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नए संसद भवन पर लगा अशोक स्तंभ, ओवैसी ने पीएम मोदी पर उठाए सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने सोमवार को नए संसद भवन की छत पर लगे अशोक स्तंभ का अनावरण किया। यह अशोक स्तंभ 6.5 मीटर ऊंचा है और कांसे का बना हुआ है। इसका वजन लगभग 9500 किलो है। इसे सपोर्ट देने के लिए स्टील का एक ढांचा भी बनाया गया है जिसका वजन 6500 किलो है। 

बता दें कि नए संसद का निर्माण कार्य जोर-शोर से जारी है। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी भी इस मौके पर मौजूद रहे।

एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर सवाल उठाए हैं। ओवैसी ने कहा है कि संविधान संसद, सरकार और न्यायपालिका की शक्तियों का बंटवारा करता है। सरकार का मुखिया होने के नाते प्रधानमंत्री को संसद भवन के ऊपर राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण नहीं करना चाहिए था। 

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट 

सेंट्रल विस्टा का कुल प्रोजेक्ट 20 हज़ार करोड़ का है और इसके तहत प्रधानमंत्री का नया आवास जिसमें चार मंजिल वाली 10 इमारतें होंगी और यह 15 एकड़ में होगा, बनाया जा रहा है। इसके अलावा उप राष्ट्रपति का आवास भी 15 एकड़ में बनाया जा रहा है जिसमें पांच मंजिला इमारतें होंगी। 

इसी प्रोजेक्ट के तहत नया संसद भवन भी बनाया जा रहा है। इसके निर्माण में 971 करोड़ की लागत आएगी और इसे दिसंबर, 2022 तक पूरा किया जाना है। प्रोजेक्ट के तहत मौजूदा संसद भवन के सामने नया तिकोना भवन बन रहा है। 

सांसदों के लिए लॉन्ज, पुस्तकालय, संसद की अलग-अलग समितियों के कमरे, पार्किंग की जगह सहित कई तरह की सुविधाएं इस भवन में उपलब्ध होंगी। नया संसद भवन 64,500 स्क्वायर किमी में बन रहा है।

नया संसद भवन सन के अंत तक तैयार हो जाएगा और तब भारत अपनी आज़ादी का 75 वां साल मना रहा होगा। पुराने संसद भवन में जवाहर लाल नेहरू, डॉ. भीम राव आम्बेडकर, सरदार पटेल, मौलाना आज़ाद, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लाल बहादुर शास्त्री, ज़ाकिर हुसैन, इंदिरा गांधी, डॉ. राम मनोहर लोहिया, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे बड़े कद के नेताओं की मौजूदगी रही थी। 

संसद के मौजूदा भवन का डिज़ाइन 1911-12 में विख्यात निर्माण विशेषज्ञ और स्थापत्यकार इडविन लुटियन्स और हरबर्ट बेकर ने तैयार किया था। सन 1921 में इसका निर्माण शुरू हुआ और संसद भवन सन 1927 में बनकर तैयार हुआ था।

विपक्ष ने की थी आलोचना

कोरोना के दौरान भी सेंट्रल विस्टा का काम जारी रहने पर मोदी सरकार की आलोचना हुई थी। कोरोना के दौरान केंद्र सरकार ने इस परियोजना को आवश्यक सेवा के तहत रखा था और इसके लिए ज़रूरी तमाम तरह की मंजूरी दे दी गई थी। 

विपक्ष ने इस परियोजना का यह कह कर विरोध किया था कि फ़िलहाल इसकी कोई ज़रूरत ही नहीं है और इस संकट में इस पैसे का इस्तेमाल दूसरे आवश्यक काम में किया जा सकता है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी कहा था कि मोदी सरकार को इस प्रोजेक्ट को रद्द कर देना चाहिए। 

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वास्तुकार और नगर योजनाकारों ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का विरोध किया था। कुछ लोग इस प्रोजेक्ट को रोकने के लिये सुप्रीम कोर्ट भी गए थे। 

सरकार का तर्क 

सरकार ने इस प्रोजेक्ट के पक्ष में दलील देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वर्तमान संसद भवन में जगह की बेहद कमी है, आग लगने या भूकंप से बचने के लिए भी ज़रूरी इंतजाम नहीं हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों के एक जगह होने का तर्क भी सरकार ने दिया था जिससे सरकार के काम करने की क्षमता बढ़ सके। 

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