में इसे लागू किया गया। फ़िलीपीन्स सरकार ने मनीला में 19915 में ही लागू किया था। अमेरिकी राज्य कैलीफ़ोर्निया के सान होसे शहर में ऑड ईवन फ़ॉर्मूला 2005 में लगाया गया था। 
इन देशों के अलग-अलग समय में अलग-अलग अनुभव रहे हैं। पर मोटे तौर पर यह माना गया है कि प्रदूषण में लगभग 20 प्रतिशत की कमी देखी गई। 

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प्रमोद मल्लिक
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